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डॉ. परवेज और डॉ. रमीज ने एसएन में मतांतरण नेटवर्क बनाया, 'इस्लामिक मेडिकोज' ग्रुप से मेडिकल छात्राओं को फंसाया

Published: Mon, 12 Jan 2026 07:28 AM (IST)

आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में डॉ. परवेज अंसारी और डॉ. रमीज ने 'इस्लामिक मेडिकोज' समूह बनाकर मतांतरण का नेटवर्क ...और पढ़ें

आगरा एसएन मेडिकल कालेज के सीनियर ब्वायज हास्टल स्थित मस्जिद। जागरण। रमीज।

आगरा एसएन मेडिकल कालेज के सीनियर ब्वायज हास्टल स्थित मस्जिद। जागरण। रमीज।

HighLights

  1. मतांतरण कराने के लिए इस्लामिक मेडिकोज वाट्सएप ग्रुप बनाया

  2. आपत्तिजनक वीडियो बनाकर मतांतरण के लिए दबाव डाला जाता था

जागरण संवाददाता, आगरा। दिल्ली बम धमाके में पकड़े गए डॉ. परवेज अंसारी और किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ में यौन शोषण और मतांतरण के आरोपित डॉ. रमीज ने एसएन मेडिकल कॉलेज से मेडिकल छात्राओं को जाल में फंसाकर मतांतरण कराने का नेटवर्क खड़ा किया। इसके लिए इस्लामिक मेडिकोज के नाम से वाट्सएप ग्रुप बनाया,

एसएन के सीनियर ब्वायज हॉस्टल स्थित मस्जिद में बाहरी लोगों के साथ नमाज पढ़ते थे। इस मामले की जांच कर रही एजेंसी एसएन में डॉ. परवेज और डॉ. रमीज के संपर्क में रहे लोगों का ब्योरा खंगाल रही हैं।

दिल्ली धमाके में पकड़े गए डॉ. परवेज

केजीएमयू के जूनियर रेजिडेंट रमीज को यौन शोषण और मतांतरण में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। डॉ. रमीज ने वर्ष 2012 में एसएन मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में प्रवेश लिया था, वर्ष 2012 में ही पिछले वर्ष नवंबर में हुए दिल्ली धमाके की आरोपित डॉ. शाहीन के भाई डॉ. परवेज अंसारी ने एसएन में एमडी (मेडिसिन) में प्रवेश लिया था। ये दोनों की एसएन परिसर स्थित सीनियर ब्वॉयज हॉस्टल में रहे। हास्टल में प्रवेश करते ही बाईं तरफ मस्जिद है। मस्जिद में ही दोनों नमाज पढ़ते थे, सूत्रों के मुताबिक इन दोनों ने मेडिकल छात्राओं को जाल में फंसाकर मतांतरण कराने के लिए इस्लामिक मेडिकोज वाट्सएप ग्रुप बनाया।

हॉस्टल में स्थित मस्जिद में बाहरी लोगों के साथ पढ़ते थे नमाज

इस ग्रुप से मुस्लिम मेडिकल छात्रों के साथ ही कई मौलाना को जोड़ा। इस ग्रुप से जुड़े मेडिकल छात्र हॉस्टल के कमरों में बैठक करते थे, तकरीर भी की जाती थी। इसी दौरान डॉ. रमीज ने मतांतरण के लिए बैच की टॉपर छात्रा को अपने जाल में फंसाया, इसके बाद ग्रुप से जुड़े कई और सदस्यों ने भी मेडिकल छात्राओं से दोस्ती की। एसएन में 2012 से 2017 तक बड़े स्तर पर मतांतरण के लिए मेडिकल छात्राओं को जाल में फंसाने की कोशिश की। हर वर्ष 14 से 15 मुस्लिम मेडिकल छात्र और जूनियर रेजीडेंट एसएन में प्रवेश लेते थे इन सभी को ग्रुप से जोड़ लिया जाता था।

मतांतरण के लिए बैच की टॉपर मेडिकल छात्रा को जाल में फंसाया

हॉस्टल में स्थित मस्जिद में बाहरी लोगों के आने और नमाज पढ़ने का कई बार विरोध भी हुआ, इसे लेकर जमकर हंगामा भी हुआ था। डा. परवेज अंसारी का मामला सामने आने के बाद एजेंसियों ने एसएन प्रशासन से कश्मीर सहित उत्तर प्रदेश से बाहर के मेडिकल छात्र और जूनियर डाक्टरों को ब्योरा मांगा था।

एसएन मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि जांच एजेंसियों द्वारा जो भी ब्योरा मांगा जाएगा वह उपलब्ध कराया जाएगा। हास्टल स्थित मस्जिद में कुछ बाहरी लोग भी नमाज पढ़ने आते हैं।

मुस्लिम छात्रों को ही देते हैं हास्टल का रूम

एसएन से एमबीबीएस और एमडी व एमएस पूरी होने के बाद जब इस्लामिक मेडिकोज ग्रुप के सदस्य हास्टल छोड़कर जाते थे तो अपने रूम ग्रुप से जुड़े मुस्लिम मेडिकल छात्र और जूनियर रेजीडेंट को ही देते थे। यह सिलसिला अभी भी जारी है।

वीडियो बनाकर करते हैं ब्लैकमेल, कई छात्राएं चंगुल से बची

सूत्रों के मुताबिक, मतांतरण के लिए मेडिकल छात्र और जूनियर डॉक्टर पहले साथी छात्राओं से दोस्ती करते हैं। उनकी हर गतिविधि पर नजर रखने के साथ ही लेक्चर थिएटर से लेकर लाइब्रेरी में भी उनके साथ ही रहते थे, धीरे धीरे उनसे नजदीकी बढ़ाने के बाद उनके आपत्तिजनक वीडियो बना लेते थे। इसके बाद मतांतरण के लिए दबाव बनाते थे, कई छात्राएं इनके जाल में फंस गईं।