आगरा, जेएनएन। रंगों- उमंगों का त्यौहार होली ब्रज में वसंत पंचमी 29 जनवरी के दिन से शुरु होगी। भारत तथा दुनियाभर के देशों में मनाया जाने वाला यह उत्सव 45 दिन तक चलेगा। ब्रज में बसंत पंचमी के दिन ठा. बांकेबिहारी मंदिर में ठाकुरजी को गुलाल अर्पण कर, रसिया, धमार होली गीतों का गायन शुरू होगा। मंदिरों में दर्शन के लिए आने वाले भक्तों पर भी गुलाल उड़ाकर ब्रज की होली का एहसास करवाएंगे।

प्राचीन परंपराओं के अनुसार मंदिरों में होली की तैयारियां शुरू हो रही हैं। फाल्गुन शुक्ल पूर्णमासी की रात होली जलाए जाने वाले चौराहों पर इसी दिन डांढ़ा गाड़ दिया जाएगा। जो इस बात का प्रतीक होता है कि ब्रज में अब होली के पारंपरिक आयोजन शुरु हो गए हैं। डांढ़ा लकड़ी का एक टुकड़ा होता है जिसके आसपास होलिका सजाई जाती है।

ठा. बांकेबिहारी मंदिर के प्रबंधक उमेश सारस्वत ने बताया कि फाल्गुन शुक्ल एकादशी को रंगभरनी एकादशी कहते हैं, इस दिन ठा. बांकेबिहारी मंदिर में गुलाल के स्थान पर ठाकुरजी को टेसू के फूलों से बने रंग के छींटे देकर गीले रंगों की होली की शुरु होगी। यही रंग प्रसाद रूप में भक्तजनों पर भी छिड़का जाता है।

सेवायत नित गाएंगे होली के पद

ठा. बांकेबिहारी मंदिर में बसंत पंचमी से ही होली के पदों का गायन शुरू होगा। मान्यता है कि ठाकुरजी को होली के लिए तैयार करने को सेवायत उन्हें पद गाकर सुनाते हैं। ताकि रंगभरनी एकादशी से शुरू होने वाली गीले रंगों की होली खेलने को ठाकुरजी पूरी तरह तैयार हो जाएं।

45 दिन चलेगा होली का सिलसिला

बसंत पंचमी को ब्रज के सभी मंदिरों में होली शुरू होगी। जो 45 दिन तक चलेगी। बसंत पंचमी से गुलाल की होली शुरू होगी। तो रंगभरनी एकादशी से ठा. बांकेबिहारी, राधाबल्लभ समेत सभी मंदिरों में गीले रंगों की होली का आनंद लेने को देश-दुनिया से श्रद्धालु डेरा डालेंगे।

 

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