आगरा, जागरण संवाददाता। ऋण दिलाने के नाम पर फर्म की मालिक से लिए निरस्त चेकों में हेराफेरी करके शातिर ने छह लाख रुपये निकाल लिए। इतनी बड़ी रकम का भुगतान करने से पहले बैंक कर्मी ने फर्म को सूचना नहीं दी। मामले में सिकंदरा थाने में फर्म की मालिक ने बैंक कर्मी समेत दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।

लोहामंडी के नया बांस की रहने वाली दीप्ति दीक्षित की एपी इंटरप्राइजेज के नाम से फर्म है। उनकी फर्म का खाता सेंट्रल बैंक आफ इंडिया, सिकंदरा शाखा में है। दीप्ति के अनुसार एक सप्ताह पहले उनके पति के मोबाइल पर फोन आया। फोन करने वाले ने प्रधानमंत्री ऋण योजना के तहत लिमिट के बारे में जानकारी करने लगा। उन्होंने उसे कार्यालय पर आकर बात करने की कहा।युवक अगले दिन उनके कार्यालय पर आया। उन्हें ऋण दिलाने का आश्वासन दिया।

दीप्ति के अनुसार युवक ने उनसे फर्म के पंजीकरण से संबंधित कागजात, आयकर रिर्टन की कापी, छह महीने की बिक्री कर के रिटर्न की कापी और तीन निरस्त चेक हस्ताक्षर करके देने की कहा। सारे दस्तावेज लेने के बाद युवक चला गया। अगले दिन फोन करके उनसे खाते में रुपये जमा कराने की कहा। युवक का कहना था कि बैंक के आडिट में रकम दिखाना जरूरी है, इसके बाद वह रकम को निकाल सकती हैं। उन्होंने युवक की बातों में आकर खाते में रकम जमा करा दी। उनके खाते में छह लाख रुपये से ज्यादा रकम थी।

युवक ने 29 अप्रैल को दो निरस्त चेक से लिखावट को मिटाकर छह लाख रुपये भरकर बैंक से यह रकम निकाल ली। चेक लगाने में दिल्ली के किसी निखिल त्यागी नाम के युवक की आइडी लगाई गई थी। दीप्ति का आरोप है कि 50 हजार रुपये से ज्यादा रकम निकालने पर बैंक से काल करके पूछा जाता है। जबकि छह लाख रुपये का भुगतान करने के बावजूद बैंक कर्मी ने उन्हें फोन करके इसकी पुष्टि तक नहीं की। इंस्पेक्टर सिकंदरा कमलेश सिंह ने बताया कि बैंक कर्मी श्वेता और निखिल त्यागी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। बैंक कर्मी का कहना है कि भीड़ के चलते उसने फर्म मालिक को फोन करके पुष्टि किए बिना रकम भुगतान कर दी थी। इंस्पेक्टर ने बताया कि विवेचना के बाद कार्रवाई की जाएगी।