आगरा, जागरण संवाददाता। भारत रत्‍न पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी का आगरा से गहरा नाता रहा। बटेश्वर उनका पैतृक स्थान है, तो आगरा की गली उनको पहचानती है। राष्ट्रीय अधिवेशन में आए तो शहर के लोगों की पुष्प वर्षा से अभिभूत होकर कहा था कि आगरा के लोग फूलों से घायल कर देते हैं। यहां की बेड़ई, जलेबी, समोसा भी उनको बेहद पसंद थी।

वर्ष 1988 में आगरा के कोठी मीना बाजार मैदान में भाजपा का राष्ट्रीय अधिवेशन और कार्यकारिणी हुई थी। उस समय लालकृष्ण आडवाणी पार्टी के अध्यक्ष बने थे। इसके बाद पुराने शहर में दोनों जीप में सवार होकर निकले थे। हर बाजार ने अपने उत्पादों के द्वार बनाए थे। साड़ियों, स्टेशनरी के भव्य द्वार बने थे और घर-घर से पुष्प वर्षा हुई थी। इसके बाद अटल बिहारी ने खुद कहा था कि आगरा के लोग तो फूलों से घायल कर देते हैं।

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल अटल जी को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं। वे कहते हैं कि ऐसे युग पुरुष विरले होते हैं। वे अकसर आगरा आते-जाते थे। उन्होंने बताया कि वर्ष 1990 में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मस्थली फरह में आए थे, वे उस समय समिति के अध्यक्ष थे। एक दिन पूर्व वे आए तो बेलनगंज की बेड़ई और जलेबी लेकर हम पहुंचे थे। उन्होंने जमकर स्वाद लिया था। रामबाबू का पराठा और समोसे भी वे पसंद करते थे। वे इन्हें स्वयं कहकर कार्यकर्ताओं से मंगा भी लिया करते थे।

जब खाया था बैगन का भरता और बाजरे की रोटी

वाजपेयी छह अप्रैल 1999 को अपने पैतृक गांव बटेश्वर आए थे। एक घंटे के दौरे में उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन किया था। उनके लिए होटल से भोजन की व्यवस्था की गई थी, लेकिन उन्होंने अपने परिवार से बैंगन का भरता और बाजरे की रोटी बनवाकर खाई थी। स्वजन बताते हैं कि पीएम के रूप में वे आए, लेकिन कभी अहसास नहीं होने दिया।

ढहा दी थी कोठरी

वर्ष 1942 में आजादी की लड़ाई में वाजपेयी भी योगदान दे रहे थे। 18 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने अपने पैतृक गांव बटेश्वर में वन विभाग की उस कोठरी को तोड़ दिया, जिसमें अंग्रेज अधिकारी बैठते थे। घटना के दौरान गश्त से लौटकर अधिकारी पहुंच गए थे और उन्होंने वाजपेयी को देख लिया था। कोठरी तोड़ने के आरोप में उन्हें जेल जाना पड़ा था। कोठरी के अवशेष घटना की यादें ताजा कर देते हैं।

रक्षाबंधन पर बहन का रहता था इंतजार

पूर्व पीएम की बहन कमला दीक्षित जयपुर हाउस स्थित अलका पुरी में रहती थीं। वे रक्षाबंधन पर परिवार सहित उन्हें राखी बांधने ग्वालियर, दिल्ली पहुंचती थीं। स्व. कमला दीक्षित की पुत्रवधु निर्मला दीक्षित बताती हैं कि सास बिना कुछ खाए भाई अटल को राखी बांधने जाती थीं, तो वे भी उनका इंतजार बिना कुछ खाए हुए करते थे। इसके बाद पूरा परिवार साथ भोजन करता था। 2015 में सास का निधन हो गया।

साहित्य जगत ने दी गीतों की श्रद्धांजलि

पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती की पूर्व संध्या पर स्वरों से अटल गीत गंगा सजी। ताजनगरी के फनकार सुधीर नारायण ने अपनी आवाज के मधुर धागे में पिरो कर अटल जी को उनके जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं।

साहित्य संगीत संगम के तत्वावधान प्रधान डाकघर सभागार में डाक विभाग के सहयोग से मंगलवार को आयोजित हुए इस कार्यक्रम में मुख्य संरक्षक पीएमजी आगरा अंबेश उपम्नयु,मुख्य अतिथि सांसद प्रोफेसर एसपी सिंह बधेल ने अटल बिहारी वाजपेयी के चित्र के समक्ष भाव सुमन अर्पित किए।

इस दौरान अटल जी के लिखे हुए कई गीत जीवन बीत चला जीवन बीत चला, क्या खोया क्या पाया जग में, आओ मन की गांठे खोलें, चौराहे पर लुटता चीर प्यादे से पिट गया वजीर, काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं गीत नया गाता हूं, क्या सच है क्या शिव क्या सुंदर आदि गीत सुधीर नारायण और रश्मि, श्रेया ,पूजा , हेमा, सुशील सरित, देशदीप, रिंकू , अंशु,रेनू आदि के स्वर में प्रस्तुत किए। सोम ठाकुर, डा .डीबी शर्मा, रानी सरोज गौरिहार ,अरुण, डा. वी एन कौशल, दिगम्बर सिंह धाकरे अशोक चौबे, सर्वज्ञ शेखर ,विजयलक्ष्मी शर्मा जी आदि उपस्थित रहे। संचालन सुशील सरित ने किया। धन्यवाद ज्ञापित दिनेश ने किया।

 

Posted By: Tanu Gupta

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