आगरा, सत्येंद्र दुबे। 85 साल के कैलाश सिंह की पनीली आंखों में आज भी अपने अटल की तस्वीर कैद है। कैलाश सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी के साथ बचपन गुजारा है। जब भी अटल बटेश्वर आए, यमुना की रेती में कैलाश सिंह के साथ अठखेलियां कीं। लेकिन, अब उन आंखों में कुछ रह गया है तो बस यादें।

कैलाश सिंह

अटल की पुण्य तिथि पर फिर बटेश्वर को उनकी याद आ गई। अपने अटल पर तीर्थराज बटेश्वर के ग्रामीणों को गुमान था। कैलाश उन्हीं ग्र्रामीणों में है, जब अटल प्रधानमंत्री बने, तो पूरे गांव में घूमकर बताया कि अटल मेरे सखा हैं। निधन की खबर पर पूरा बटेश्वर रात भर रोया था। कैलाश सिंह पूरी रात करवट बदलते रहे। एक साल बीत गया, लेकिन यादें जेहन में आज भी ताजा हैं। कैलाश कहते हैं कि जब भी यादें आती हैं, तो तकलीफ होती है। बटेश्वर में रहने वाली गंगादेवी अटल के भांजे की बहू हैं।

गंगा देवी

जब बटेश्वर में रेल लाइन का शिलान्यास करने अटल बिहारी वाजपेयी आए तो गंगा देवी के घर गए और उनके हाथ का बना खाना खाया। अटल की चर्चा चली, तो वह रो पड़ीं, बोलीं, यादें सहेजने को भी कुछ नहीं किया गया। कम से कम उनकी यादें जिंदा रहें, इतना तो करना चाहिए था। रिश्ते में अटल के भतीजे अश्वनी वाजपेयी और रमेश वाजपेयी भी बेहद दुखी हैं। कहते हैं कि किसी ने अटल की सुधि नहीं ली। बातें बड़ी-बड़ी की गईं, लेकिन हुआ कुछ भी नहीं।

रमेश

राम सिंह आजाद और शिवराम सिंह वर्मा कहते हैं कि हम जब कहीं बाहर जाते थे, तो बताते थे कि अटल हमारे गांव के हैं, लेकिन गांव की दुर्दशा ने सवाल खड़े कर दिए हैं। एक साल बाद फिर आज इनकी आंखों में अटल की तस्वीर उभर आई। बोले, अपने अटल को कौन भूल सकता है।  

Posted By: Tanu Gupta