आगरा, जागरण संवददाता। आलू ट्रांसपोर्ट सब्सिडी की अंतिम तिथि 30 सितंबर निकल गई है, लेकिन एक भी व्यापारी और किसान को लाभ नहीं मिला है। नियमों की जटिलता में जहां आवेदन जांच के लिए अटके हैं, वहीं शीतगृह में भंडारित 45 फीसद आलू पर भी संकट खड़ा हो गया है। ट्रांसपोर्ट सब्सिडी की अंतिम तिथि 31 दिसंबर करने के लिए किसान सोमवार को कलक्ट्रेट पहुंच गए और डीएम एनजी रवि कुमार को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने सभी किसानों को आश्वस्त किया है।

रालोद पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी रामवीर सिंह के नेतृत्व में कलक्ट्रेट पहुंचे दर्जनों किसानों में आलू को बाजार नहीं मिल पाने को लेकर आक्रोश था। चौधरी रामवीर सिंह का कहना था कि निकासी धीमी गति से हो रही है। किसानों को बाहर की मंडियों में बाजार नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में अगर ट्रांसपोर्ट सब्सिडी भी बंद हो जाएगी तो किसानों पर बड़ी मुश्किल आ जाएगी। गत वर्ष भी किसानों को 20 से 30 फीसद आलू फेंकने को मजबूर होना पड़ा था। इस वर्ष भी किसानों के सामने ऐसा संकट खड़ा न हो, इसलिए सब्सिडी की अंतिम तिथि बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर तिथि नहीं बढ़ाई गई तो किसान और संगठन आंदोलन करने को बाध्य होंगे। इस दौरान सत्यवीर चौधरी, धर्मवीर चौधरी, सौरभ चौधरी, चौधरी रूप सिंह, अली कुरैशी, अनुज सोलंकी, सूर्याश चतुर्वेदी, पुष्पेंद्र यादव, माधव चौधरी, टिंकू वर्मा आदि मौजूद थे। ये है आंकड़ा

4.5 करोड़ पैकेट हुए थे भंडारित।

30 सितंबर तक 45 फीसद शीतगृह में बचे हुए।

30 सितंबर थी आलू ट्रांसपोर्ट सब्सिडी की अंतिम तिथि।

30 नवंबर है शीतगृह बंद होने की अंतिम तिथि।

Posted By: Jagran

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