आगरा, जागरण संवाददाता। जन शिकायतों के निस्तारण को बनाई गई समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (आइजीआरएस) का अफसर कैसा मजाक बना रहे हैं, इसका एक उदाहरण दुकान से सोने की चोरी मामले में की गई शिकायत का फर्जी निस्तारण है। एक सर्राफ की दुकान से हुई लूट का आठ माह बाद भी पर्दाफाश नहीं हुआ है। न बदमाश पकड़े गए और न ही सोना बरामद हुआ। इसके बाद भी पुलिस 20 बार पोर्टल पर शिकायत के बाद निस्तारण कर चुकी है।

सिकंदरा क्षेत्र में कारगिल चौराहे पर श्रीकृष्णा ज्वैलर्स के नाम से दुकान है। 28 जून 2019 को दुकान पर आए बदमाश 200 ग्राम सोने के गहने लूट ले गए थे। बदमाशों के सीसीटीवी फुटेज मिल गए थे। इसके बाद भी पुलिस बदमाशों तक नहीं पहुंच सकी। थाने और चौकी के चक्कर लगाकर परेशान हुए सर्राफ ने बड़ी उम्मीद के साथ जुलाई 2019 में आइजीआरएस पर इसकी शिकायत की थी। वहां से उसका फर्जी निस्तारण कर दिया। उसके मोबाइल पर कुछ दिन बाद ही निस्तारण का एसएमएस पहुंच गया। इसके बाद वे बार-बार आइजीआरएस पर शिकायत करते रहे और पुलिस कागजों में फर्जी निस्तारण करती रही। केके त्यागी ने बताया कि वे अब तक 20 बार आइजीआरएस पर शिकायत कर चुके हैं। 13 फरवरी को उनके मोबाइल पर एसएमएस आया है कि आपके संदर्भ संख्या ... का निस्तारण कर दिया गया है। निस्तारण आख्या जनसुनवाई पोर्टल एप पर देखी जा सकती है। सर्राफ का कहना है कि आइजीआरएस पर शिकायत निस्तारण के नाम पर उनसे अधिकारी मजाक कर रहे हैं। अब उनका इससे भी भरोसा उठ गया है।

हर माह 700 शिकायत फीड करने का टारगेट

आइजीआरएस पर कुछ शिकायतें सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से यहां भेजी जाती हैं। मुख्यमंत्री संदर्भ की इन शिकायतों का निस्तारण समयबद्ध करना पड़ता है। इसमें पुलिस पीडि़ता का नंबर आदि जानकारी वहीं से दी गई होती है। इसके साथ ही जिले स्तर पर आने वाली शिकायतों को भी आइजीआरएस पर फीड करना होता है। फिलहाल आगरा से प्रतिमाह 700 शिकायतों को फीड करने का टारगेट दिया गया है। इन शिकायतों के निस्तारण की स्थिति की भी लखनऊ से निगरानी की जाती है। इन्हीं की फीडिंग में आगरा में गड़बड़ी करने का मामला सामने आया है। प्रार्थना पत्र फीड करते समय उसमें लिखा पीडि़त का नंबर स्केनिंग में काट दिया जाता है। साथ ही मोबाइल नंबर के कॉलम में जीरो-जीरो भर दिया जाता है। तय समय में ही इसका निस्तारण दिखा दिया जाता है। इससे रेंकिंग में नंबर मिल जाते हैं। बाद में फीडबैक में पोल खुलने का डर भी नहीं रहता।

इसलिए काटते हैं नंबर

- आइजीआरएस पर पीडि़त के नंबर की डिटेल में उसका नंबर भरने पर उसके शिकायत निस्तारण की प्रगति एसएमएस से उसके पास पहुंचेगी। किसको जांच के लिए शिकायत दी गई? कब किसने जांच की? यह जानकारी पीडि़त को एसएमएस से मिलती रहेगी। इससे बचने को ही डिटेल अपलोड करते समय नंबर नहीं लिखा जाता है।

- प्रार्थना पत्र पर लिखे नंबर से सीएम कार्यालय से रैंडम फीडबैक लिया जाता है। इसमें भी पोल खुलने की संभावना रहती।

आइजीआरएस पर जनवरी की शिकायतों की स्थिति

कुल प्राप्त शिकायतें- 1385

निस्तारित- 1038

शेष- 247

एक नंबर से 39 पर खिसकी आगरा की रैंक

आइजीआरएस की शिकायतों के निस्तारण में आगरा की रैंकिंग चार माह से पहले स्थान पर थी। जनवरी में 39 वीं रैंक मिली है। फीरोजाबाद की 34, अलीगढ़ और मैनपुरी की 53, हाथरस की 17 रैंक रही है। एडीजी अजय आनंद ने इन सभी जिलों के कप्तानों को पत्र भेजा है। असंतोष व्यक्त करते हुए स्थिति में सुधार के निर्देश दिए हैं।

पोल खुलने से मची खलबली

मुख्यमंत्री कार्यालय से औचक जांच में मामला खुलने के बाद अब यहां खलबली मची है। एसएसपी बबलू कुमार का कहना है कि शिकायतों की फीडिंग में गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। 

Posted By: Tanu Gupta

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