आगरा, निर्लोष कुमार। ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में विकास कार्यो का रास्ता साफ हो गया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रलय ने तदर्थ रोक के अपने आदेश को संशोधित कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा यथास्थिति पर दिए आदेश के बाद मंत्रलय ने यह कदम उठाया है।

छह दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने टीटीजेड में अपने द्वारा लागू किए गए यथास्थिति के आदेश को हटा दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने यहां बुनियादी सुविधाओं वाली परियोजनाओं को अनुमति प्रदान कर दी थी।

तदर्थ रोक हटाने को यथा स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहे पर्यावरण मंत्रलय ने शुक्रवार को अपने तदर्थ रोक के आदेश को संशोधित कर दिया।

टीटीजेड में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण को पर्यावरण मंत्रालय ने आठ सितंबर, 2016 को तदर्थ रोक (एडहॉक मोरेटोरियम) लागू कर दिया था। यहां केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा निर्धारित व्हाइट कैटेगरी के उद्योगों को छोड़कर ग्रीन, ऑरेंज व रेड कैटेगरी के नए उद्योगों की स्थापना व पुराने उद्योगों के विस्तार पर रोक लगा दी गई थी। यहां बुनियादी सुविधाओं सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, सिविल एन्क्लेव, हॉस्पीटल, रबड़ चैकडेम, वेस्ट टू एनर्जी प्लांट आदि प्रोजेक्ट भी इसके चलते फंस गए थे। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने 22 मार्च, 2018 को विजन डॉक्यूमेंट का फस्र्ट ड्राफ्ट जमा होने तक टीटीजेड में यथा स्थिति (स्टेटस क्वो) का आदेश कर दिया था। इसके बाद यहां सभी तरह के विकास कार्यों पर रोक लग गई थी। टीटीजेड अथॉरिटी व पर्यावरण मंत्रालय द्वारा एनओसी नहीं जारी की जा रही थीं।

छह दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा टीटीजेड में स्वयं के द्वारा लागू यथा स्थिति के आदेश को हटा दिया था। उसने यहां बुनियादी सुविधाओं वाली परियोजनाओं को अनुमति प्रदान कर दी थी। तदर्थ रोक हटाने को यथा स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहे पर्यावरण मंत्रालय ने भी शुक्रवार को तदर्थ रोक के अपने आदेश को संशोधित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के छह दिसंबर के आदेश के अनुसार अब टीटीजेड में परियोजनाएं/गतिविधियां संभव हो सकेंगी। टीटीजेड के लिए परियोजनाओं व गतिविधियों से रोक हटना बड़ी राहत देने वाली है। कमिश्नर अनिल कुमार ने बताया कि पर्यावरण मंत्रलय ने तदर्थ रोक के अपने पुराने आदेश में संशोधन किया है। अब यहां रुकी हुई बुनियादी सुविधाओं वाली परियोजनाओं व गतिविधियों को अनुमति प्राप्त कर पूरा किया जा सकेगा।

उद्योगों को कोई राहत नहीं

मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा छह दिसंबर को दिए आदेश को सर्वोपरि माना है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया था कि टीटीजेड में अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्र में ही ईको-फ्रेंडली व गैर-प्रदूषणकारी सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगों की स्थापना हो सकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए भी नेशनल इन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) और सेंट्रल इंपॉवर्ड कमेटी (सीईसी) की रिपोर्ट को अनिवार्य कर दिया है। टीटीजेड में व्हाइट कैटेगरी में आने वाले उद्योग ही अनुमन्य हैं। तदर्थ रोक पर आदेश के संशोधित होने के बावजूद ग्रीन, ऑरेंज व रेड कैटेगरी के उद्योगों को कोई राहत नहीं मिलेगी।

ये प्रोजेक्‍ट होंगे पूरे

सिविल एंक्लेव

धनौली, बल्हेरा और अभयपुरा की 23 हेक्टेअर जमीन पर सिविल एंक्लेव का निर्माण किया जाएगा। अधिकांश जमीन अधिग्रहण का कार्य पूरा हो गया है। तदर्थ रोक के आदेश को संशोधित करने से क्लीयरेंस में आसानी रहेगी।

लेदर पार्क

किरावली तहसील में महुअर, सकतपुर सहित आसपास के गांवों की 288 एकड़ जमीन ली जानी थी। नींव भी भरी जा चुकी है लेकिन मामला वर्तमान में एनजीटी में पहुंच चुका है। अनुमति मिलने के कार्य शुरू हो सकेगा।

वेस्ट टू एनर्जी प्लांट

कुबेरपुर में पीपीपी मॉडल पर चार सौ करोड़ रुपये से वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाया जाएगा। हर दिन पांच सौ मीट्रिक टन कूड़ा से दस मेगावाट बिजली बनेगी। प्लांट की अधिकतम क्षमता 15 मेगावाट की होगी। इसके लिए हर दिन आठ सौ मीट्रिक टन कूड़ा की जरूरत होगी।

ब्रिक्स बनाने का प्लांट

कुबेरपुर में पीपीपी मॉडल पर निजी कंपनी मलबा निस्तारण का प्लांट लगाएगी। शहर से हर दिन डेढ़ सौ मीट्रिक टन मलबा निकलता है। मलबे से ब्रिक्स बनाई जाएगी।

पीएम आवास योजना

शहर में फिर से गरीबों के मकान बन सकेंगे। पूर्व की तरह फिर से पांच हजार वर्ग मीटर से अधिक के नक्शे पास होंगे। इससे एडीए को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। इन सब के बीच पीएम शहरी आवास योजना को भी जीवंत किया जाएगा। इससे गरीबों को आवास मिल सकेंगे। बिल्डर और एडीए मिलकर दस हजार आवास बनाएगा।

रियल एस्टेट को मिलेगा फायदा

नोटबंदी के बाद से रियल एस्टेट की गति धीमी है। नियम में बदलाव होने से रफ्तार तेज होगी। इससे अधिक से अधिक रोजगार के अवसर विकसित हो सकेंगे।

पेयजल और सीवर लाइन को मिल सकेगी एनओसी

317 करोड़ की पेयजल और 373 करोड़ की सीवर लाइन को बिछाने की अनुमति मिल सकेगी। इससे पेयजल संकट और सीवर की समस्या का निस्तारण होगा। शहर में वर्तमान में एक हजार किमी लंबी पानी की पाइप लाइन बिछी हुई है। गंगाजल प्रोजेक्ट के तहत वर्ष 2008 से 2011 तक लाइन बिछाई गई लेकिन वर्तमान में लाइन जर्जर हो चुकी है। वहीं शहर में 520 किमी लंबी सीवर लाइन बिछी हुई है। जल निगम के नए प्रोजेक्ट के तहत 273 करोड़ से शहर की 400 कॉलोनियों में सीवर लाइन बिछाई जाएगी। यह 251 किमी लंबी होगी।

तीन एसटीपी के लगने का रास्ता साफ

शहर में दर्जनभर एसटीपी हैं। तीन नए एसटीपी के लगने का रास्ता साफ हो गया है। दो एसटीपी धांधूपुरा और एक एत्माद्दौला में लगेगा।

आगरा मेट्रो प्रोजेक्ट

आगरा मेट्रो प्रोजेक्ट को विभिन्न एनओसी मिलने में आसानी रहेगी। शहर में मेट्रो का ट्रैक तीस किमी लंबा होगा। सबसे पहले सिकंदरा से ताज पूर्वी गेट तक मेट्रो चलेगी।

- आगरा मेट्रो प्रोजेक्ट की लागत 8372 करोड़ रुपये है।

- आगरा मेट्रो की कुल लंबाई 30 किमी होगी

- दोनों कॉरिडोर पर तीस स्टेशन होंगे।

- दोनों कॉरिडोर पर 22 स्टेशन एलीवेटेड और आठ स्टेशन अंडरग्राउंड होंगे।

- पहला कॉरिडोर - सिकंदरा से ताज पूर्वी गेट तक : 14 किमी लंबाई, 6.53 किमी एलीवेटेड, 7.64 किमी अंडरग्राउंड

- दूसरा कॉरिडोर- आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक : 16 किमी। यह पूरा ट्रैक एलीवेटेड होगा।

रबर डैम का होगा रास्ता साफ

413 करोड़ की लागत से यमुना पर प्रस्तावित रबर डैम की डीपीआर मार्च में तैयार हो गई थी। छह एनओसी में से ताज ट्रिपेजियम जोन की एनओसी भी अटकी हुई है। तदर्थ रोक के संशोधित आदेश के कारण अब टीटीजेड की एनओसी मिलने में अड़चन नहीं आएगी। इसके बाद प्रदूषण और पर्यावरण क्लीयरेंस लेना होगा।

शीतगृह के निर्माण में भी नहीं आएगी अड़चन

जिले में नए शीतगृह निर्माण के लिए एनओसी नहीं मिल पा रही थी। तदर्थ रोक के संशोधित आदेश के बाद अब नए शीतगृह का निर्माण हो सकेगा। आधा दर्जन नए शीतगृह एनओसी के इंतजार में हैं।

10 बड़े हॉस्पिटल खुलने की जगी उम्मीद

शहर में 10 बड़े हॉस्पिटल बनकर तैयार हैं लेकिन पर्यावरण मंत्रालय की तदर्थ रोक के चलते पंजीकरण बंद है। इससे करोड़ों रुपये के हॉस्पिटल के प्रोजेक्ट बीच में अटके हुए हैं। आइएमए के अध्यक्ष डॉ. रवि मोहन पचौरी ने बताया कि अब नए हॉस्पिटल के पंजीकरण की उम्मीद जगी है।

पर्यावरण मंत्री को भेजा था पत्र

लघु उद्योग भारती ने गुरुवार को ही पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र भेजा था। संगठन के अखिल भारतीय महामंत्री गोविंद लेले व अखिल भारतीय संयुक्त महामंत्री राकेश गर्ग ने विकास कार्यों की शुरुआत को ताज ट्रेपेजियम जोन में लागू तदर्थ रोक हटाने की मांग की थी। शुक्रवार को तदर्थ रोक के आदेश को मंत्रालय ने संशोधित कर दिया।

इनकी क्‍या है राय

टीटीजेड में जो भी सरकारी व गैर सरकारी परियोजनाएं व गतिविधियां लंबित हैं, पर्यावरण मंत्रालय के आदेश के बाद अब उन्हें पूरा करना संभव हो सकेगा। रुका हुआ विकास कार्य गति पकड़ेगा।

-उमेश शर्मा, सदस्य टीटीजेड अथॉरिटी

अभी आधा काम हुआ है। परियोजनाएं व गतिविधियां यहां अब हो सकेंगी। उद्योगों के लिए आवश्यक की गई नीरी व सीईसी की रिपोर्ट के लिए प्रक्रिया पर्यावरण मंत्रालय से तय कराने को प्रयास किए जाएंगे।

-राकेश गर्ग, उपाध्यक्ष लघु उद्योग निगम लिमिटेड

पर्यावरण मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का ही अनुपालन किया है। तदर्थ रोक पर आदेश संशोधित होने से जनहित की परियोजनाएं व गतिविधियां अब हो सकेंगी। उद्योगों को अभी कोई राहत नहीं दी गई है।

-डॉ. शरद गुप्ता, पर्यावरणविद

 

Posted By: Tanu Gupta

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