आगरा, जेएनएन। फतेहपुर सीकरी में हजरत चिश्ती का मशहूर तबरूख (नानखताई) आज भी प्रचलित है। पर्यटक व जायरीन हजरत चिश्ती की जियारत के पश्चात नान खताई का तबरूख लेकर ही घर जाते हैं। वहीं बनाने का भवन खताई खाना खुर्द-बुर्द होने के कगार पर है। इस संरक्षित स्मारक पर एएसआई का अधिकारी नहीं होने के कारण खताई खाना की प्राचीन बनावट में परिवर्तन करके अवैध निर्माण कराया जा रहा हैं।

विश्व में सबसे ऊंचा वल्र्ड हैरीटेज मोन्यूमेंट बुलंद दरवाजा से मात्र 70-80 मीटर दूरी पर स्थित मुगलिया सल्तनत में तामीर खताई खाना भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की सूची में संरक्षित स्मारक के रूप में दर्ज है। लेकिन हद तो यह है कि उक्त संरक्षित स्मारक पर एएसआई विभाग अभी तक अपना कब्जा नहीं कर सका हैं।

स्मारक खताई खाना में रहने वाले व्यक्तियों द्वारा संरक्षित स्मारक के स्वरूप व मुगलियाकाल के चिन्हों को मिटाकर अवैध निर्माण भी किया जा रहा है। जिससे संरक्षित स्मारक खताई खाना का अस्तित्व खत्म होने के कगार पर है।

सूत्रों की मानें तो उक्त स्मारक की बिक्री कर खुर्द बुर्द किया जा रहा हैं। सीकरी स्मारक उपमण्डल के संरक्षक सहायक द्वारा स्मारक पर हो रहे अवैध निर्माण की माह जून में थाना सीकरी में रिपोर्ट दर्ज कराकर अपनी पीठ थपथपा ली है।

खताई खाना खुर्द बुर्द के मामले में अधीक्षण पुरातत्वविद बंसत कुमार से जानकारी लेने को फोन किया लेकिन फोन रिसीव नहीं किया गया।

विश्वदाय स्मारक से संदर्भित सुप्रीम कोर्ट में लंबित रिट संख्या 653/94 के आदेश अनुपालन व लोकसभा द्वारा बनाये कानून के तहत पुरातत्व विभाग के अधिकारी कर्मचारी थाना सीकरी में सैकड़ों व्यक्तियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करा चुके हैं। चौंकाने वाला तथ्य तो ये है कि एएसआई और पुलिस की जुगलबंदी से सभी अवैध निर्माण पूरे हो चुके हैं। इतना ही नहीं उच्च अधिकारी भी मौन बने रहे।

 

Posted By: Prateek Gupta

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