आगरा, जेएनएन। एसएन मेडिकल कॉलेज में गैरहाजिर चल रहे डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस में संलिप्त हैं। इसमें से एक डॉक्टर 10 साल से तो एक अन्य डॉक्टर चार साल से मेडिकल लीव पर हैं। इन सभी की सेवा समाप्ति के लिए नोटिस जारी किया गया है। अनुपस्थित डॉक्टरों से पूछा गया है कि गलत तरीके से कार्य से अनुपस्थिति के कारण क्यों न आपकी सेवाओं को समाप्त कर दिया जाय?

प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. रजनीश दुबे ने बताया कि इन चिकित्सकों की अनुपस्थिति के कारण चिकित्सा सेवाओं पर असर पड़ रहा है। इसमें एसएन के यूक्लियर मेडिसिन विभाग के डॉ. अंशुमान अग्रवाल 10 साल से ज्यादा समय से अनुपस्थित हैं। पैथोलॉजी विभाग की डॉ. दीपिका जैन, मेडिसिन विभाग के डॉ. हिमांशु कुमार यादव नौ साल से नहीं आ रहे। एसपीएम विभाग के डॉ. संदीप सचदेवा चार साल से मेडिकल लीव पर हैं। स्त्री रोग विभाग के डॉ. अमित टंडन और सर्जरी विभाग के डॉ. मयंक करीब दो साल से नहीं आ रहे हैं। इसमें से कुछ डॉक्टर अपना अस्पताल और क्लीनिक चला रहे हैं। प्रदेश सरकार का मानना है कि इससे आम जन को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। कारण यह कि प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। एक-एक डॉक्टर को कई मरीज देखने पड़ रहे हैं। जबकि ऐसे कई डॉक्टर हैं जो लंबे समय से नौकरी पर नहीं आ रहे। इससे सरकार की छवि पर भी असर पड़ रहा है। उधर, प्रदेश के सात मेडिकल कॉलेज और कानपुर के दो संस्थानों के 30 चिकित्सकों की सेवा समाप्ति करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

स्वास्थ्य केंद्रों के दो डॉक्टर अनुपस्थित

स्वास्थ्य केंद्रों से दो डॉक्टर करीब एक साल से अनुपस्थित हैं। सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स ने बताया कि इनकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।

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