आगरा, जागरण संवाददाता। भोले भंडारी, त्रिपुरारी जितने सरल और सहज, उतनी ही उनकी पूजा अर्चना भी आसान है। सावन माह के आराध्‍य देव तीनों लोक के स्‍वामी हैं। उनके प्रिय माह में यदि कुछ विशेष सावधानियों का ध्‍यान रखते हुए आराधना की जाए शुभ फलदायी होता है। ज्‍योतिषाचार्य डॉ शोनू मेहरोत्रा के अनुसार सावन के महीने मे भगवान शिव की पूजा का शुभ फल कई गुना बढ़ जाता है।मगर शिव के पूजन मे कुछ सावधानियां भी रखनी पड़ती हैं।

देवों के देव महादेव। कालों के भी काल महाकाल। वे जरा सी पूजा में प्रसन्न हो जाते हैं, सो भोले कहलाए। कुछ चूक हो जाए तो भाले के समान भी हैं। क्रोध के कारण रौद्र रूप भी धारण कर लेते हैं। डॉ शोनू कहती हैं कि हिन्दू धर्म में प्रत्येक देवी- देवता की पूजा की अलग-अलग पद्धतियां हैं। पूजा में अलग-अलग सामग्री का उपयोग किया जाता है। कुछ सामग्री ऐसी होती हैं, जिनका प्रयोग करना उल्‍टा परिणाम भी दे सकता है। ऐसा

भगवान शिव के साथ भी है। सभी जानते हैं कि भोलेनाथ को बेलपत्र, भांग, धतूरा आदि प्रिय हैं, लेकिन यहां हम ऐसी पांच सामग्री बताते हैं, जो भगवान शिव को अर्पित नहीं करनी चाहिए।

ज्‍योतिषाचार्य डॉ शोनू मेहरोत्रा

केतकी का फूल

डॉ शोनू कहती हैं कि केतकी के फूलों से जुड़ा एक एक प्रसंग है। दरअसल, एक दिन भगवान विष्णु और ब्रह्म देव खुद को सबसे अधिक ताकतवर साबित करने के लिए आपस में ही लड़ रहे थे। नौबत संहारक अस्त्रों के

प्रयोग तक पहुंच गई। इसी बीच ज्योतिर्लिंग के रूप में भगवान शिव प्रकट हुए। शिव ने दोनों की लड़ाई खत्म करने के मकसद से इस ज्योतिर्लिंग का आदि और अंत का पता लगाने को कहा। दोनों में से जो भी इसका जवाब दे देगा वह श्रेष्ठ होगा। इसके बाद भगवान विष्णु ज्योतिर्लिंग के अंत की ओर बढ़ चले, लेकिन छोर का पता लगाने में नाकाम रहे और अपनी हार स्वीकार कर ली। उधर, ब्रह्मा जी ऊपर की ओर बढ़े। इस दौरान उन्होंने एक झूठी कहानी रची। वे अपने साथ केतकी के फूल को भी ले गए थे। उससे उन्होंने साक्ष्य देने के लिए कहा था। वापस आकर ब्रह्मा जी भगवान शिव से कहा कि उन्होंने ज्योतिर्लिंग के अंत का पता लगा लिया है और केतकी के फूल ने भी उनके झूठ को सच करार दे दिया। फिर क्या था, ब्रह्मा के इस झूठ से शिव क्रोधित हो गए। उन्होंने ब्रह्माजी का एक सिर काट दिया। श्राप भी दिया कि उनकी कभी कोई पूजा नहीं होगी। तब से ब्रह्माजी का वो कटा सिर केतकी के फूल में बदल गया। महादेव ने केतकी के फूल को भी श्राप दिया। कहा- उनके शिवलिंग पर कभी केतकी के फूल को अर्पित नहीं किया जाएगा।

तुलसी

शिवपुराण के अनुसार असुर जलंधर की एक कहानी है। उसे वरदान था कि जब तक उसकी पत्नी वृंदा पतिव्रता रहेगी, तब तक उसे कोई हरा नहीं सकता। लिहाजा देवताओं के बहुत आग्रह पर भगवान विष्णु ने उसका पतिव्रत धर्म नष्ट करने की सोची। वे जलंधर का वेष धारण कर वृंदा के पास पहुंच गए। इसीसे वृंदा का पतिधर्म टूट गया और भगवान शिव ने असुर जलंधर का वध कर उसे भस्म कर दिया। वृंदा जो तुलसी में परिवर्तित हो चुकी थीं, को इस घटना ने बेहद निराश कर दिया। उन्होंने स्वयं भगवान शिव को अपने अलौकिक और दैवीय गुणों वाले पत्तों से वंचित कर दिया। शिव की पूजा में अपनी पत्तियों के उपयोग पर रोक लगा दी।

नारियल का पानी

महादेव को भले ही नारियल अर्पित किया जाता है, लेकिन कभी भी नारियल के पानी से अभिषेक नहीं करना चाहिए। आमतौर पर देवताओं को चढ़ाए जाने वाले प्रसाद को ग्रहण किया जाता है, लेकिन शिवलिंग का अभिषेक जिन पदार्थों से होता है उन्हें ग्रहण नहीं किया जाता। इसलिए शिव पर नारियल का जल नहीं चढ़ाना चाहिए।

हल्दी

गुणों की खान हल्दी का भले ही स्वास्थ्यवर्धक हो। सुंदरता बढ़ाने के लिए किया जाता हो, लेकिन शिवलिंग पर कभी हल्दी नहीं चढ़ाई जाती, क्योंकि वह स्वयं शिव का रूप है, इसलिए हल्दी को निषेध किया गया है।

सिंदूर या कुमकुम

विवाहित महिलाओं का गहना है सिंदूर या कुमकुम। स्त्रियां अपने पति के लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना के लिए सिंदूर लगाती हैं। इसके उलट महादेव त्रिदेवों में विनाशक हैं। विंध्वसक की भूमिका निभाते हैं, लिहाजा सिंदूर से उनकी सेवा करना अशुभ माना जाता है।

शिवलिंग पूजन की आवश्यक बातें

- शिवलिंग पर जब भी दूध से अभिषेक करें तो यह जरूर ध्यान रखें कि वह पैक न हो, क्योंकि आजकल पैकेट्स में दूध खूब बिक रहा है। दूध ठंडा और साफ होना चाहिए।

- शिवलिंग के पास गौरी और भगवान गणेश की प्रतिमा अवश्य रखें। अकेले शिवलिंग न रखें।

- शिवालयों में आपने देखा होगा कि शिवलिंग पर जलधारा हमेशा बरकरार रहती है। ऐसे में अगर आप घर पर शिवलिंग की स्थापना करते हैं, तो जलधारा को भी बरकरार रखें। अन्यथा जलधारा न होने पर वह नकारात्मक ऊर्जा आकर्षित करेगी।

- शिवलिंग को घर लाते समय यह जरूर ध्यान रहे कि उस पर नाग लिपटा हो। शिवलिंग सोना, चांदी या तांबे का हो तो अति उत्तम। 

Posted By: Tanu Gupta

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