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दिव्यांगता को मात देने वाला ब्रांच मैनेजर आखिर क्यों अवसाद से हारा

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में ब्रांच मैनेजर रहे राकेश और पत्नी हैं दिव्यांग। डिप्रेशन में आने पर पिता मिले थे एजीएम से, थाना हाईवे में रिपोर्ट दर्ज।

By Prateek GuptaEdited By: Published: Sun, 03 Feb 2019 06:06 PM (IST)Updated: Sun, 03 Feb 2019 06:06 PM (IST)
दिव्यांगता को मात देने वाला ब्रांच मैनेजर आखिर क्यों अवसाद से हारा
दिव्यांगता को मात देने वाला ब्रांच मैनेजर आखिर क्यों अवसाद से हारा

आगरा, जेएनएन। दिव्यांग होने के बावजूद होशियार इतने कि पांच-छह बार बैंक और पोस्ट ऑफिस की नौकरी रिजाइन कर दी। अंत में पसंद आई तो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की नौकरी जो उनके लिए अंतिम साबित हुई। छाता में पहली बार प्रमोशन पाकर ब्रांच मैनेजर बनने की खुशी गम में तब्दील हो जाएगी परिजनों को गुमान न था। एक अफसर ने उन्हें इतना टार्चर किया कि पहले डिप्रेशन में आए और फिर मौत को गले लगा लिया। पिता ने बैंक के एजीएम के खिलाफ थाना हाईवे में रिपोर्ट दर्ज कराई है।

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मूलरूप से राजस्थान के अजमेर निवासी राकेश कुमार खदरिया ने करीब आठ साल पूर्व स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी की शुरूआत जयपुर से की थी। इगलास (अलीगढ़) फिर मथुरा के छाता स्थानांतरण हो गया, जहां प्रमोशन पाकर ब्रांच मैनेजर बने।

नौकरी के दौरान राकेश की शादी आगरा निवासी सीमा से हो गई। सीमा भी दिव्यांग हैं और छोटी कोसी स्थित मिर्जापुर में प्राइमरी स्कूल में अध्यापिका हैं। उनकी एक बेटी है आराध्या। दंपति के मथुरा में नौकरी में होने पर राकेश ने राधा वैली के डी ब्लाक में फ्लैट किराये पर ले लिया। इसी कॉलोनी के ब्लाक सी में राकेश के पिता गोपाल चंद पत्नी सीता देवी के साथ रहते हैं। एसओ हाइवे अनूप सरोज ने बताया पिता गोपालचंद ने थाना हाइवे में बैंक के एजीएम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है, पुलिस मामले की जांच कर रही है।

डिप्रेशन में चले गए थे राकेश

पिता गोपाल चंद ने बताया कि एक-डेढ़ साल से एजीएम जीएस जयंत उनके पुत्र को टार्चर कर रहे थे। अवकाश देने में आना-कानी करते थे। टारगेट पूरा न होने पर नौकरी से रिजाइन करने को कहते। कहते थे राकेश तुमने ब्रांच और मेरा एक प्रमोशन बर्बाद कर दिया। एजीएम की जली- कटी सुन राकेश डिप्रेशन में चला गया था। अवकाश लेकर घर बैठ गया। यह जानकारी पिता को हुई तो वह एक बेटे के साथ आगरा स्थित एजीएम से मिले पर उल्टे उन्होंने हार्ट पेशेंट पिता को ही लताड़ दिया।

सुविधाओं का अभाव

पिता गोपालचंद ने बताया कि छाता ग्रामीण क्षेत्र की बैंक है, यहां इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टॉफ की कमी है। बावजूद इसके एजीएम ऋण वितरण, डिपोजिट, अपग्रेड, खाते खोलने सहित अन्य बातों को लेकर राकेश को टार्चर करते थे।

चारों भाई बैंक में

राजस्थान के अजमेर निवासी गोपाल चंद के चार पुत्रों में सबसे छोटे थे राकेश कुमार खदरिया। उनके तीन बड़े भाई अनिल, सुनील और मुकेश भी राजस्थान में बैंक में जॉब करते हैं। 


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