आगरा, जागरण संवाददाता। पोस्टमार्टम गृह पर पहुंची अरुण की मां कमला ने आरोप लगाया कि जगदीशपुरा थाने के मालखाने में चोरी पुलिसकमियों की मिलीभगत से हुई थी। बेटा पुलिसकर्मियों के नाम खोल देता, इसलिए उसे जान से मार दिया। ऐसा भी कानून में कहीं होता है कि चोरी करने वाले की जान ले ली जाए। मुझे रुपये नहीं अपना बेटा वापस चाहिए। वहीं पत्नी सोनम का कहना था कि पति ने चोरी की थी तो उसे जेल भेज देते, मार क्यों डाला। करवाचौथ से पहले पुलिस ने मेरा सुहाग उजाड़ दिया। दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। मां कमला और पत्नी सोनम पोस्टमार्टम गृह पर फूट फूटकर रो रही थीं। दोनों की हालत वहां मौजूद लोगों से देखी नहीं जा रही थी।

स्वजन ने मां कमला को सुबह दस बजे तक नहीं बताया था कि पुलिस हिरासत में अरुण की मौत हो गई है। लोगों की भीड़ देखकर उन्हें अनहोनी की आशंका हो गई थी। कई बार पूछने पर स्वजन ने अरुण की मौत के बारे में बताया ताे वह बहू सोनम और परिवार की महिलाओं के साथ पोस्टमार्टम गृह पहुंच गईं। मां का कहना था कि जवान बेटा था, उसे कोई बीमारी नहीं थी। पुलिस वालों ने उसे पीटकर मार डाला। क्योंकि यदि वह अपनी जुबान खोलता तो कई पुलिसकर्मी भी इसमें फंस जाते।

वहीं, अरुण की पत्नी सोनम का कहना था कि उनके पति की हत्या की गई है। पत्नी का आरोप है कि पुलिस वाले दबाव बना रहे थे कि कहीं से भी रुपये लेकर आओ। इसके लिए मकान बेचा या जेवर, जब तक पूरी रकम नहीं मिलती, कोई नहीं छूटेगा। सभी को जेल में सड़ा दिया जाएगा।

वहीं, दूसरी तरह अरुण के भाई सोनू, बंटी व रिंकू भी आपस में एकमत नहीं दिखे। तीनों भाई सीओ लोहामंडी कार्यालय पर सुबह से मौजूद थे। एक भाई ने बयान दिया कि पुलिसकर्मियों ने कोई मारपीट नहीं की। जिस पर वहां मौजूद समाज के एक नेता ने भाइयों को आड़े हाथों लिया। उसका कहना था कि इससे बुरा क्या हो सकता है। पुलिस ने एक भाई को पीट-पीटकर मार दिया। पुलिस ने सभी स्वजन को पहले ही क्यों नहीं छोड़ दिया। स्वजन को थाने में क्यों बैठा रखा।

मां की हालत बिगड़ी, एसएन में भर्ती कराया

पोस्टमार्टम गृह पर मौजूद मां कमला की हालत रोते-रोते बिगड़ गई। वह बेहाेश होकर गिर गई। जिससे वहां मौजूद परिवार की महिलाओं में रोना-पीटना मच गया। स्वजन ने कमला को एसएन में भर्ती कराया। वहां उनका इलाज चल रहा है।

अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़

अरुण का अंतिम संस्कार शाहगंज स्थित मल्ल का चबूतरा शमशान घाट पर किया गया। इसमें समाज के अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग भी शामिल हुए। शव यात्रा के दौरान लोगों द्वारा बवाल की आशंका के मद्देनजर रास्ते में बड़ी संख्या में फोर्स तैनात किया गया था।

अरुण के स्वजन को साथ लेकर चली पुलिस

पुलिस हिरासत में अरुण की मौत के बाद सुबह पांच बजे से ही अधिकारी सक्रिय हो गए थे। उन्हें आशंका थी कि सुबह अरुण की मौत की खबर मिलते ही लोग सड़कों पर आ सकते हैं। जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। पुलिस ने सबसे पहले अरुण के स्वजन को अपने विश्वास में लिया। समाज के प्रमुख व्यक्तियों को भी सीओ लोहामंडी कार्यालय पर ही बुला लिया गया। स्वजन और समाज के प्रमुख लोगों से अधिकारियों ने बात की। उनसे तहरीर लेकर मुकदमा दर्ज किया। जिससे स्वजन का आक्रोश कुछ कम हुआ। इसके बाद समाज के लोगों ने भी स्वजन से बातचीत की।

स्वजन की अवैध हिरासत पर अदालत ने थानाध्यक्ष को किया था तलब

अरुण के भाई बंटी रेलवे में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। बंटी ने मां कमला, भाई रिंकू व सोनू, जया पत्नी सोनू की अवैध हिरासत को लेकर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय की अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। जिस पर अदालत ने 18 अक्टूबर को थाने से आख्या मांगी थी। बंटी की ओर से प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने वाले अधिवक्ता अनिल प्रकाश रावत के अनुसार 19 तारीख को थाने से आख्या न भेजे जाने पर अदालत ने थानाध्यक्ष जगदीशपुरा को 20 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। अधिवक्ता के अनुसार पुलिस ने अरुण के बड़े भाई संजय जिनकी मृत्यु हो चुकी है उनकी पत्नी सुनीता व पुत्र आकाश को भी मंगलवार की रात को अवैध हिरासत में लिया था।जिसका प्रार्थना पत्र बुधवार को अदालत में प्रस्तुत किया गया।

जब वह दोषी था तो पुलिस सजा दे रही थी। अब वह दुनिया में नहीं रहा तो उसकी मौत के दोषी पुलिसकर्मियों को सजा मिलनी चाहिए।

सोनू,  अरुण का भाई

मेरे पति और भाइयों को पु़लिस ने बुरी तरह से पीटा। उनका कसूर नहीं था, पुलिस कर्मियों को सजा मिले।

पूजा, अरुण की बहन

चार दिन से पकड़ रखा था। मेरे साथ मारपीट की गई, चार दिन से बच्चों का चेहरा नहीं देखा था।

सोनम, अरुण की पत्नी

Edited By: Prateek Gupta