आगरा, जागरण संवाददाता। आयकर विभाग की नई वेबसाइट शुरु हुए 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन किसी तरह की औपचारिकताएं पूरी नहीं हो पा रहीं। टैक्स प्रोफेशनल न तो नोटिस आदि का जवाब दे पा रहे हैं, न ही रिटर्न आदि दाखिल करने की प्रक्रिया बढ़ रही है। तकनीकि दिक्कतें समस्या और बढ़ा रही हैं। इन समस्याओं को आयकर की प्रैक्टिस करने वाले सीए व टैक्स अधिवक्ताओं ने वेबीनार में दैनिक जागरण के साथ साझा किया।

सीए अनुराग सिन्हा ने बताया कि एक से छह जून तक पुरानी वेबसाइट बंद रख सात जून को नई वेबसाइट लांच की गई, जो 10 दिन बाद भी काम नहीं कर रही। आयकर विभाग ईमेल से नोटिस भेज रहा है, जवाब देने को करदाता के पास पोर्टल सुविधा उपलब्ध नहीं। सीए प्रार्थना जालान का कहना था कि प्रोफाइल अपडेशन के बाद ही कुछ फीचर मिलेंगे, लेकिन कमियां होने पर प्रोफाइल अपडेट नहीं हो रही। डाटा मिसमैच हो रहा है, जिससे भविष्य में समस्या होगी। पासवर्ड गलत होने पर प्रोफाइल लाक तक हो सकती है। एड. नवीन गर्ग का कहना है कि हमारी मांग है कि स्थिति सुधरने तक विभाग ई-मेल से नोटिस भेजना बंद करे। चैंबर और बार तिथि बढ़ाने का प्रस्ताव भेजें। सीए संदीप अग्रवाल का कहना था कि समस्या व देरी के लिए व्यापारी पर पैनल्टी लगना ठीक नहीं। टीडीएस रिटर्न का भी समाधान नहीं हो रहा। पूर्व अध्यक्ष नेशनल चैंबर एड. अनिल वर्मा ने बताया कि चैंबर ने ज्ञापन भेजकर पोर्टल प्रारंभ न होने तक अंतिम तिथि बढ़ाने और देरी पर रोजाना लगने वाली 200 रुपये की पैनल्टी न लगाने की मांग है। इस लापरवाही के लिए जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की भी मांग है। सीए एससी जैन का कहना था कि टैक्स प्रोफेशनल्स की कोई नहीं सुनाता, उनको लेकर गलत धारणा है। व्यापारिक संगठनों के स्तर से समस्या उठाकर दबाव डालें, तो तिथि बढ़ सकती है। एड. रवि अग्रवाल का कहना था कि नोटिस की अपील का कोई जवाब नहीं मिल रहा। रिफंड एप्लीकेशन रद हो रही है। विवाद से विश्वास का फार्म फाइव भी जारी नहीं हुआ। एड. मनुज शर्मा का कहना है कि प्रोफाइल अपडेशन में मिस पैन विद प्रोफाइल आ रहा है। अपडेट फेल हो रहा है। विवाद से विश्वास का पुराना डाटा नहीं आ रहा। एड. रूचि अग्रवाल का कहना था कि एसएफटी अपलोड करने में समस्या है। 30 जून अंतिम तिथि है, फिर पैनल्टी लगेगी। लांगटर्म और शार्टटर्म गेन के विकल्प भी नहीं मिल रहे हैं। एड. शशांक अग्रवाल ने बताया कि करदाताओं के मेल पर नोटिस तो आ रहे हैं, लेकिन जवाब कहा दें, पता नहीं। ई-प्रोसिडिंग की भी जानकारी नहीं। अंतिम तिथि बढ़ाना ही एकमात्र उपाय है। इस दौरान महेश अग्रवाल, सुशील माहेश्वरी आदि ने भी अपने विचार रखे। 

Edited By: Tanu Gupta