आगरा, जागरण संवाददाता। टोक्यो ओलिंपिक में जिमनास्टिक में भारत का प्रतिनिधित्व पं. बंगाल की प्रणति नायक ने किया। ताजनगरी के जिमनास्टों ने भी नेशनल से लेकर इंटरनेशनल लेवल तक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। जतिन कुमार कन्नौजिया, शारिफ और प्रणव मिश्रा को चीन में पिछले वर्ष वर्ल्ड स्कूल गेम्स खेलने जाना था, मगर उससे पूर्व काेरोना वायरस के संक्रमण ने उनके सपने को तोड़ दिया। डेढ़ वर्ष से खेल प्रतियोगिताएं नहीं होने से खिलाड़ियों को खेलने का मौका नहीं मिल पा रहा है। हास्टल बंद होने से खिलाड़ी कमरा किराये पर लेकर रह रहे हैं। कई खिलाड़ियों के सामने उम्र बढ़ने से अब अपने एज ग्रुप में नहीं खेल पाने का संकट है।

एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में जिमनास्टिक का हास्टल है। यहां जिमनास्टिक के अत्याधुनिक उपकरण लगे हैं और तीन स्थायी कोच तैनात हैं। यहां प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले खिलाड़ी कोरोना काल से पूर्व नेशनल लेवल पर निरंतर अच्छा प्रदर्शन कर शहर का मान बढ़ाते रहे हैं। मार्च, 2020 में कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते लाक डाउन होने पर हास्टल खाली करा लिया गया था। सभी खिलाड़ियों को घर भेज दिया गया था। करीब छह माह बाद स्टेडियम तो खुल गया था, लेकिन हास्टल पर ताला लगा रहा। इस वर्ष भी 19 अप्रैल से चार जुलाई तक ढाई माह स्टेडियम बंद रहा। हास्टल अभी भी बंद है और 10 वर्ष से कम के खिलाड़ियों के स्टेडियम में प्रवेश पर रोक है। कोरोना काल ने जिमनास्टों को काफी प्रभावित किया है। स्टेडियम में अभ्यास तो वो कर रहे हैं, लेकिन प्रतियोगिताएं न होने से उन्हें श्रेष्ठ प्रदर्शन करने को अच्छा माहौल और प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है।

2016 में लगा था नेशनल टीम का कैंप

एकलव्य स्टेडियम में जिमनास्टिक के अंतरराष्ट्रीय स्तर के उपकरण होने की वजह से वर्ष 2016 के रियो ओलिंपिक से पूर्व भारतीय जिमनास्टिक टीम का कैंप लगा था। दीपा कर्माकर समेत अन्य खिलाड़ियों ने इस कैंप में भाग लिया था।

यह रहे हैं स्टार खिलाड़ी

-मो. बाबी

-अग्निवेश पांडे: जूनियर एशियन गेम्स

-गौरव कुमार: एशियन गेम्स

पदकों से भरी है झोली

एकलव्य स्टेडियम के जिमनास्ट कोरोना काल से पूर्व सब-जूनियर और जूनियर वर्ग में स्कूल गेम्स और नेशनल चैंपियनशिप में पदकों की झड़ी लगाते रहे हैं। सब-जूनियर वर्ग में वर्ष 2019 में शिवांश गुप्ता देश में नंबर एक पर और जतिन कुशवाह नंबर दो पर रहे। आयुषी शर्मा, जतिन कुमार कन्नौजिया, प्रणव मिश्रा और सुमित यादव स्कूल गेम्स व नेशनल चैंपियनशिप में कई पदक जीत चुके हैं।

खिलाड़ियों का दर्द

कोरोना काल में खेल सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। कई माह तक अभ्यास नहीं कर सके और प्रतियोगिताएं न होने से खेलने का मौका नहीं मिल पा रहा है।

-शिवांश गुप्ता, खिलाड़ी

कोरोना काल में डेढ़ वर्ष खराब हो चुके हैं। खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धा का माहौल नहीं मिल पा रहा है। उम्र बढ़ने से खिलाड़ी अपने एज ग्रुप में भाग नहीं ले सकेंगे।

-जतिन कुशवाह, खिलाड़ी

कोरोना काल में समय तो खराब हुआ, लेकिन अच्छी बात है कि स्टेडियम खुला हुआ है। वीडियो देखकर खिलाड़ी अभ्यास कर सकते हैं। अपनी कमियां दूर कर सकते हैं।

-आयुषी शर्मा, खिलाड़ी

डेढ़ वर्ष से कोई खेल प्रतियोगिता नहीं होने से खिलाड़ियों पर काफी प्रभाव पड़ेगा। खिलाड़ी ओवरएज होने से अपने एज ग्रुप में नहीं खेल सकेंगे। उनके लिए चुनौती बढ़ेगी।

-जतिन कुमार कन्नौजिया, खिलाड़ी

कोरोना काल में काफी दिक्कत हुई। स्टेडियम दो बार बंद रहा। इससे खिलाड़ी अभ्यास तक नहीं कर सके। हास्टल बंद होने की वजह से खिलाड़ी किराये पर कमरा लेकर रह रहे हैं।

-प्रणव मिश्रा, खिलाड़ी

डेढ़ वर्ष से प्रतियोगिताअों का आयोजन नहीं हो पाने से खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धा का माहौल नहीं मिला है। अगर प्रतियोगिताएं होतीं तो वो अपने कौशल को और निखार पाते।

-सुमित यादव, खिलाड़ी

Edited By: Prateek Gupta