चलो चलें चंबल की ओर: बीहड़ के बीच बसती है रोमांचक दुनिया, नवंबर से घड़ियाल समेत प्रवासी पक्षियों से होगा गुलजार
नवंबर से फरवरी तक चंबल सफारी का सबसे अच्छा समय है, जहां गुलाबी सर्दी में घड़ियालों और प्रवासी पक्षियों को करीब से देखा जा सकता है।
-1790946633974_m.webp)
चंबल में धूप सेकते घड़ियाल।
HighLights
नवंबर से फरवरी चंबल सफारी के लिए सर्वोत्तम समय।
घड़ियाल, मगरमच्छ, डॉल्फिन और प्रवासी पक्षियों का घर।
लायन सफारी, बटेश्वर जैसे अन्य आकर्षण भी मौजूद हैं।
निर्लोष कुमार, आगरा। चंबल की ओर चलने का सबसे अच्छा समय आने वाला है। दरअसल, नवंबर से चंबल सफारी का मौसम शुरू जाएगा, जोकि फरवरी तक चलेगा। गुलाबी सर्दी और सर्द मौसम में बीहड़ों के बीच बहती चंबल नदी, नाव की सवारी और प्राकृतिक परिवेश में घड़ियालों को करीब से देखने का अनुभव आपकी यात्रा को यादगार बना सकता है।
इसके साथ लायन सफारी और बटेश्वर आपकी यात्रा में रोमांच, प्रकृति, आस्था और विरासत के कई रंग भर सकते हैं। चंबल की पहचान उसके अनोखे वन्य जीवन से है। नदी में घड़ियाल और मगरमच्छ दिखाई दे सकते हैं।
दूर किनारे पर धूप सेंकता कोई जीव नजर आए तो नाव पर बैठे लोगों की उत्सुकता बढ़ जाती है। प्रवासी पक्षी तो यहां हर वर्ष दस्तक देते हैं, जिनके बीच समय गुजारने एक अलग ही अहसास कराता है।

डाकुओं और बागियों के किस्सों से पहचाने जाने वाले चंबल के बीहड़ अब अपनी नई पहचान बना रहे हैं। शहर का कोलाहल पीछे छोड़कर कच्चे रास्तों, खेतों और ऊंचे-ऊंचे टीलों के बीच आगे बढ़ते हुए जब चंबल नदी सामने आती है तो वातावरण पूरी तरह बदल जाता है। यहां गहरी और दूर तक फैली नदी, खुला आसमान और बीहड़ की प्राकृतिक संरचना मन को ठहरने के लिए मजबूर कर देती है।
चंबल नदी ने अपनी तलहटी में लुप्तप्राय घड़ियालों, मगरमच्छों, कछुओं और डाल्फिन को नया जीवन दिया है, जोकि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र का सबसे ज्यादा आकर्षण है। बीहड़ को अब प्रकृति, जैव विविधता और पर्यटन के नजरिए से भी देखा जा रहा है। जो धरती कभी डर की कहानियों का हिस्सा बनती थी, वही आज प्रकृति प्रेमियों और यात्रियों को अपनी ओर खींच रही है। चंबल सफारी का सबसे बड़ा आकर्षण नदी में नाव की सवारी है।
-1790946692532.webp)
नाव आगे बढ़ती है और किनारे पर धूप सेंकता घड़ियाल दिखाई देता है तो रोमांच बढ़ जाता है। प्राकृतिक परिवेश में घड़ियाल को देखना चिड़ियाघर में उसे देखने से बिल्कुल अलग अनुभव देता है। चंबल ने लुप्तप्राय घड़ियालों के साथ मगरमच्छ, गंगा डाल्फिन और मीठे पानी के कछुओं के लिए भी सुरक्षित संसार तैयार किया है।
चंबल केवल जलीय जीवों का संसार नहीं
चंबल केवल जलीय जीवों का संसार नहीं है। यहां पक्षियों की 290 प्रजातियों की पहचान हो चुकी है। नवंबर से प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी बढ़ने लगती है। फ्लेमिंगो नवंबर से मई तक दिखाई देते हैं। रूडी शेल्डक भी यहां पहुंचते हैं, जबकि इंडियन स्कीमर्स की बड़ी कालोनी यहां प्रजनन करती है। बीहड़ में तेंदुए समेत अन्य वन्यजीव भी देखे जा सकते हैं।
ऐसे पहुंचें राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य जाने के लिए आपको आगरा-बाह मार्ग से जैतपुर पहुंचना होगा। आगरा से यह करीब 95 किमी दूर है। जैतपुर से नन्दगांव तिराहा जाना होगा। नन्दगांव तिराहे से आप चंबल पहुंच जाएंगे। यहां नदी में सैर के लिए बोट मिल जाएंगी। बोटिंग का शुल्क प्रति व्यक्ति 100 रुपये है।
-1790946723994.webp)
इसके अलावा प्रवेश शुल्क 50 रुपये और बस का किराया 200 रुपये है। जैतपुर पहुंचने के लिए आपको आगरा आना होगा। आगरा आने के लिए बस, ट्रेन व प्लेन की सुविधा कई शहरों से है। आप निजी वाहन से भी आ सकते हैं।
रुकने की व्यवस्था
प्राकृतिक नजारों के मध्य बने रिसार्ट ठहरने के लिए बेहतर विकल्प हैं। यहां आगरा से भी सुबह पहुंचना आसान है, जहां ठरहने के अनेक साधन हैं। धर्मशालाओं से लेकर सुविधा संपन्न अच्छे होटल तक, जोकि चंबल सफारी लाज और चंबल वाइल्ड लाइफ रिसार्ट टूर पैकेज भी देते हैं।
लायन सफारी, बटेश्वर जैसे आकर्षण भी
बाह से इटावा नजदीक है। इसलिए यह लायन सफारी के साथ इको टूरिज्म का केंद्र बन रहा है। लायन सफारी में एशियाई शेर हैं। यमुना किनारे स्थित प्राचीन शिव मंदिरों के लिए प्रसिद्ध बटेश्वर बाह से करीब 10 किमी की दूरी पर स्थित है। बाह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पैतृक स्थली भी है। यहां राज्य सरकार ने अटल की स्मृतियों को संजोने के लिए अटल संकुल बनाया है।
- 1979 में उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के 5400 वर्ग किमी क्षेत्र में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य की स्थापना की गई थी।635 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है उत्तर प्रदेश में अभयारण्य
- यहां 2900 से अधिक घड़ियाल हैं
- 900 से अधिक मगरमच्छ हैं
- 150 से अधिक डाल्फिन हैं
- चंबल में 3500 से अधिक मीठे पानी के कछुए मिले हैं।
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के उत्तर प्रदेश में स्थित भाग में किए जा रहे संरक्षण के प्रयास सफल हो रहे हैं। यहां घड़ियाल और डाल्फिन की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस वर्ष प्रदेश में 15 नवम्बर के बजाय एक नवम्बर से ही टाइगर रिजर्व और राष्ट्रीय उद्यान खोल दिए जाएंगे, जो जून तक खुले रहेंगे। चंबल घूमने को नवंबर से फरवरी तक का समय सबसे अच्छा है। इस समय यहां प्रवासी पक्षी आते हैं। -अनिल पटेल, वन संरक्षक आगरा।
यह भी पढ़ें- न्यू हाथरस शहर का होगा बड़ा विस्तार, यमुना प्राधिकरण 11 हजार हेक्टेयर में करेगा विकसित
