आगरा, जेएनएन। लाडली के दर्शनों की लालसा में जुटे आपार जन समूह को दर्शन देने के लिए स्वयं कीरत रानी अपनी गोद में लाडिली को लेकर बाहर आ जाती हैं। इसी परंपरा के निर्वहन में गोस्वामी समाज द्वारा इस परंपरा को निभाया जाता है। राधारानी अपने भक्तों को नजदीक से दर्शन देने के लिए शाम करीब साढ़े पांच बजे गर्भगृह से बाहर मंदिर परिसर में बनी संगमरमर की सफेद छतरी में डोले में विराजमान होकर आती हैं। इस दौरान लाडिली के दर्शनों को श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

शुक्रवार की शाम को बरसाना में बृषभानु नंदनी अपने भक्तों को नजदीक से दर्शन देने के लिए लाडि़ली जी मंदिर परिसर में बनी सफेद छतरी में डोले में विराजमान होकर आईं। संगमरमर की सफेद छतरी में विराजमान होकर लाडिली अपने भक्तों पर कृपा का सागर बरसाती हैं। लाडिली की कृपा को पाने के लिए श्रद्धालु लालायित नजर आ रहे थे। शाम करीब साढ़े पांच बजे बृषभानु नंदनी के डोला को गोस्वामी समाज के युवक कंधों पर उठाकर नीचे बनी सफेद छतरी में लाते हैं। नजदीक से राधा रानी के दर्शन करके श्रद्धालु अपने आप उनकी कृपा मान रहे थे। मान्यता है कि पहले अन्य वर्ग के लोग मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाते थे। इसीलिए ग्वालियर स्टेट के एक राजा द्वारा इसका निर्माण कराया गया था। साल में तीन बार बृषभानु नंदनी राधाष्टमी, हरियाली तीज व धुल्लैड़ी के दिन अपने भक्तों को नजदीक से दर्शन देने के लिए सफेद छतरी में आती है। शाम करीब सात बजे गोस्वामी समाज की कुवारी कन्या द्वारा संध्या आरती की जगह आरता किया गया। जिसके बाद राधा रानी को डोला में विराजमान करके वापस गर्भगृह में विराजमान किया गया।

अष्टदल कमल से प्रकटीं कीरत सुता राधारानी

वक्त ने जैसे ही तड़के चार बजने का इशारा किया, हवाओं में वेदमंत्र गूंजने लगे। परिसर में रखा अष्टदल कमल खिल उठा, घंटा-घडिय़ाल की धुनें वातावरण को आनंदित करने लगीं, एक बार राधे नाम का जयकारा शुरू हुआ, तो रुकने का नाम नहीं लिया, श्रद्धा के समंदर में बेतहाशा उठती भक्ति की हिलोरों ने ब्रजभूमि को अपने आगोश में ले लिया। तीन लोकों के स्वामी श्रीकृष्ण की आराध्य, ब्रजभूमि की महारानी के जन्मोत्सव का हर लम्हा इतिहास के पन्नों पर स्वर्ण अक्षरों में अंकित होता चला गया। बरसाना में राधा जन्मोत्सव के पलों का साक्षी होने के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े। गुरुवार रात से शुक्रवार दोपहर तक राधे के जयकारों से बरसाना गूंजता रहा। तड़के अभिषेक के साथ ही उमड़ी भीड़ शाम तक बनी रही। जन्म के बाद महारानी का दूध से अभिषेक किया गया। इससे पूर्व रात दो बजे लाड़ली मंदिर पर बधाई गायन के बाद चार बजे मंदिर वेद मंत्रों से गूंज उठा। रात दो बजे से मंगल बधाइयों का गायन किया गया। इसमें दाई, मान, सवासनी, नाइन, नामकरण लीलाओं के पदों का प्रस्तुतिकरण किया गया।

सुबह चार बजे से मंदिर के गर्भ ग्रह में घंटे- घडिय़ाल बजने लगे। भक्त राधारानी के जयकारे लगा रहे थे। जन्म के साथ ब्रजाचार्य नारायन भट्ट द्वारा प्राकट््य विग्रह को चांदी की चौकी में विराजमान किया गया, जो कि कमल पुष्पों के सौंदर्य से संवर अपनी किस्मत पर इठला रही थी। मंदिर के सेवायत परिवारों के आचार्य वेद मंत्रों का उच्चारण करने लगे। मूल नक्षत्र में जन्मी राधारानी का शुक्रवार को सुबह चार बजे से लगातार एक घंटा अभिषेक चला। अभिषेक के पलों को आंखों में कैद करते भक्तों ने पलकों को झपकने नहीं दिया। दूध,दही,शहद, गाय का घी, इत्र, बूरा, 27 पेड़ों की पत्तियां, 27 जगह की रज, 27 कुओं का जल, सप्त अनाज, सात मेवा, सात फल से बारी-बारी से बृषभानु नंदनी के विग्रह का अभिषेक किया। आचार्यों ने वेद मंत्रों के साथ नवग्रह देवताओं का आह्वान किया। राधारानी को कालिंदी का के जल से भी स्नान कराया गया।

श्रृद्धालु पुष्पों की बारिश करते रहे। अभिषेक के उपरांत महारानी को पीले रंग की फरुआ नुमा पोशाक धारण कराई गई। राधा जन्म को देखकर श्रृद्धालु बरसाने वाली की जय, बृषभानु नंदनी की जय जयकार करने लगे। सेवायतों ने युगल स्वरूप की आरती उतारी। करीब 8 बजे राधारानी ने गुलाबी पोशाक धारण कर शीश महल से भक्तों को दर्शन दिए। कृष्ण की आल्हादिनी शक्ति के धराधाम पर अवतरित होने की खुशी में नंदगांव से लोग दूसरे दिन भी बधाई लेकर पहुंचे। बृषभानु जी को लाली के जन्म की बधाई देने के बाद यह लोग बृषभानोत्सव में जमकर थिरके। श्रद्धालु अपनी आराध्य का गुणगान अपने-अपने अंदाज में कर रहे थे। जिधर भी नजर घुमाकर देखा जाता था, उधर से राधा नाम का गुणगान होता सुनाई देता। नंदगांव और बरसाना वासियों ने बधाई पद प्रस्तुत किए। भक्तों ने गहवरवन की परिक्रमा, फूलगली, रंगीली गली, टांटिया मुहल्ला, मेन बाजार, थाना मार्ग, सांकरी खोर, चिकसौली होकर लगाई। भक्तों ने परिक्रमा के दौरान सीताराम मंदिर, गोपालजी मंदिर, राधारस मंदिर, जयपुर मंदिर, मानगढ़, मोरकुटी, दानगढ़, लाड़लीजी मंदिर, महीभानजी मंदिर, अष्टसखी मंदिर, बृषभानुजी मंदिर के दर्शन करके पुण्य लाभ कमाया। राधारानी की अष्ट सखियों के मंदिरों में भी राधा जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया।

कीरत के महल में जन्मीं श्रीराधा

कृष्ण प्रिया के जन्मोत्सव की खुशी में पूरा ब्रज मंड आंनदित हो रहा था। ऐसे में भला उनकी मां का निज महल कैसे पीछे रह सकता है। शुक्रवार सुबह नंदगांव बरसाना रोड पर स्थित कृपालु जी महाराज के कीर्ति मंदिर में भी उनकी पुत्रियां डॉ. विशाखा त्रिपाठी, श्यामा त्रिपाठी व कृष्णा त्रिपाठी ने बृषभानु दुलारी के विग्रह का पंचामृत से अभिषेक किया। इस दौरान पूरे मंदिर परिसर को विदेशी फूलों से सजाया गया। राधारानी के जन्मोत्सव पर कीर्ति मंदिर में अछ्वुत झांकी का मंचन भी किया। जिसमें अष्टदल कमल में से राधारानी प्रगट हो रही थी। सभी देवतागण उनकी स्तुति कर रहे थे। इस दिव्य व अलौकिक झांकी ने श्रद्धालुओं को द्वापरयुग की लीला से जीवंत कर दिया। रंगीली महल में कृपालु जी महाराज के अनुयायी द्वारा केक काटकर कीरत सुता का जन्मदिन मनाया गया। रंगीली महल के सचिव नितिन गुप्ता ने बताया कि महाराजश्री का हमेशा एक ही उद्देश्य रहा कि राधा रानी की महिमा को आगे बढ़ाएं। इसलिए तो उन्होंने बरसाना में उनकी मां के नाम से मंदिर बनवाया है।

राधा के जन्मोत्सव पर झूमी लीला भूमि

ब्रज की अधिष्ठात्री देवी राधाजी का जन्मोत्सव शुक्रवार को उल्लास पूर्वक मनाया। राधाबल्लभ मंदिर में दर्शन खुले तो जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा। सेवायतों ने जब दधिकांधा में उपहार लुटाने शुरू किए। तो भक्त एक-एक उपहार पाने को लालायित दिखाई दिया। सेवायतों ने समाज गायन कर राधाजी को बधाई दी। राधादामोदर मंदिर, राधाश्यामसुंदर मंदिर, राधारमण समेत अनेक मंदिरों में राधाजी का महाभिषेक कर आरती उतारी। महिलाओं ने मंदिरों में बधाई गायन किया। रुक्मिणी विहार स्थित नारायण आश्रम में श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने राधाजी का महाभिषेक कर आरती उतारी।

इस्कॉन मंदिर में सुबह 10 बजे राधजी का पंचामृत से महाभिषेक किया। मंदिर के पुजारी मुकुंद दत्त दास ने महाभिषेक शुरू किया। वैदिक मंत्रो'चारण के बीच मंदिर अध्यक्ष पंचगोड़ा दास, सौरभ त्रिविक्रम दास, त्रिकालायज्ञ दास ने राधरानी का महाभिषेक किया। महाभिषेक दर्शन के दौरान इस्कॉन भक्तों के हरिनाम संकीर्तन से मंदिर परिसर गूंज उठा।

वृंदावन चंद्रोदय मंदिर में राधारानी का प्राकट््योत्सव भक्ति भाव से मनाया गया। महोत्सव में राधा वृंदावन चंद्र की धूप आरती, नवीन पोशाक धारण, फूल बंगला, झूलन उत्सव, छप्पन भोग, महाभिषेक एवं भजन संध्या का आयोजन किया गया। महोत्सव में वैदिक मंत्रो'चारण के मध्य पंचामृत दूध, दही, घी, शहद, बूरा एवं विभिन्न प्रकार के फलों के रस, जड़ी बूटियों एवं फूलों से राधा वृंदावनचंद्र का महाभिषेक हुआ। समारोह में चंचलापति दास, भरतार्शभ दास, युधिष्ठिर कृष्ण दास, उपाध्यक्ष शुक्लांबर दास, सत्यव्रत दास, मधुव्रत दास, विष्णु भक्त दास, प्रियव्रत दास, स्वामी अनंत वीर्य दास, अक्रूर दास, अर्जुन नाथ दास, अंगद दास, अंचितया दास मौजूद रहे।

जन्मोत्सव पर चांदी के सिंहासन पर राधारानी विराजमान

प्राचीन मंदिर ठाकुर श्री केशव देव जी महाराज में राधा जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। सुबह से ही शहनाई वादन शुरू हो गया। राधारानी का पंचामृत अभिषेक किया गया। श्रृंगार कर स्वर्ण जडि़त हार तथा राधारानी को कोलकाता के विशेष कारीगरों द्वारा निर्मित नई पोशाक पहनाकर चांदी के ङ्क्षसहासन पर विराजमान किया गया।

मंदिर परिसर को भव्य फूलों से सजाया गया तथा भव्य फूलबंगला बनाया गया। मंदिर में श्री कृष्ण सामूहिक संकीर्तन मंडल के भक्तों ने बधाई गायन किया। महिला भक्तों द्वारा नाच गायन कर बधाई प्रस्तुत की गई। मंदिर परिसर राधे-राधे की धुन से गूंज उठा। इस दौरान उपस्थित भक्तजनों को खेल-खिलौने बिस्कुट माला पोशाक आदि बधाई के रूप में वितरण किए गए।  

Posted By: Tanu Gupta

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