आगरा, आदर्श नंदन गुप्त। स्वाधीनता सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत को उखाड़ फेंकने के लिए आगरा में बम की फैक्ट्री स्थापित की थी। चांदी वाली कोठी परिसर के आलू गोदाम में बनाई गई इस फैक्ट्री में बने बम आगरा और मथुरा के आंदोलनों में खूब इस्तेमाल हुए। यमुना पुल को उड़ाने की योजना पूरी होती, उससे पहले ही दर्जनभर से ज्यादा क्रांतीकारी पकड़ लिए गए लेकिन अंग्रेजी शासन को एक भी बम यहां से बरामद नहीं हुआ।

मोतीलाल नेहरू रोड पर पालीवाल पार्क के पास मैसर्स लाला नारायण दास की चांदी वाली कोठी है। जो कोठी तो नाम की है, लेकिन बहुत बड़ा बाड़ा जैसा है। इस परिसर में एक दिगंबर जैन मंदिर भी है। वर्ष 1942 में परिसर में पीछे की ओर आलू का एक गोदाम था, जहां से आलू फौज के लिए सप्लाई होते थे। इस गोदाम के मालिक प्रभुलाल भार्गव थे और एक अंग्रेज युवक इसका मैनेजर था।

यह आलू का गोदाम कम, क्रांतिकारियों का अड्डा अधिक था। यहां विशाल भारत अखबार के संपादक पं. श्रीराम शर्मा, मोहनलाल गौतम, गुरुदयाल सिंह आदि बमों का निर्माण करते थे। आगरा व मथुरा के अधिकांश आंदोलनों में यहां निर्मित बमों का ही प्रयोग होता था। यहीं पर एक दिन क्रांतिवीरों ने आगरा के एक पुल को उड़ा देने की योजना बनाई। इसके लिए पूरी तैयारी कर ली गई, लेकिन किसी ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी। सात दिसंबर को अंग्रेज पुलिस के करीब 400 जवानों ने भार्गव के अतिरिक्त विशाल भारत के संपादक व अनेक पुस्तकों के लेखक पं.श्रीराम शर्मा, उनके भाई पं. बाला प्रसाद, नमक की मंडी के पं. गोपीनाथ शर्मा, बसंत लाल झा, मनोहर लाल शर्मा, ठाकुर केपी सिंह आदि को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इन्हें आगरा सेंट्रल जेल में रखा गया। बनारस के आचार्य रामानंद शास्त्री और पीतांबर पंत को भी हिरासत में ले लिया। करीब 14 देशभक्तों पर किंग एंपरर बनाम श्रीराम शर्मा एवं अन्य के नाम मुकदमा चलाया गया। पुलिस इनसे इतनी भयभीत थी कि लोअर कोर्ट में मुकदमा खुली अदालत में न चलाकर सेंट्रल जेल, आगरा की स्पेशल कोर्ट में चलाया गया। मुकदमे में शिवचरण को छोड़ दिया। बाकी 13 देशभक्तों पर सेशन कोर्ट में मुकदमा चला।

पुलिस नहीं ढूंढ पायी बम

फैक्ट्री में इतनी चतुराई से बम आदि छिपाए गए थे कि छापेमारी के वक्त  पुलिस को कुछ भी बरामद ही नहीं हुआ। क्रांतिकारियों की गिरफ्तारी के समय बड़ी मात्रा में बारूद, दर्जनों बने-अध बने बम,  500 डायनामाइट की छड़ें, कई रिवाल्वर, 119 पिस्तौल आदि वहां थे। जो बाद में वहां से हटवा दिए गए।

अधिवक्ता को भी किया गिरफ्तार

जो भी अधिवक्ता इन वीरों की पैरवी करने आते, उन्हें भी पुलिस गिरफ्तार कर लेती थी। वरिष्ठ अधिवक्ता बाबू बैजनाथ को पैरवी करने पर किसी और आरोप में गिरफ्तार लिया गया। इनकी जमानत किसी अदालत में स्वीकार नहीं हुई। अंत में इंग्लैंड की ब्रिटिश पार्लियामेंट में एक कोर्ट में मुकदमा चला। वहां भी सफलता नहीं मिली। उन्हें जेल जाना पड़ा।

वकीलों के दल ने हाईकोर्ट के वकील कैलाश नाथ काटजू के निर्देशन में षड्यंत्र केस की पैरवी की। इस केस में 11 अभियुक्तों को अपराधी घोषित कर दिया गया था।

पहले स्‍वा‍धीनता दिवस पर हुई थी भव्‍य सजावट

हमारे दादाजी लाला नारायन दास जैन बताया करते थे कि कोठी के परिसर में पीछे की ओर एक गोदाम था, जहां क्रांतिकारी गतिविधियां संचालित होती थीं, बमों का भी निर्माण होता था। प्रथम स्वाधीनता दिवस पर यहां भव्य सजावट की गई थी। अब यहां एक दिगंबर जैन मंदिर है, जहां प्रतिदिन काफी संख्या में श्रद्धालु आते हैैं।

केसी जैन, वरिष्ठ अधिवक्ता, मंदिर प्रबंधक

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Posted By: Tanu Gupta

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