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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 05, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जिला पंचायत अध्यक्ष का होगा तख्तापलट

By JagranEdited By:
Published: Tue, 05 Sep 2017 12:56 AM (IST)

जागरण संवाददाता, आगरा: लंबी कश्मकश के बाद आखिरकार जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर तख्तापलट की जमीन

जिला पंचायत अध्यक्ष का होगा तख्तापलट
जिला पंचायत अध्यक्ष का होगा तख्तापलट

जागरण संवाददाता, आगरा: लंबी कश्मकश के बाद आखिरकार जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर तख्तापलट की जमीन तैयार हो ही गई। सोमवार को 32 बागी सदस्यों ने अध्यक्ष कुशल यादव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए प्रभारी डीएम को ज्ञापन सौंपा। जिसके बाद प्रशासन ने देर शाम 26 सितंबर को अविश्वास प्रस्ताव की बैठक तय कर दी। हालांकि भाजपा अब तक प्रत्याशी तय नहीं कर सकी है।

बीते साल हुए जिपं अध्यक्ष पद के चुनाव में सपा ने पार्टी नेता राजपाल यादव की पत्नी कुशल यादव को प्रत्याशी बनाया था। तब भाजपा से सांसद चौ. बाबूलाल के पुत्र राकेश चौधरी उम्मीदवार थे। कुशल यादव ने उन्हें पराजित कर दिया था। अब प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से अध्यक्ष पद कब्जाने की कसरत चल रही है। भाजपा में राकेश चौधरी, सपा से निष्कासित हो चुके हरेंद्र सिंह, जिपं सदस्य यशपाल चौधरी आदि दावेदारी कर रहे थे, लेकिन पार्टी निर्णय नहीं ले पाई। ऐसे में मामला अटका हुआ था। सोमवार को राकेश बघेल, यशपाल चौधरी, हरेंद्र सिंह सहित 30 से ज्यादा सदस्यों ने प्रभारी डीएम सीडीओ रविंद्र कुमार से समय लिया और होटल पीएल पैलेस में जुट गए। सुबह 11 बजे से करीब तीन बजे तक सदस्य वहीं डटे रहे। इसके बाद विकास भवन पहुंच सीडीओ को अविश्वास प्रस्ताव के लिए प्रत्यावेदन सौंपा। प्रत्यावेदन में 32 सदस्यों के नाम थे, लेकिन मौके पर 30 उपस्थित थे।

सीडीओ रविंद्र कुमार ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव के लिए 26 सितंबर को जिला पंचायत की बैठक बुलाई गई है।

प्रत्यावेदन में शामिल नहीं थे सांसद पुत्र:अविश्वास प्रस्ताव के लिए प्रत्यावेदन देने वालों में भाजपा से जिपं सदस्य बने लगभग सभी सदस्य शामिल थे। सूत्रों के मुताबिक भाजपा भले ही प्रत्याशी तय नहीं कर पाई है, लेकिन सदस्यों को अपने पाले में लाने वालों को इशारा दे दिया गया है। इसके बाद ही प्रत्यावेदन दिया गया। हालांकि प्रत्यावेदन देने वालों में पूर्व में पार्टी प्रत्याशी रहे राकेश चौधरी शामिल नहीं थे। इससे पार्टी के अंदर एकजुटता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।