आगरा, अजय दुबे। अयोध्या फैसले पर समाज का नया चरित्र यूं ही देखने को नहीं मिला है। आम-जन के दिलो दिमाग में अयोध्या विवाद खत्म होने के विचार चल रहे थे। फैसला आते ही लोगों में एंडोर्फिन हार्मोन का स्राव होने लगा, इससे लोगों को खुशी मिली।

विशेषज्ञों के अनुसार, अयोध्या पर फैसला आते ही लोगों में एंडोर्फिन हार्मोन के स्राव से लोग भावुक हो गए और खुशी मिली। मगर, लोगों ने इस खुशी को व्यक्त करने के लिए मर्यादित व्यवहार किया। यह सुपर ईगो से हुआ, सालों से लोग अयोध्या मामले को लेकर आशंकित और चिंतित थे, वे चाहते थे कि यह प्रकरण समाप्त हो जाए। इसी तरह का माहौल बना, हर मंच से यही अपील की गई कि फैसला कोई भी हो, उसका स्वागत किया जाए। ऐसा ही हुआ। सुपर ईगो से लोगों ने अपनी खुशी और भावनाओं को मानवीय, सामाजिक और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए मर्यादित व्यवहार किया।

विशेषज्ञों की राय

सालों से चल रहे अयोध्या विवाद को आम लोग खत्म करने के पक्ष में थे, माहौल बना कि जो भी निर्णय आएगा वह मान्य होगा। फैसला आते ही एंडोर्फिन हार्मोन का स्राव होने लगा, इससे लोगों को खुशी मिली कि विवाद खत्म हो गया।

डॉ. यूसी गर्ग, मनोचिकित्सक

जिंदगी और समाज में बड़े फैसले आने पर साइकोलॉजिकल बदलाव होते हैं। ऐसे में सुपर ईगो व्यक्ति के सामाजिक व्यवहार को मर्यादित रखता है, वह राष्ट्र हित में सोचता है, यही देखने को मिला है।

डॉ. दिनेश राठौर, प्रमुख अधीक्षक मानसिक स्वास्थ्य संस्थान  

Posted By: Tanu Gupta

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