आगरा जिले के 7500 परिषदीय शिक्षकों की नौकरी पर STF की नजर, सर्टिफिकेट्स की होगी जांच
आगरा के परिषदीय विद्यालयों के करीब 7500 शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की एसटीएफ जांच करेगी। यह कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, आगरा। जिले के परिषदीय विद्यालयों में नौकरी कर रहे करीब साढ़े सात हजार शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता और नियुक्ति से जुड़े प्रमाणपत्र जांच के दायरे में हैं। किसकी डिग्री असली है और किसने फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे सरकारी नौकरी प्राप्त की है, इसका लेखा-जोखा अब एसटीएफ खंगालेगी। शासन के निर्देश और हाईकोर्ट के आदेश के बाद स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की टीम ने आगरा में दस्तक दे दी है।
टीम ने बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी से मिलकर शिक्षकों से जुड़े अभिलेखों की जानकारी जुटाई है। इसके बाद विभाग में भी खलबली मच गई है। एसटीएफ के सक्रिय होते ही जिला बेसिक शिक्षाधिकारी डा. राकेश कुमार सिंह ने सभी खंड शिक्षाधिकारियों और प्रधानाध्यापकों को निर्देश जारी कर दिए हैं। सभी प्रधानाध्यापकों को अपने यहां तैनात शिक्षकों के प्रमाणपत्र तत्काल जुटाने को कहा है।
सात नवंबर तक सभी प्रमाणपत्र खंड शिक्षाधिकारियों को उपलब्ध कराने की समयसीमा तय की गई है। यानी अब शिक्षकों को अपनी शैक्षिक योग्यता और नियुक्ति से जुड़े प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने होंगे। दीपावली के बाद इन अभिलेखों को सत्यापन के लिए एसटीएफ को उपलब्ध कराया जाएगा।
किसकी डिग्री सही, किसकी नौकरी फर्जी? होगी पड़ताल
यह सारी कवायद उस एक याचिका के बाद हो रही है, जिसकी सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के बाद शासन ने जांच की प्रक्रिया तेज की है।
इस लिहाज से आगरा में करीब साढ़े सात हजार शिक्षक इस जांच के दायरे में हैं। एसटीएफ की पड़ताल में शैक्षिक प्रमाणपत्रों की वास्तविकता के साथ नियुक्ति संबंधी अभिलेखों की भी जांच होगी। यदि किसी शिक्षक के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए, तो उसे चिह्नित कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
2019 की रहस्यमयी आग का जिन्न फिर बाहर, बंद कमरे में क्या छिपा है?
इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प और गंभीर पहलू बीएसए कार्यालय में वर्षों से बंद पड़ा वह कमरा है, जिसमें शिक्षकों के महत्वपूर्ण शैक्षिक प्रमाणपत्र रखे गए थे। आठ अक्टूबर 2019 को दशहरे की रात बीएसए कार्यालय के इस कमरे में अचानक आग लग गई थी। आग की घटना ने कई सवाल खड़े किए थे।
इसके बाद एसआईटी जांच बैठी, लेकिन आज तक न तो आग लगने के कारण स्पष्ट हो सके और न ही आग से हुए नुकसान और अभिलेखों की वास्तविक स्थिति सामने आ पाई। मामला इतना उलझा कि शासन से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंच गया। शासन ने कमरे को खोलकर जांच कराने के निर्देश दिए। एक बार कमरा खोला भी गया, लेकिन कुछ औपचारिकताओं के बाद उसे दोबारा सील कर दिया गया।
तब से शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की स्थिति प्रश्नों के घेरे में है। न अभिलेखों की पूरी तस्वीर सामने आई और न ही आग की घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई निर्णायक साक्ष्य सामने आ सके।
अब खुलेगा कमरा, अभिलेख बताएंगे हकीकत
नए सिरे से जारी आदेशों के बाद बीएसए डा. राकेश कुमार सिंह ने कमेटी के माध्यम से गुरुवार को बंद पड़े कमरे को खुलवाने के निर्देश दिए हैं। अब वहां रखे अभिलेखों की स्थिति और उपलब्ध प्रमाणपत्रों की स्थिति व उनका परीक्षण किया जाएगा। वर्षों से बंद इस कमरे का खुलना इसलिए भी अहम है, क्योंकि शिक्षकों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन में इन अभिलेखों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
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