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उर्दू में गूंजी मोरारी बापू की रामकथा, आगरा की राहत जहां खानम ने पेश की साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल

By Jagran NewsEdited By: Vivek Shukla
Published: Fri, 25 Sep 2026 07:46 AM (IST)

आगरा की शोधार्थी राहत जहाँ खानम ने मोरारी बापू की रामकथा की अनुभूतियों को उर्दू में लिखा, जिसकी सराहना स्वयं ...और पढ़ें

मोरारी बापू की फाइल फोटो। जागरण

मोरारी बापू की फाइल फोटो। जागरण

HighLights

  1. आगरा की राहत जहाँ खानम ने रामकथा उर्दू में लिखी।

  2. मोरारी बापू ने उनकी रचनाओं का व्यासपीठ से उल्लेख किया।

  3. यह पहल प्रेम और मानवीय मूल्यों का संदेश फैलाती है।

जागरण संवाददाता, आगरा। रामकथा के प्रति श्रद्धा और साहित्यिक अभिव्यक्ति का एक अनूठा उदाहरण आगरा में देखने को मिला। मोरारी बापू की कथा सुनने पहुंचीं आगरा की मनोविज्ञान की शोधार्थी राहत जहाँ खानम ने कथा के प्रत्येक दिन की अनुभूतियों और भावों को अपनी भाषा उर्दू में शब्दों में पिरोना शुरू किया। उनकी लिखी हुई कथा की भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने स्वयं मोरारी बापू का ध्यान आकर्षित किया।

राहत जहाँ खानम आगरा में मनोविज्ञान की शोधार्थी होने के साथ-साथ रिक्रूटमेंट एवं प्लेसमेंट क्षेत्र से भी जुड़ी हैं और अपनी कंपनी के माध्यम से युवाओं को रोजगार दिलाने का कार्य करती हैं। उनका कहना है कि कथा सुनते हुए उन्हें जो आध्यात्मिक और मानवीय भाव महसूस होते हैं, उन्हें वे अपनी भाषा में लिखकर संजो रही हैं।

बताया गया कि राहत द्वारा लिखी गई कथा के चार दिनों की भावपूर्ण रचनाओं का व्यासपीठ से कथा के बीच में उल्लेख/पाठ किया गया, जिसे उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी रुचि और भाव के साथ सुना। उनकी उर्दू अभिव्यक्ति में कथा के प्रसंगों को प्रेम, करुणा, मानवता और आत्मचिंतन के दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है।

राहत जहां खानम का कहना है कि उनके लिए रामकथा केवल किसी एक समुदाय या धर्म तक सीमित विषय नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा, मानवता और आत्मबोध का संदेश है। इसी भावना से वे कथा के प्रत्येक दिन को अपने शब्दों में लिख रही हैं।

उनकी इस पहल को कथा के दौरान पसंद किया जाना भाषा और साहित्य के माध्यम से सामाजिक एवं सांस्कृतिक संवाद का एक सुंदर उदाहरण माना जा रहा है। उर्दू भाषा में रामकथा की अनुभूतियों को अभिव्यक्त करने का यह प्रयास श्रद्धालुओं के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

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राहत जहाँ खानम का उद्देश्य आगे भी कथा के विभिन्न दिनों की अनुभूतियों को संकलित कर एक साहित्यिक रूप देना है, ताकि प्रेम और मानवीय मूल्यों का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके। ‎

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