मिठाई-नमकीन में क्या मिलाया, कहां से आया कच्चा माल, अब हर बात का देना होगा हिसाब
आगरा में मिठाइयों और नमकीन में मिलावट रोकने के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं। अब केवल शुद्ध चांदी ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, आगरा। मिठाइयों में अब एल्युमिनियम व अन्य भारी धातुओं के वर्क का प्रयोग नहीं किया जाएगा। किसी भी मिठाई में 99.9 प्रतिशत शुद्ध चांदी का वर्क ही प्रयोग होगा। इसी तरह से काजी या फिर बादाम के नाम पर मूंगफली के चूरे के प्रयोग पर रोक लग गई है। दुकानदार अक्सर पिस्ता बताकर यह खेल करते हैं। दुकानदारों से लेकर निर्माता तक की जवाबदेही तय की गई है।
मिलावटखोरी पर अंकुश लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने अहम कदम उठाया है। मिठाई-नमकीन में क्या-क्या मिलाया गया है। कच्चा माल कहां से आया है, इन सब बातों का हिसाब अनिवार्य रूप से देना होगा। इसे लेकर खाद्य सुरक्षा आयुक्त डा. रोशन जैकब ने सभी सहायक खाद्य आयुक्त को दिशा निर्देश जारी किए हैं।
निरीक्षण के दौरान तय किए गए पैरामीटर का पालन किया जाएगा। आगरा मंडल के सहायक आयुक्त खाद्य एसएस हैदर आबिदी ने बताया कि अनुमन्य सिंथेटिक रंग का प्रयोग मानकों के अनुरूप किया जाएगा। यह 100 पीपीएम के भीतर होना चाहिए।
विनिर्माणशाला से संबंधित
- विनिर्माण और प्रसंस्करण क्षेत्र हवादार होना चाहिए। धुआं रहित होना चाहिए।
- दीवारों पर न्यूनतम दो मीटर तक टाइल्स लगी होनी चाहिए।
- कड़ाही या फिर अन्य बर्तनों की सफाई ठीक तरीके से होनी चाहिए। परिसर की सफाई ठीक तरीके से होनी चाहिए।
- कूड़े का निस्तारण सही तरीके से होना जरूरी है।
कच्चा माल और तैयार उत्पाद का भंडारण
- कच्चे माल की गुणवत्ता जैसे मैदा, चीनी, मावा, बेसन, तेल, वनस्पति, मेवा, मसालों की गुणवत्ता में मिलावट नहीं होनी चाहिए। किसी भी स्थिति में फफूंद या फिर बदबू नहीं आनी चाहिए।
- मावा और डेरी उत्पाद : दूध, पनीर सहित अन्य का रखरखाव ठीक से होना चाहिए। चार डिग्री से. का तापमान फ्रिज में होना चाहिए।
- तेल और वसा भंडारण ठीक तरीके से किया जाना चाहिए। इन्हें सीधी धूप से बचाया जाना चाहिए।
- कच्चे माल और तैयार मिठाइयों को अलग अलग शेल्फ में रखा जाना चाहिए। कब तैयार हुआ और कब तक खराब होगा, इसकी तिथि अनिवार्य रूप से अंकित होनी चाहिए।
मावा आधारित मिठाइयां
- बर्फी, पेड़ा, कलाकंद, मावा रोल, गुलाब जामुन को फ्रिज में चार डिग्री से. में रखा जाना चाहिए।
- अत्यधिक नमी और पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण मावा में बैक्टीरिया उत्पन्न हो जाते हैं। मावा को खुला न रखा जाए।
छेना आधारित मिठाइयां
- रसगुल्ला, रसमलाई में जल्द फफूंद लगने का खतरा रहता है। ऐसे में कोल्ड चेन को बरकरार रखना जरूरी है। खासकर चीनी की चाशनी को लेकर सबसे अधिक परेशानी रहती है।
- दूध में पाम आयल या फिर सस्ते फैट की मिलावट नहीं होनी चाहिए।
मेवा आधारित मिठाइयां
- काजू, कतली, अंजीर रोल, बादाम बर्फी, पिस्ता पाग जल्द खराब हो सकती हैं। पुरानी या फिर सड़ी हुई मेवा का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।
दूध आधारित मिठाइयां
- श्रीखंड और दही जैसे उत्पादों में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया की उचित्र मात्रा और खट्टापन नियंत्रित होना चाहिए।
- अगर दूध खराब हो गया है या फिर कई दिन हो चुके हैं। ऐसी दशा में इसकी बिक्री न की जाए।
प्रतिबंधित औद्योगिक रंगों का न किया जाए प्रयोग :
- बर्फी, मोतीचूर के लड्डू में बासीपन के प्रभाव को छिपाने के लिए टेक्साइल डाई का प्रयोग किया जाता है। इसमें सबसे अधिक लाल और गुलाबी रंग की मिठाइयां होती हैं।
- पीली मिठाइयों जैसे बेसन, जलेबी में गैर खाद्य औद्योगिक रंग का प्रयोग किया जाता है।
- मावा और पनीर निर्माण में सिंथेटिक दूध, रिफाइंड पामोलिन आयल, यूरिया या फिर स्टार्च मिलाया जाता है।
- नमकीन, भुजिया और सेव में पीले रंग का प्रयोग किया जाता है।
लाइसेंस और दस्तावेज
- लाइसेंस होना जरूरी है। सभी दस्तावेज होने चाहिए।
- दुकानों में चूहे, काकरोच या फिर मक्खी न उड़े, इस बात का ध्यान रखना चाहिए।