आगरा, जागरण संवाददाता। नशे की दवाओं के काले कारोबार के मामले में दवा माफिया पंकज गुप्ता समेत आठ लोगों के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट लगा दी है। पुलिस ने इसे अदालत में प्रस्तुत कर दिया है। दवा माफिया के खिलाफ कमला नगर थाने में दो मुकदमे दर्ज किए गए थे। इनकी विवेचना पहले न्यू आगरा से हो रही थी। बाद में इसे सीओ हरीपर्वत को स्थानांतरित कर दिया गया। अब सीओ इसकी विवेचक हैं।

इंस्पेक्टर कमला नगर थाना नरेंद्र शर्मा ने बताया पिछले वर्ष 19, 20 और 21 दिसंबर को नशे की दवाओं के काले कारोबार करने वाले जयपुरिया गैंग पर औषधि विभाग और पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की थी। इस क्रम में तेज नगर, बल्केश्वर निवासी सरगना पंकज गुप्ता के यहां से भारी मात्रा में दवाओं का जखीरा बरामद किया गया था। मामले में पुलिस ने दवा माफिया पंकज गुप्ता समेत आठ लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेजा था।

इन आरोपितों में पंकज गुप्ता के अलावा उसका पुत्र अमन, साथी अनिल की पत्नी मन्नत करीरा, धीरज, किशन अग्रवाल, सूर्यकांत गुप्ता, नंद किशोर उर्फ नंदू थे। पंकज गुप्ता को पुलिस ने बाद में गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ कमला नगर थाने में दो मुकदमे दर्ज किए थे। एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि जेल भेजे गए सभी आठ आरोपितों के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट लगा दी है। आरोप पत्र को अदालत में प्रस्तुत कर दिया है।

फरार पांच लोगों पर गिरफ्तारी के बाद लगेगी चार्जशीट

दवा माफिया पंकज गुप्ता समेत आठ लोगों के खिलाफ पुलिस ने आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत कर दिया है। अभी पांच आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट लगनी है। इनमें पंकज का साथी कानपुर निवासी सरदार हरप्रीत, पंकज गुप्ता की पत्नी रीता और दो बेटियां फरार हैं। आरोपितों से पूछताछ और पुलिस की विवेचना में सामने आया कि कानपुर का हरप्रीत ही पंकज के पास दवाओं को भेजता था। एसपी सिटी ने बताया कि मुकदमों में वांछित इन पांचों आरोपितों की गिरफ्तारी के प्रयास भी किए जा रहे हैं। उन्हें जेल भेजने के बाद अलग से चार्जशीट अदालत में प्रस्तुत की जाएगी।

एडीजी आैर आइजी कर रहे हैं मानीटरिंग

दवाओं के काले कारोबार के लिए कुख्यात हो चुके आगरा के अन्य राज्यों में फैले नेटवर्क को तहस-नहस करने के लिए एडीजी राजीव कृष्ण और आइजी नवीन अरोड़ा इसकी मानीटरिंग कर रहे हैं। इससे कि नशीली दवाओं और उसके कारोबार से जुड़े दवा माफिया पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके। जेल भेजे गए आरोपितों के खिलाफ साक्ष्यों के साथ मजबूत पैरवी की जा सके। इसी के चलते दवा माफिया के खिलाफ दर्ज मुकदमों की विवेचना सीओ हरीपर्वत को सौंपी गई है।

 

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