आगरा, संजीव जैन। भारत की पांच हजार करोड़ रुपए की फुटवियर इंडस्ट्री को इस साल यूरोप और अमेरिकी मार्केट में निर्यात के बेहतर अवसर मिलने वाले हैं। आगरा आए अमेरिका की 13 फुटवियर कंपनियों के प्रतिनिधियों ने ऐसे संकेत दिए हैं।

काउसिंल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स (सीएलई) व आगरा फुटवियर मैन्यूफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्ट चैंबर (एफमेक) के पदाधिकारियों ने इन प्रतिनिधियों को भारत-अमेरिकी रिश्तों की अनुकूलता व चीन से कड़वाहट को देखते हुए वहां बाजार तलाशने को कदम बढ़ाने की दिशा में बातचीत की।

भारतीय फुटवियर इंडस्ट्री को चीन के घटते एक्सपोर्ट का भी फायदा मिल रहा है। इस साल यूरोप में चीन निर्मित जूतों की डिमांड में 10 से 12 फीसदी की कमी आई है। बाजार में अब लेदर के बजाय नॉन लेदर जैसे कैनवास, रैगजीन, कपड़े और रबर से बने जूतों की अच्छी डिमांड है। इसे देखते हुए इंडस्ट्री को अगले पांच साल में नए बाजारों में 60 से 70 फीसद एक्सपोर्ट ग्रोथ मिलने की उम्मीद है।

एफमैक संस्था के अध्यक्ष पूरन डावर, काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट के रीजनल चेयरमैन नजीर अहमद ने बताया कि दुनिया भर में बनने वाले फुटवियर में 70 फीसदी चीन में बनते हैं। वैश्विक स्तर पर निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 40 फीसद, भारत की 32.9 फीसद है। अभी हाल ही में चीन से अमेरिका में आने वाले 325 अरब डॉलर के सामान पर लगने वाले टैरिफ को 10 फीसद से बढ़ाकर 25 फीसद कर दिया गया है, जिस कारण चीन से फुटवियर का निर्यात 8 से 10 फीसदी घट गया है। इसका फायदा भारत जैसे दूसरे फुटवियर निर्यातक देशों को मिल रहा है। भारत पर यह टैरिफ आठ प्रतिशत है, जिसके शीघ्र शुल्क मुक्त होने के भी संकेत दो दिन पहले आगरा आए अमेरिका फुटवियर कंपनी स्केचर्स, कूलाबुर्रा, कीन, ब्राउन शू कंपनी की होम्स-टेक फैक्ट्री, करोसस, शोहीमाल, सुप्रा, सर्वोच्च, टॉमी हिलफिगर समेत 13 कंपनियों के प्रतिनिधियों ने दिए है।

अमेरिका की तीन कंपनी ऐसी हैं, जिन्होंने आगरा में अपनी जरूरत के मुताबिक उत्पाद तैयार कराने के संकेत दिए हैं। इन प्रतिनिधियों ने कई इकाइयों का सर्वे भी किया। डावर व नजीर कहते हैं कि अमेरिका में लेदर व फुटवियर का निर्यात हुआ तो भारत पूरे विश्व में निर्यात के मामले में नंबर वन होगा, अभी तक दूसरा स्थान है। वर्तमान में आगरा के जूते के सबसे बड़े खरीददार इंग्लैंड, जर्मनी, फ्रांस, इटली, हॉलैंड, अमेरिका, आस्ट्रेलिया सहित अन्य देश हैं।

नजीर कहते हैं कि वर्ष 2002 से यूरोपीय बाजार के विकल्प के रूप में अमेरिका के बाजार में निर्यात की संभावनाओं पर हमने काम शुरू कर दिया था। वर्ष 2012-13 में अमेरिका में भारत के निर्यात का कारोबार 52.61 करोड़ डॉलर (3367 करोड़ रुपये) था जो 2018-19 में बढ़कर 139.65 करोड़ डॉलर (8937 करोड़ रुपये) तक पहुंच गया।

ऐसे दम भर रहा आगरा

- 28 फीसद है देश के कुल निर्यात में हिस्सेदारी

- 23 फीसद है देश के घरेलू कारोबार में हिस्सेदारी

- करीब 15 हजार करोड़ रुपये का घरेलू कारोबार है जबकि पांच हजार करोड़ रुपये का निर्यात।

- 20 है शहर में फुटवियर मार्केट की कुल संख्या

- 03 लाख से अधिक हैं आगरा में जूता बनाने वाले कुशल कारीगर।

- आगरा में करीब 7.5 हजार छोटे-बड़े जूता उद्यमी हैं। इनमें से 200 निर्यातक हैं। करीब पाच लाख की आबादी इस पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर करती है। 

Posted By: Prateek Gupta

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