आगरा के किसानों को सिंचाई के लिए करना होगा इंतजार, नहरों में पानी आने में देरी
आगरा में नहरों की सफाई के कारण किसानों को सिंचाई के लिए पानी का इंतजार करना पड़ेगा। 15 नवंबर तक ...और पढ़ें

नहर की सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, आगरा। नहरों की सफाई का काम पूरा होने तक किसानों को सिंचाई के लिए इंतजार करना पड़ेगा। जिले में 10 नवंबर तक नहरों की सफाई का कार्य चलेगा। इसके बाद 10 नवंबर को हरिद्वार से पानी छोड़ा जाएगा, जो 15 नवंबर तक आगरा की नहरों में पहुंचेगा। ऐसे में नहरों के पानी पर निर्भर किसानों के सामने खेतों की पलेवट का संकट खड़ा हो गया है।
गेहूं की बोआई का उपयुक्त समय एक से 20 नवंबर तक माना जाता है। पानी देर से मिलने के कारण किसानों की बोआई प्रभावित होने की आशंका है। जिले में सरसों और आलू की तुलना में गेहूं का रकबा अधिक रहता है। सरसों की बोआई लगभग पूरी हो चुकी है, जबकि आलू की बोआई बिना पलेवट के भी चल रही है। करीब 70 प्रतिशत आलू की बोआई हो चुकी है। अब किसान गेहूं की बोआई की तैयारी में जुटे हैं।
नहरों से सिंचाई पर निर्भर किसानों को खेत तैयार करने के लिए पानी का इंतजार है। नहरों की सफाई पूरी होने के बाद हरिद्वार से छोड़ा गया पानी मेरठ पहुंचेगा। वहां से ओखला होते हुए आगरा आएगा। ओखला से आगरा तक पानी पहुंचने में करीब तीन दिन का समय लगेगा। इसके बाद ही किसानों को पलेवट के लिए पानी मिल सकेगा।
मलपुरा के किसान हरिओम ने बताया कि खेतों में पलेवट करने के बाद 10 से 12 दिन में जमीन जुताई के लायक हो पाती है। ऐसे में 15 नवंबर के बाद पानी मिलने पर गेहूं की बोआई नवंबर के अंतिम सप्ताह तक खिसक सकती है। दिसंबर में बोआई होने से गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
नहरों की सफाई का कार्य चल रहा है। 10 नवंबर तक इसे पूरा कर लिया जाएगा। 10 नवंबर को हरिद्वार से पानी छोड़ा जाएगा। 15 नवंबर तक आगरा की नहरों में पानी पहुंचने की उम्मीद है।
- करनपाल सिंह, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग
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