आगरा, जागरण संवाददाता। यह तो तीन ही उदाहरण हैं। जहां कोविड मरीज की मौत हो गई या फिर मरीज सामने आने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने कंटेनमेंट जोन नहीं बनाया जबकि शासन के स्पष्ट आदेश हैं कि एक मरीज मिलने पर 25 मीटर और दो मरीज से अधिक मिलने पर 60 मीटर के दायरे में जो भी मकान या फिर प्रतिष्ठान आ रहे हैं। वह सभी कंटेनमेंट जोन होंगे। अशोक नगर निवासी सुधीर कुमार का कहना है कि परिवार में दो लोगों को कोविड संक्रमण की पुष्टि हुई थी। कंट्रोल रूम में इसकी शिकायत की गई लेकिन वहां से कोई मदद नहीं मिली। यह है नियम

जैसे ही किसी मरीज को कोविड की पुष्टि होगी। मरीज के घर पर स्वास्थ्य विभाग की टीम जाएगी। कंटेनमेंट जोन बनाया जाएगा। घर व उसके आसपास के क्षेत्र में सैनिटाइजेशन होगा। परिवार के सभी सदस्यों की जांच होगी और जरूरत के हिसाब से दवाएं दी जाएंगी। मरीज को कोविड कैसे हुआ, इसका पता लगाया जाएगा। - गली कारवान लोहामंडी निवासी ओम प्रकाश अग्रवाल तीन सप्ताह पूर्व कोविड पाजिटिव हुए थे। तबीयत बिगड़ने पर स्वजन ने उन्हें रामरघु अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उनकी मौत हो गई। ओम प्रकाश की मौत के बाद भी घर के आसपास कंटेनमेंट जोन नहीं बना। परिवार के किसी भी सदस्य के पास स्वास्थ्य विभाग का न तो फोन आया और न ही कोई दवा देने के लिए आया। - गली कारवान लोहामंडी संजय स्वास्थ्य कर्मी हैं। एसएन मेडिकल कालेज में तैनात हैं। दो सप्ताह पूर्व कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। संजय होम आइसोलेट हो गए लेकिन उनके घर के आसपास कंटेनमेंट जोन नहीं बनाया गया। क्षेत्रीय लोगों ने कंट्रोल रूम में फोन किया और शिविर लगाकर जांच करने की मांग की, लेकिन प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कोई ध्यान नहीं दिया। - पिछले दिनों अशोक नगर निवासी कल्पना सक्सेना की कोविड संक्रमण से मौत हो गई। यहां तक परिवार के कई सदस्यों को बुखार आ रहा था लेकिन दवा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची। लोगों ने शिविर लगाकर हर व्यक्ति की जांच की मांग की। शिकायतों के बाद नगर निगम की टीम ने सैनिटाइजेशन किया।