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आगरा अवैध मतांतरण में बड़ा खुलासा: नौ चरणों में फंसाते थे लोगों को, जरुरतमंद को बनाते थे निशाना

Published: Sat, 26 Sep 2026 10:33 AM (IST)

आगरा में अवैध मतांतरण कराने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जो नौ चरणों की व्यूह रचना से ...और पढ़ें

सैंया में अवैध ईसाई मतांतरण के आरोप में गिरफ्तार दाएं से डोंगर सिंह, विनीत बेदी, प्रताप सिंह एवं मुखराज जागरण आर्काइव

सैंया में अवैध ईसाई मतांतरण के आरोप में गिरफ्तार दाएं से डोंगर सिंह, विनीत बेदी, प्रताप सिंह एवं मुखराज जागरण आर्काइव

HighLights

  1. अवैध मतांतरण कराने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का आगरा में भंडाफोड़।

  2. गिरोह नौ चरणों की व्यूह रचना से लोगों को जाल में फंसाता था।

  3. कमजोर लोगों को निशाना बनाकर एक वर्ष में मतांतरण करा देते थे।

जागरण संवाददाता, आगरा। अवैध मतांतरण कराने वालों का नेटवर्क कई राज्यों में फैला है। गिरोह लक्ष्य पाने को नौ चरण की व्यूह रचना करके काम करता था। जाल में फंसाकर व्यक्ति को एक वर्ष में ही नेटवर्क का हिस्सा बना लिया जाता था। पकड़े गए गिरोह के चार आरोपितों से बरामद डाटा और पूछताछ में मतांतरण के जाल में फंसाने के पूरे व्यूह की जानकारी सामने आई है।

पुलिस ने गुरुवार को बीमारी ठीक करने के बहाने प्रार्थना सभा में अवैध मतांतरण करके ईसाई बनाने के आरोप में चार आरोपितों विनीत बेदी, प्रताप, डोंगर सिंह एवं मुखराज को पकड़ा है। यह लोग नौ चरणों पर काम करते थे। शुरूआत व्यक्ति या परिवार की पहचान से होती थी।

इसके लिए अस्पतालों के आसपास जरूरतमंद और भावनात्मक तौर पर टूटे लोगों की तलाश की जाती थी। नेटवर्क से जुड़ी महिलाएं उनसे संपर्क कर सहानुभूति का भाव प्रकट करतीं। 

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एक वर्ष में नेटवर्क में शामिल हो जाता था जाल में फंसा व्यक्ति

अगले चरण में घर के पुरुषों से मेल बढ़ाकर उनसे पारिवारिक और नजदीकी संबंध स्थापित किए जाते। इस प्रक्रिया में कभी-कभी एक वर्ष का समय तक लग जाता। लक्ष्य किए व्यक्ति के जीवन में शैक्षणिक, सामाजिक एवं आर्थिक बदलाव लाने पर उसके आसपास के लोग भी प्रभावित होते थे। इसके बाद संबंधित के घर में प्रार्थना सभा आयोजित की जाती। इसमें आसपास की महिलाएं भी वहां आने लगतीं। धीरे-धीरे उन्हें प्रार्थना का नियमित हिस्सा बना लिया जाता था।

आसपास के राज्यों से भी जुटाई जा रही जानकारी

पूछताछ में पता चला है कि उत्तर प्रदेश के साथ ही दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में नेटवर्क सक्रिय था। छह राज्यों के लोग सिग्नल एप व ईमो से जुड़े थे। जूम पर भी प्रार्थना सभाओं की तिथि और स्थान तय होता था। राजस्थान के बांसवाड़ा में 22 सितंबर को युवा महोत्सव के नाम पर लोगों को एकत्रित किया गया। पुलिस इस तरह के मामलों में कहां-कहां पर मुकदमे दर्ज किए गए, इसकी जानकारी भी कर रही है।

ये हैं चक्रव्यूह के नौ चरण

  • लक्षित व्यक्ति या परिवार की पहचान करना
  • संपर्क स्थापित करना, समस्या
  • बीमारी में प्रार्थना एवं सहायता
  • विश्वास कायम करना
  • आर्थिक मदद के साथ अन्य लाभ का प्रलोभन
  • धार्मिक सभा से जोड़ना
  • धार्मिक शिक्षाएं देना
  • मतांतरण के लिए प्रेरित करना
  • नए व्यक्तियों काे जोड़ने के लिए तैयार करना
  • फंड के स्रोत जानने को खातों का बैंकों से मांगा रिकॉर्ड

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नेटवर्क से जुड़े लोगों द्वारा कहां-कहां पर प्रार्थना सभाएं की जा रही थीं, पूर्व में किन स्थानों पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं, इसकी जानकारी की जा रही है। सिग्नल एप व ईमो तथा नेटवर्क को फंडिंग की जानकारी के लिए उनके खातों में लेन-देन की जानकारी मांगी गई है।

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डीसीपी पश्चिमी जोन आदित्य