आगरा, अली अब्बास। बीता वर्ष कोरोना संक्रमण काल के चलते लाकडाउन और कोविड प्रोटोकाल में बीता।लोगों का लंबा समय घरों पर ही बीता।बड़ों के साथ बच्चे भी घरों से बाहर ज्यादा नहीं निकले। इस दौरान बच्चों के शोषण की घटनाएं भी बढ़ीं। वर्ष 2020 मेंं बच्चों के शोषण के 276 मामले सामने आए। इनमें 90 फीसद मामले में बालिकाओं और दस फीसद बालकों के शोषण के थे।

उनका शोषण करने वाले कोई अपरिचित नहीं थे। अधिकांश आरोपित रिश्तेदार, परिचित या उनके अभिभावकों के दोस्त थे। चाइल्ड लाइन में 276 बच्चों ने परिचितों और रिश्तेदारों द्वारा अपने साथ अश्लील हरकतें, छेड़छाड़, मारपीट, मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न की शिकायत कीं। चाइल्ड लाइन के काउंसलर ने इन बच्चों की कांउसिलिंग की। कई मामलों में बच्चों के अभिभावकों की भी काउंसिलिंग करनी पड़ी।

केस एक:

ताजगंंज क्षेत्र निवासी 12 वर्षीय बालिका के माता-पिता की मृत्यु हाे चुकी थी। वह चाचा-चाची के साथ रहती थी। चाचा के काम पर जाने के बाद पड़ोसी युवक घर पर आकर बालिका से अश्लील हरकतें करता। बालिका ने इसकी शिकायत चाचा और चाची से की। मगर, आरोपित उनके सामने बालिका से जिस तरह से पेश आता था।उन्हें बालिका की बात पर यकीन नहीं हुआ। एक दिन चाचा ने पड़ोसी युवक को अपनी आंखों से बालिका के साथ हरकत करते देखा तो उन्हें यकीन हुआ। वह मुकदमा लिखाना नहीं चाहते थे। मगर,आरोपित भविष्य में इस तरह की हरकत न करे, इसका भी उपाय करना चाहते थे। मामले में चाइल्ड हेल्पलाइन की मदद ली। काउंसिलिंग के बाद वह मुकदमा दर्ज कराने को तैयार हुए। पिछले वर्ष दिसंबर में आरोपित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।

केस दो:

एत्माद्दौला क्षेत्र निवासी 14 वर्षीय किशोरी के पिता की मौत चुकी है। मां एक फैक्ट्री में काम करती है। घर पर किशोरी और उसका का 15 वर्षीय बड़ा भाई रहते हैं। मां और भाई के बाहर जाते ही पड़ोस में रहने वाला युवक उसके घर पहुंच जाता। किशोरी के साथ अश्लील हरकतें करता। एक दिन किशोरी के भाई ने आरोपित को बहन के साथ छेड़छाड़ करते देख लिया। बहन ने भाई को पड़ोसी की हरकतों के बारे में बताया। भाई ने मां से शिकायत की लेकिन वह बदनामी के चलते पुलिस में जाने को तैयार नहीं हुई।इस पर भाई ने चाइल्ड हेल्पलाइन की मदद ली। चाइल्ड लाइन ने किशोरी की मां से संपर्क किया, लेकिन वह मुकदमा कराने को तैयार नहीं थीं।इससे आरोपित का दुस्साहस बढ़ गया।एक दिन मां ने आरोपित को अपनी आंखों से बेटी को जबरन खींच करके ले जाते हुए देखा। उसने चाइल्ड लाइन की मदद लेकर फरवरी में आरोपित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने आरोपित को जेल भेजा।

महत्वपूर्ण तथ्य

-शोषण के शिकार अधिकांश बच्चों की उम्र 12 से 17 वर्ष के बीच थी।

-80 फीसद मामलों में बच्चों का शोषण करने के आरोपित उनके रिश्तेदार या परिचित थे।

-ये रिश्तेदार और परिचित बच्चों के अभिभावकों के सामने उनसे अच्छा व्यहार करते थे।

-अभिभावकों की गैर मौजूदगी में रिश्तेदार या परिचित का व्यवहार और नजरें बदल जाती थीं।

-कई अभिभावकों को बच्चों की शिकायत पर यकीन नहीं हुआ कि सगे संबंधी या परिचित ऐसा कर सकते हैं।

-चाइल्ड लाइन ने ऐसे बच्चों के साथ उनके अभिभावकों की भी काउंसिलिंग की।

वर्ष 2020 में 276 बच्चों ने चाइल्ड लाइन को काल करके अपने शोषण की शिकायत की। अधिकांश मामलों में बच्चों का शोषण करने वाले उनके जानकार थे। ऐसे में बच्चों और उनके अभिभावकों की काउंसिलिंग की गई। इसके साथ ही काउंसलर ने पीड़ित बच्चों की ्नियमित निगरानी की, उनके संपर्क में रहे।

ऋतु वर्मा चाइल्ड लाइन समन्वयक 

Edited By: Tanu Gupta