आगरा, जागरण संवाददाता। बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी के खिलाफ गवाही की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। उसके खिलाफ 22 साल पुराने मामले में आठ अक्टूबर को विशेष न्यायाधीश एमपी/एमएलए धोखाधड़ी के आरोप तय किए गए थे। मुकदमे के वादी तत्कालीन थानाध्यक्ष शिव शंकर शुक्ला के हाजिर न होने पर गवाही नहीं हुई। अदालत ने सुनवाई के लिए 22 अक्टूबर की तारीख नियत की है। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई पेशी में अंसारी ने अपनी जान का खतरा बताया। जिस पर अदालत ने प्रमुख सचिव को आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

केंद्रीय कारागार में मार्च 1999 में पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने छापा मारा था। अंसारी की बैरक से मोबाइल, बुलेटप्रूफ जैकेट बरामद की थी। तत्कालीन थानाध्यक्ष शिव शंकर शुक्ला की ओर से अंसारी के खिलाफ धोखाधड़ी व आपराधिक षडयंत्र की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। उसके खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। अंसारी ने इस साल अगस्त में खुद पर लगे आरोपों से डिस्चार्ज करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। जिसे 22 सितंबर को अदालत ने खारिज कर दिया था।

विशेष न्यायाधीश एमपी/एमएलए नीरज गौतम की अदालत में मंगलवार को अंसारी की वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी हुई। मगर, गवाह हाजिर नहीं हुए। अदालत ने सुनवाई के लिए अब 22 अक्टूबर की तारीख नियत की है। एसएसपी से गवाहों को समन तामील कराना सुनिश्चित कराने के आदेश किए। पेशी पर अंसारी ने जेल में अपनी जान को खतरा बताया।अदालत ने प्रमुख सचिव एवं सरकार को आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित कर अवगत कराने के निर्देश दिए।

अभियोजन की ओर से ये हैं दस गवाह

तत्कालीन डीएम राजेंद्र कुमार तिवारी समेत मुकदमे में दस गवाह हैं। राजेंद्र कुमार तिवारी वर्तमान में मुख्य सचिव हैं। जबकि नौ अन्य गवाहों में तत्कालीन एसएसपी सुबेश कुमार सिंह, एसपी सिटी डीसी मिश्रा, मुख्य चिकित्साधिकारी एके सक्सेना, एडीएम सिटी एके सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट पीएन दुबे, वरिष्ठ अधीक्षक केंद्रीय कारागार केदार नाथ, जेलर कुलदीप नारायण, थानाध्यक्ष शिवशंकर शुक्ला व उप निरीक्षक रूपेंद्र गौड़ की गवाही होनी है। 

Edited By: Prateek Gupta