आगरा, जागरण संवाददाता। आगरा की एक मां 365 दिन से अपने कलेजे के टुकड़े के घर लौटने की आस में दरवाजे पर बैठी है। सुबह होते ही वह दरवाजे पर बैठ जाती है, गली में आने वाले हर शख्स को उम्मीद भरी नजरों से देखती है। शायद वह उनके बेटे की खबर लेकर आया हो। मां से क्रिकेट खेलने की कहकर बेटा घर से निकला था। इसके बाद नहीं लौटा, लेकिन मां काे उम्मीद है कि बेटा लौटने का वादा करके गया था। एक दिन वह जरूर लौटकर आएगा, उसे दरवाजे पर नहीं पाएगा तो नाराज हो जाएगा।

जगदीशपुरा के किशोरपुरा गली नंबर आठ निवासी ओमवीर सिंह मजदूरी करते हैं। उनका आठ वर्षीय बेटा अनिकेत एक साल पहले मां से रोज की तरह क्रिकेट खेलने की कहकर घर से गया था। मां शांता देवी के अनुसार यह अनिकेत का रोज का नियम था। वह उनसे कहकर क्रिकेट खेलने जाता था। इसके बाद लौटकर खाना खाता था। उस दिन भी जब वह घर से निकला तो उन्हें नहीं मालूम था कि बेटा लौटकर नहीं आएगा। कई घंटे बाद भी अनिकेत नहीं लौटा तो परिवार के लोगों ने उसकी तलाश शुरू कर दी।

उसके साथ खेलने वाले बच्चों से अनिकेत के बारे में जानकारी की तो उन्होंने अनभिज्ञता जताई। बेटे के साथ अनहोनी की आशंका पर उन्होंने थाने पर जाकर उसकी रिपोर्ट दर्ज करा दी। मगर, पुलिस ने उसकी तलाश में गंभीरता नहीं दिखाई। परिवार के लोग अनिकेत को अपने स्तर से तलाश तलाशते रहे। इसमें उनकी जमा पूंजी खत्म हो गई। इधर, बेटे के लौटने का इंतजार पहले दिन से सप्ताह और महीनों से अब साल में बदल चुका है। मां शांता देवी बेटे का नाम जुबां पर आते ही रोने लगती है। मां का कहना है कि वह उनका बेटा किन्हीं गलत हाथों में पड़ गया है। पुलिस उनके बेटे की बरामदगी में लापरवाही दिखा रही है। 

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