आगरा, जागरण संवाददाता। उप्र माध्यमिक शिक्षा विभाग (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल-इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा सिर्फ विद्यार्थी ही नहीं, जिला विद्यालय निरीक्षक के भाग्य का भी फैसला करेगी। इसमें जिले के प्रदर्शन के आधार पर ही अधिकारियों की ग्रेडिंग तय होगी। यह कहना था अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला का।उन्होंने शुक्रवार को प्रदेशभर के शिक्षाधिकारियों की वीडियो कांफ्रेंसिंग से बैठक ली। उनका कहना था कि सभी जिला विद्यालय निरीक्षक नकल विहीन परीक्षा कराने के साथ बेहतर परिणाम लाने पर ध्यान दें। इसके आधार पर ही प्रदेशभर के जिला विद्यालय निरीक्षकों की ग्रेडिंग तय होगी। इसमें समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (आइजीआरएस) और कोर्ट में लंबित मामलों का तेजी से निस्तारण करने से उनकी मैरिट में सुधार होगा। लिहाजा अधिकारी नकल विहीन परीक्षा कराने पर पूरा ध्यान दें और शासन की मंशा के अनुरूप पारदर्शी तरीके से परीक्षा कराकर निष्पक्ष रिजल्ट जारी कराने में मदद करें। वीडियो कांफ्रेंसिंग में आगरा से मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक डा. मुकेश अग्रवाल और जिला विद्यालय निरीक्षक मनोज कुमार शामिल हुए।

इन बिंदुओं की मांगी जानकारी

− बिना बाउंड्रीवाल व खेल के मैदान समतलीकरण की जरूरत वाले राजकीय विद्यालयों की सूची।

- 50 वर्ष पूर्व से संचालित राजकीय विद्यालय की सूची (स्थापना वर्ष सहित एवं उनके भवन की स्थिति।

- पिछले तीन वर्ष में किए गए नियमित निरीक्षण की संख्या व उनकी निरीक्षण आख्या के अनुपालन की स्थिति।

- अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड से चयनित अभ्यर्थियों के शैक्षिक प्रमाण पत्र सत्यापन व वेतन भुगतान की स्थिति।

 

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