आगरा, जागरण संवाददाता। केंद्रीय सचिव आवास एवं शहरी मंत्रालय दुर्गा शंकर मिश्रा आगरा पहुंच चुके हैं। शनिवार सुबह 10:30 बजे नगर निगम स्थित स्मार्ट सिटी कार्यालय में आगरा मेट्रो स्मार्ट सिटी, अमृत योजना की समीक्षा करेंगे। केंद्रीय सचिव दोपहर बाद विभिन्न योजनाओं का निरीक्षण करेंगे। सचिव के आगमन को देखते हुए नगर आयुक्त निखिल टीकाराम सहित अन्य अधिकारियों ने निगम परिसर का निरीक्षण पूर्व में ही कर लिया था। 

इन समस्याओं को छुपाएंगे कैसे 

ताजनगरी बदहाल है। यहां की सड़कें न तो गड्ढामुक्त हुई हैं और न ही डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन ठीक से हो रहा है। प्लानिंग में एडीए पूरी तरह से फेल है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोक निर्माण विभाग नई सड़क की मरम्मत या फिर निर्माण नहीं करा रहा है। हाल यह है कि बिना प्लानिंग के मुख्य सड़कों और गलियों की खोदाई चल रही है। इससे जाम लग रहा है और हजारों लोगों को हर दिन परेशान होना पड़ता है। 

लड़खड़ाया डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन

डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन में 22.65 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। चार कंपनियों के खिलाफ हरीपर्वत थाना में मुकदमा दर्ज है। शहर के सौ वार्ड में कूड़ा कलेक्शन ठीक से नहीं हो रहा है।

गरीबों के नहीं बने आवास

पीएम शहरी आवास योजना में शहर में दस हजार आवास बनने थे। तदर्थ रोक और यथास्थिति के चलते एक भी आवास नहीं बना है।

ई- टेंडरिंग लागू फिर भी नहीं रुकी पूलिंग

नगर निगम, एडीए, लोक निर्माण विभाग सहित अन्य पर ई-टेंडङ्क्षरग लागू की है। इसके बाद भी टेंडर पूलिंग नहीं रुकी है।

आगरा मेट्रो प्रोजेक्ट 

प्रोजेक्ट पर कुल 8379 करोड़ रुपये खर्च होंगे। तीस किमी लंबा टै्रक बिछेगा। तीस स्टेशन बनेंगे। अब तक 275 करोड़ रुपये रिलीज हो चुके हैं। पीएसी ग्राउंड में बेरीकेडिंग की जा रही है। तीन स्टेशनों के टेंडर हो चुके हैं।

स्मार्ट सिटी के कार्यों की रफ्तार धीमी

एक हजार करोड़ रुपये से ताजगंज व उसके आसपास के नौ वार्डों को स्मार्ट तरीके से विकसित किया जा रहा है। फतेहाबाद रोड पर 105 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। वहीं पूरे शहर को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया जा रहा है। नगर निगम स्थित स्मार्ट सिटी कार्यालय में सेंट्रल कमांड कंट्रोल सेंटर बनाया जा रहा है। कार्य की धीमी रफ्तार है।

परेशान कर रहे गड्ढे

प्रदेश सरकार ने 15 अक्टूबर तक शहर की सड़कों को गड्ढामुक्त करने के आदेश दिए थे लेकिन नगर निगम ने सड़कों की मरम्मत का कार्य शुरू किया है।

अवैध निर्माण पर नहीं लगा अंकुश

एडीए अवैध निर्माण को रोकने में नाकाम साबित हुआ है। प्रदेश में गोरखपुर के बाद आगरा दूसरा शहर है, जहां 27 हजार के करीब अवैध निर्माण हैं।

उफान मार रहा सीवर

संजय प्लेस हो या फिर आवास विकास और जयपुर हाउस। कई दशक से सीवर की समस्या है जिसका निस्तारण आजतक नहीं किया गया है।

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