आगरा, निर्लोष कुमार। 'गर फिरदौस बर रुए जमीं अस्त, हमीं अस्तो, हमीं अस्तो, हमीं अस्त'। मुगल शहंशाह जहांगीर ने कश्मीर की खूबसूरती पर फना होकर फारसी में यह बात कही थी। इसका मतलब है कि धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है तो यहीं हैं, यही हैं और सिर्फ यहीं पर है। धरती की 'जन्नत' कश्मीर से आगरा का भी वर्षों पुराना नाता है। आगरा किला में नूरजहां द्वारा अंगूरी बाग के लिए कश्मीर से ही मिट्टी मंगवाई गई थी।

आगरा को राजधानी बनाने वाले मुगल शहंशाह अकबर ने वर्ष 1565 से 1573 के बीच आगरा किला का जीर्णोद्धार कराते हुए यहां कई भवन बनवाए थे। इस किले में बाद में जहांगीर, शाहजहां, औरंगजेब और ब्रिटिश काल तक निरंतर काम होते रहे हैं। जहांगीर के समय चूने के सफेद प्लास्टर का काम हुआ तो शाहजहां ने सफेद संगमरमर के भवन बनवाए। औरंगजेब ने किले के बाहर दूसरी खाई बनवाई। ब्रिटिश काल में कई पुराने भवनों को तोड़कर बैरक बना दिए गए। मुगल शहंशाह जहांगीर अधिकांश समय कश्मीर एवं लाहौर में रहा, लेकिन आगरा की नियमित यात्राएं करता रहा। आगरा आने पर वो आगरा किला में ही रुकता था। यहां उसने न्याय की जंजीर भी लगवाई थी। उसकी बेगम मुगल साम्राज्ञी नूरजहां ने आगरा किला में खास महल के सामने अंगूरी बाग बनवाया था। इसके लिए कश्मीर से मिट्टी मंगवाई गई थी। बाग की खासियत यह है कि इसे षटकोण के डिजाइन में रेड सैंड स्टोन से कई भागों में बांटा गया है। एप्रूव्ड टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन के अध्यक्ष शमसुद्दीन खान बताते हैं कि जहांगीर सुरा प्रेमी था। अागरा किला में नूरजहां ने जहांगीर के लिए बाग बनवाकर अंगूर की बेल लगवाई थीं। अंगूरों की बेल लगी होने से यह अंगूरी बाग के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

अकबर के समय कश्मीर से जुड़े रिश्ते

आगरा के कश्मीर से रिश्ते मुगल शहंशाह अकबर के समय जुड़े थे। साम्राज्य का विस्तार करते हुए वर्ष 1586 में अकबर ने कश्मीर को मुगल साम्राज्य में मिलाया था। उसने कश्मीर की तीन यात्राएं 1589, 1592 और 1597 में की थीं। जहांगीर के समय तो कश्मीर मुगल साम्राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी बना रहा। उसने वहां बाग लगवाए। शाहजहां ने भी वहां किले, बाग और इमारतें बनवाई थीं। कश्मीर वर्ष 1753 तक मुगल साम्राज्य में शामिल रहा।

वर्ष 2003 में मिली थी मूल संरचना

पदमश्री केके मोहम्मद द्वारा अंगूरी बाग में वर्ष 2003 में (आगरा सर्किल के तत्कालीन अधीक्षण पुरातत्वविद) खोदाई कराई गई थी। उस समय उद्यान शाखा को यहां काम करना था। तब बाग में खोदाई कर यह देखा गया था कि इसके नीचे कोई संरचना तो नहीं है। खोदाई में नीचे बाग की मूल संरचना मिली थी। ब्रिटिश काल में उसी पैटर्न को अपनाते हुए बाग लगवा दिया गया था।

 

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