आगरा, जागरण संवाददाता। जिले में आलू की जमकर कालाबाजारी हो रही है और जिम्मेदारों ने आंखें मूंद रखी है। 40 फीसद शीतगृह में बचा हुआ आधे से ज्यादा आलू व्यापारियों का है। कुल 286 शीतगृह में से 126 ने तो हिसाब ही नहीं दिया है। इनको शनिवार को नोटिस भेजा जाएगा और व्यापारियों का आलू भंडारित करने वाले शीतगृह को नोटिस देकर उनसे इसका कारण पूछा जाएगा। अभी तक निकासी के क्या प्रयास किए गए ये भी पूछा जाएगा।

जिले में आलू की उपलब्धता भरपूर हैं, लेकिन निकासी कम होने के कारण दाम बढ़ते जा रहे हैं। अधिकतर किसानों ने फसल पर आलू बेच दिया है, जिसे व्यापारियों ने भंडारित कर रखा है। दाम में उछाल पैदा करने के लिए निकासी धीमी गति से की जा रही है। ऐसे में थोक मंडी में मांग के अनुसार आपूर्ति चौथाई हो रही है। शासन ने भंडारण से कालाबाजारी पैदा करने की आशंका जताते हुए 31 अक्टूबर तक शीतगृह संचालन की अंतिम तिथि निर्धारित की है। उप निदेशक उद्यान कौशल कुमार ने बताया कि आलू के दामों में उछाल का कारण कालाबाजारी माना जा रहा है। भंडारण कर कृत्रिम मंहगाई पैदा नहीं की जा रही हो इसके लिए डाटा मांगा गया था। 126 शीतगृह ने डाटा नहीं दिया है, उनको नोटिस भेजा जा रहा है। ऐसे शीतगृह जिनके यहां व्यापारियों का आलू भंडारित है, उन्हें भी नोटिस जारी किया जा रहा है। उनसे पूछा जा रहा है कि निकासी के लिए क्या प्रयास किए गए हैं।

 

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस