आगरा, अली अब्‍बास। यदि आप से कोई सरकारी कर्मचारी घूस की डिमांड कर रहा है तो अब आसानी से आप उसे पकड़वा सकते हैं। आपका नाम भी सामने नहीं आएगा, चेहरा तो बहुत दूर की बात है। बस एक फोन करना है और एंटी करप्‍शन टीम अपना काम करेगी। भ्रष्टाचार और घूसखोरी पर शिकंजा कसने के लिए सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) मुख्यालय ने इस वर्ष जून में हेल्पलाइन नंबर जारी किया था। विजिलेंस की भ्रष्टाचार के खिलाफ यह मुहिम कारगर साबित होती दिखाई देने लगी है। चार महीने के दौरान आगरा परिक्षेत्र में आने वाले आठ जिलों की सात शिकायतें हेल्पलाइन नंबर पर की गयी हैं। मुख्यालय ने इन शिकायतों की गोपनीय जांच आगरा विजिलेंस को सौंपी है।

विजिलेंस मुख्यालय द्वारा हेल्पलाइन नंबर जारी करने का उद्देश्य घूसखोरी और भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसना है। विभागों के अधिकारी और कर्मचारी लोगों से काम करने के बदले घूस मांगते हैं। कई बार घूस मांगने वाले के खिलाफ पीड़ित कार्रवाई करना चाहता है। उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कराके सबक सिखाना चाहता है। मगर, वह उसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहां और किस विभाग में जाए, किससे इसकी शिकायत करे। उसे जानकारी नहीं होती है। मगर, हेल्पलाइन नंबर पर वह सीधे मुख्यालय में अपनी शिकायत कर सकता है।

आगरा परिक्षेत्र में चार महीने के दाैरान हेल्पलाइन नंबर पर सात शिकायतें की गयी हैं। यह शिकायतें अलग-अलग विभागों की हैं। इनमें दो शिकायत आगरा की हैं, बाकी परिक्षेत्र में आने वाले अन्य जिलों की हैं। एसपी विजिलेंस रवि कुमार निम ने बताया इन शिकायतों की गोपनीय जांच की जा रही है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी हेल्पलाइन नंबर की मुख्य बातें

- विजिलेंस ने जून में भ्रष्टाचार की शिकायत करने को हेल्पलाइन नंबर 9454401866

- हेल्पलाइन पर सुबह दस से शाम छह बजे तक शिकायत की जा सकती है।

- सोमवार से शुक्रवार तक हेल्पलाइन नंबर काम करता है।

- फोन पर विजिलेंस विभाग का अधिकारी आपकी शिकायत सुनेगा और उस पर संज्ञान लेगा।

- शिकायत करने वाला यदि चाहे तो उसका नाम-पता गोपनीय रखा जाता है।

- शिकायतकर्ता का मोबाइल नंबर साक्ष्यों या अन्य जानकारी के लिए जांच अधिकारी को दिया जाता है। जांच अधिकारी शिकायत करने वाले का नाम नहीं खोलता।

- जिस विभाग, अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ शिकायत होती है, उसकी गोपनीय जांच की जाती है।

- जांच अधिकारी अपनी रिपोर्ट एसपी विजिलेंस को देता है, इसके बाद इसे मुख्यालय भेजा जाता है।

- तथ्यों के आधार पर मुख्यालय यह तय करता है कि खुली जांच कराई जाए या नहीं।

 

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