आगरा, जागरण संवाददाता। सीबीएसई, आईसीएसई और यूपी बोर्ड की तर्ज पर ही इस साल आंबेडकर विवि के विद्यार्थी भी 25 से 30 प्रतिशत तक कम पाठ्यक्रम पढ़ेंगे। पाठ्यक्रम में कटौती की मांग पर विवि गंभीरता से विचार कर रहा है। सिलेबस कम करने के लिए कमेटी का गठन कर योजना बनाई जाएगी। सत्र के अंत में मुख्य परीक्षाओं में भी वस्तुनिष्ठ प्रश्न ज्यादा करने पर विचार किया जा रहा है। इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भी भेजा जाएगा।

कोरोना के कारण इस साल सत्र देरी से शुरू हो रहा है। अभी तो प्रवेश प्रक्रिया ही चल रही है। यूजीसी और शासन के निर्देशों के अनुसार इस साल प्रथम व द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को प्रमोट किया जाएगा और अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को परीक्षा देनी होगी। अंतिम वर्ष की परीक्षाएं सितंबर में कराने के निर्देश शासन द्वारा दिए गए हैं। अक्तूबर से स्नातक और एक नवंबर से परा स्नातक कक्षाएं शुरू करने के भी निर्देश हैं। शासन द्वारा भेजे गए कैलेंडर के अनुसार मार्च से परीक्षाएं होनी हैं। विवि द्वारा निर्देशानुसार ही काम किया जा रहा है, पर अक्तूबर-नवंबर से पढ़ाई और मार्च में परीक्षा कराने के निर्देश पर शिक्षक और विवि प्रशासन भी हैरान है। कम समय में पूरा पाठ्यक्रम पढ़ाकर, परीक्षा लेना मुमकिन ही नहीं है।

हर यूनिट से हो कटौती

औटा महामंत्री डा. निशांत चौहान ने कुलपति के सामने 25 से 30 प्रतिशत तक पाठ्यक्रम में कटौती का प्रस्ताव भी रखा है। डा. चौहान का कहना है कि पाठ्यक्रम में से यूनिट खत्म नहीं की जा सकती हैं, इसलिए बेहतर होगा कि हर यूनिट से पांच से सात प्रतिशत की कटौती की जाए। इससे विद्यार्थियों पर दबाव भी कम आएगा और आसानी से पाठ्यक्रम भी पूरा हो जाएगा।

अॉनलाइन शिक्षण आसान नहीं

शासन द्वारा स्कूलों की तरह ही कालेजों और आवासीय परिसर के विभागों में भी अॉनलाइन शिक्षण पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि आगरा के कालेजों में ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा है, एेसे में अॉनलाइन शिक्षण में काफी दिक्कतें आती हैं। कुलपति प्रो. अशोक मित्तल भी कई बार अॉनलाइन शिक्षण के बारे में अपने स्पष्ट विचार रख चुके हैं कि वे इसके समर्थन में नहीं हैं। हालांकि विवि के शिक्षकों द्वारा विवि की वेबसाइट पर लगातार ई-लेक्चर्स अपलोड किए जा रहे हैं।

वस्तुनिष्ट प्रश्नों की बढ़ेगी संख्या

नई शिक्षा नीति में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में अगले साल मुख्य परीक्षाओं में वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की संख्या ज्यादा रखने पर भी विचार किया जा रहा है। इससे मूल्यांकन में भी आसानी होगी। विवि द्वारा पिछले कई सालों से कुछ विषयों में वस्तुनिष्ठ प्रश्न का प्रतिशत ज्यादा रखा जाता है, पर अब इस प्रतिशत को बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।

विवि स्तर पर हम कमेटी का गठन कर पाठ्यक्रम में कटौती कैसे की जा सकती है, इस पर प्रस्ताव तैयार करवाएंगे। इस प्रस्ताव के आधार पर ही शासन को सुझाव भेजा जाएगा। पाठ्यक्रम में कटौती का अंतिम फैसला शासन द्वारा ही लिया जाएगा।

- प्रो. अशोक मित्तल, कुलपति 

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