नई दिल्ली, जेएनएन। भारतीय टेनिस स्टार सानिया मिर्जा ने खेलों में महिलाओं की कामयाबी को सराहा है। उनका कहना है आज भी माता पिता बेटियों को डॉक्टर और वकील बनाना चाहते हैं लेकिन एथलीट के तौर पर देखना पसंद कम ही पसंद करते हैं। महिलाएं खेलों में आगे बढ़ी हैं लेकिन फिर भी ऐसा सोच नहीं हुई कि वो सिर्फ खिलाड़ी बनने का सोच सकें।

6 बार की ग्रैंड स्लैम विजेता सानिया ने इस बात पर जोर दिया कि माता पिता अभी भी बेटियों खिलाड़ी बनाने को पहली प्रथमिकता नहीं दे पाते हैं। "मुझे इस बात को देखकर बहुत गर्व होता है क्रिकेट के बाहर भी खेलों के बाहर बड़े सितारे महिलाएं हैं। अगर आप पत्रिका और पोस्टर देखें तो आपको महिला खेल स्टार नजर आएंगे। यह एक बहुत ही बड़ा कदम है मुझे पता है यह काफी मुश्किल है एक महिला होकर खेल जगत में आगे बढ़ना। "

"यह इस बात का इशारा है कि अब चीजें बदल गई है लेकिन अब भी हम उस जगह से कोसों मीलों दूर हैं जहां एक लड़की बॉक्सिंग ग्ल्ब्स या फिर बैडमिंटन रैकेट उठाए या फिर कहे की मैं पहलवान बनना चाहती हैं, यह अभी भी साधारण बात नहीं हैं। यह एक बेहद स्वभाविक विकास होना चाहिए।"

बेटी को आज भी माता-पिता एथलीट नहीं बनाना चाहते

"खेल की भावना दुनिया के इस भाग में माता पिता के अंदर स्वभाविक तौर पर नहीं आता है। वो चाहते हैं कि उनकी बेटी डॉक्टर, वकील, टीचर बनें लेकिन कोई एथलीड ना बने। पिछले 20-25 सालों में चीजें बदली हैं तबसे अब तक जब मैंने टेनिस खेलना शुरू किया फिर भी अभी काफी लंबा सफर तय करना है।"

 

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