अलर्ट: फोन फ्रीज होने को न समझें मामूली खराबी, हो सकता है बड़ा UPI फ्रॉड
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने एक नए UPI फ्रॉड के प्रति आगाह किया है, जहाँ फोन का फ्रीज होना उपयोगकर्ताओं को ...और पढ़ें

अलर्ट: फोन फ्रीज होने को न समझें मामूली खराबी, हो सकता है बड़ा UPI फ्रॉड

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। अगर आपका फोन भी सोशल मीडिया पर किसी विज्ञापन या अनजान लिंक पर क्लिक करने के बाद फ्रीज हो गया है, तो इसे सिर्फ एक नॉर्मल समस्या समझना आपको बड़ी मुश्किल में डाल सकता है। जी हां, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स ने एक नए तरह के डिजिटल फ्रॉड को लेकर अलर्ट दिया है, जिसमें फोन का फ्रीज होना असली अटैक नहीं बल्कि लोगों को घबराने और जाल में फंसाने का तरीका हो सकता है। चलिए जानते हैं कैसे...
ऐसे शुरू होता है स्कैम
दरअसल इस स्कैम में ठग फर्जी एरर मैसेज, पॉप-अप एड्स या नकली कस्टमर केयर कॉल के जरिए यूजर को पहले तो विश्वास दिलाते हैं कि उनके मोबाइल, बैंकिंग एप या UPI अकाउंट में कोई गंभीर समस्या आ गई है। अब इसके बाद उन्हें रिवॉर्ड, कैशबैक, वेरिफिकेशन या सर्विस एप के नाम पर एक खतरनाक APK डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है।
NDTV के मुताबिक, Quick Heal Technologies के CEO हरीश कुमार ने बताया कि मोबाइल का फ्रीज होना अक्सर असली घटना नहीं बल्कि यूजर का ध्यान भटकाने का एक तरीका हो होता है। जब एक बार मोबाइल में मालिशियस एप इंस्टॉल हो जाता है तो बाद में वो Accessibility, नोटिफिकेशन, SMS और अन्य सेंसिटिव परमिशन का गलत यूज कर सकता है।
रीड कर लेते हैं नोटिफिकेशन
साइबर अपराधी इन परमिशन के जरिए OTP और नोटिफिकेशन रीड कर लेते हैं, स्क्रीन पर होने वाली एक्टिविटीज को मॉनिटर कर सकते हैं और कुछ मामलों में तो डिवाइस को कंट्रोल तक करने की कोशिश कर सकते हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके लिए ठगों को UPI की सिक्योरिटी या एन्क्रिप्शन ब्रेक करने की भी जरूरत नहीं पड़ती। स्कैमर्स अक्सर फोन, यूजर की डिटेल्स और ट्रांजैक्शन प्रोसेस को ही टारगेट करते हैं।
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