जंग के बीच यूक्रेन में Starlink हुआ ठप! क्या मस्क की सैटेलाइट सर्विस भारत की सुरक्षा के लिए बन सकती है बड़ा रिस्क?
भारत में एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस Starlink की एंट्री को लेकर चल रही बहस के बीच एक बड़ा ...और पढ़ें
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मस्क की सैटेलाइट टेक्नोलॉजी पर कितना भरोसा सुरक्षित?
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। भारत में एलन मस्क द्वारा Starlink को देश में लाने की पुरजोर कोशिशों पर चल रही तीखी बहस को एक बड़ी चेतावनी भरी सीख मिली है। दरअसल, यूक्रेन ने बुधवार को रिपोर्ट किया कि Starlink टर्मिनल्स पर अचानक लगी पाबंदियों की वजह से उसकी मिलिट्री यूनिट्स को भारी रुकावटों का सामना करना पड़ा है, जिससे जंग के मिशनों में इस्तेमाल होने वाली हाई-स्पीड कनेक्टिविटी पर बुरा असर पड़ा है।
TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेनी अधिकारियों और विश्लेषकों का आरोप है कि Starlink पर लगाई गई ये पाबंदियां वाशिंगटन (अमेरिका) के उस दबाव से जुड़ी हो सकती हैं, जिसमें यूक्रेन को रूसी तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले रोकने को कहा जा रहा था। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को वेपन टेक्नोलॉजीज पर सलाह देने वाले मिलिट्री एक्सपर्ट सेरही बेस्क्रेस्टनोव ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'साफ तौर पर, ये कार्रवाई कोई इत्तेफाक नहीं हो सकती और ये मौजूदा राजनीतिक हालात से जुड़ी हुई है।' ये बात तब सामने आई जब कई अमेरिकी सांसदों और यूरोपीय नेताओं ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि राष्ट्रपति ट्रंप मॉस्को से डीजल खरीदने की डील का एलान करके कीव (यूक्रेन) को मुश्किल में छोड़ते दिख रहे हैं।
SpaceX द्वारा ऑपरेट किया जाने वाला Starlink एक सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क है, जो दूरदराज के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में हाई-स्पीड, लो-लेटेंसी ब्रॉडबैंड इंटरनेट की सुविधा देता है। खासतौर पर जहां ट्रेडिशनल केबल या फाइबर-ऑप्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद नहीं है या भरोसेमंद नहीं है। मस्क और उनकी कंपनी SpaceX ने यूक्रेन को बेमिसाल सर्विस दी थी, जहां रूसी हमले के कुछ ही दिनों के भीतर देश में Starlink सर्विस एक्टिवेट कर दी गई थी ताकि जंग के दौरान अस्पताल, इमरजेंसी सर्विसेज और सरकारी दफ्तर ऑनलाइन जुड़े रह सकें।
कुछ आंकड़ों के मुताबिक, यूक्रेन के पास अब 50,000 से ज्यादा Starlink टर्मिनल्स हैं।
यूक्रेनी अधिकारी अब SpaceX पर आरोप लगा रहे हैं कि उसने दूसरे प्रभावों के अलावा उनके ड्रोन मिशनों को भी पंगु बना दिया है। हालांकि, मस्क का बचाव करने वालों का कहना है कि ये पाबंदियां केवल मिलिट्री-ग्रेड 'Starshield' को प्रभावित करती दिखती हैं, जिसे अमेरिकी सरकार ऑपरेट करती है और जो SpaceX के सीधे नियंत्रण में नहीं है। इस खबर के लिखे जाने तक ट्रंप प्रशासन और Starlink ने इन आरोपों का कोई जवाब नहीं दिया था, लेकिन ये संभावना ही भारत के सामने उस दुविधा को दिखाती है कि वह खुद को एक ऐसी टेक्नोलॉजी के लिए खोले जो एक विदेशी कंपनी और वह भी एक राजनीतिक झुकाव रखने वाले शख्स द्वारा नियंत्रित है और किसी दूसरे देश के राजनीतिक और रेगुलेटरी सिस्टम के तहत काम करती है।
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मस्क द्वारा भारतीय बिजनेस पर अपने एकाधिकार की रक्षा के लिए उनकी एंट्री रोकने का आरोप लगाने के बाद से Starlink एक विवादित मुद्दा बन गया है, जिसमें उन्होंने इशारों-इशारों में रिलायंस जियो के चेयरमैन मुकेश अंबानी को निशाना बनाया था। हालांकि, भारत ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया है कि उसका रेगुलेटरी फ्रेमवर्क भेदभावपूर्ण है। Starlink ने जरूरी लाइसेंस और मंजूरियां हासिल कर ली हैं, लेकिन कमर्शियल ऑपरेशन्स शुरू करने से पहले कथित तौर पर सिक्योरिटी क्लीयरेंस और स्पेक्ट्रम आवंटन का इंतजार किया जा रहा है।
तक्षशिला इंस्टीट्यूशन द्वारा इसी साल अप्रैल में जारी की गई रिपोर्ट 'Starlink and Risks for India' में ठीक इसी बिंदु को उठाया गया था: कनेक्टिविटी और डेटा सिक्योरिटी पर विदेशी नियंत्रण और किसी विदेशी प्राइवेट ऑपरेटर पर निर्भर रहने से पैदा होने वाली कमजोरी।
बुधवार के घटनाक्रम से पहले ही, इस रिपोर्ट में नोट किया गया था कि संघर्षों के दौरान (जैसे यूक्रेन में) Starlink की सर्विस उपलब्धता में बदलाव या पाबंदियां लगाई गई थीं या सिविल अनरेस्ट (जैसे ईरान में) के दौरान सरकारी पाबंदियों को बायपास करने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया था। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि किसी संकट के समय किसी विदेशी कंपनी का फैसला, टेक्निकल खराबी या बाहरी दबाव भारत में बेहद जरूरी कम्युनिकेशन्स को ठप कर सकता है।
कीव के लिए, इस घटना की टाइमिंग इससे ज्यादा खराब नहीं हो सकती थी। रूस ने इसी हफ्ते यूक्रेनी ठिकानों पर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन हमले किए, जिससे ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा और लगभग 6,00,000 लोग बिना बिजली के रह गए। देश भारी बमबारी के बीच एक और कड़कड़ाती ठंड की ओर बढ़ रहा है, उसका एयर डिफेंस सिस्टम भारी दबाव में है और राष्ट्रपति ट्रंप जंग खत्म करने की कोशिश में साफ तौर पर कीव पर शिकंजा कसते दिख रहे हैं, भले ही वह रूस की शर्तों पर ही क्यों न हो।
