ब्रह्मानंद मिश्र। स्मार्टफोन के एक नये माडल पर 70 प्रतिशत का डिस्काउंट आफर देखकर सूरज ने उसे बुक कर दिया। फोन रिसीव हुआ, तो वह डिफेक्टेड निकला। दरअसल, यह समस्या किसी एक व्यक्ति की नहीं है। ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में आनलाइन खरीदारी में कुछ एहतियात जरूरी है, अन्यथा हम भी आनलाइन धोखेबाजी का शिकार बन सकते हैं। त्योहारों का मौसम आते ही फ्लिपकार्ट, अमेजन, रिलायंस डिजिटल जैसी अनेक ई-कामर्स साइटों पर सीजनल सेल शुरू हो गया है। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए गैजेट्स से लेकर होम अप्लायंसेस तक तरह-तरह के डिस्काउंट, कैशबैक, एक्सचेंज आफर किए जाते हैं। लुभावने आफर्स के बीच खरीदारी को लेकर ग्राहकों के आकर्षण को देखते हुए स्कैमर्स भी सक्रिय हो जाते हैं। ग्राहकों को फंसाने के लिए वे नये-नये तरीके अपनाते हैं। यहां जानते हैं कुछ ऐसे जरूरी उपायों के बारे में, जिससे आप आनलाइन शापिंग के दौरान ठगी का शिकार होने से बच सकते हैं...

एनक्रिप्टेड वेबसाइट पर ही करें भरोसा

सस्ता सामान या डिस्काउंट आफर देखकर किसी भी रैंडम वेबसाइट से शापिंग न करें। आनलाइन शापिंग स्टोर के बारे में जानकारी जुटाएं कि वह विश्वसनीय है या नहीं। अगर गूगल सर्च में शापिंग साइट नहीं दिखती है, तो उस पर भरोसा न करें। दूसरी बात, यूआरएल की शुरुआत में लाक सिंबल और 'https' को जरूर देखें। इसका मतलब है कि आपके वेब ब्राउजर और वेबसाइट सर्वर के बीच कनेक्शन एनक्रिप्टेड है। केवल विश्वसनीय वाइ-फाइ नेटवर्क पर ही ट्रांसजैक्शन करें। इससे आपकी गोपनीय जानकारी सुरक्षित रहेगी।

निजी जानकारियों को न करें साझा

खरीदारी के अनुभव को अधिक व्यक्तिगत बनाने के लिए आनलाइन रिटेलर अतिरिक्त जानकारी मांगते हैं। लेकिन पेमेंट, शिपिंग एड्रेस, टेलीफोन नंबर और ई-मेल के अलावा अगर अन्य किसी तरह की जानकारी मांगी जाती है, तो उस साइट से कतई खरीदारी न करें। आनलाइन शापिंग के दौरान बैंक अकाउंट की जानकारी, ड्राइविंग लाइसेंस नंबर या आधार नंबर जैसी जानकारी नहीं दी जाती है। शापिंग से पहले कंपनी की प्राइवेसी पालिसी के बारे में जरूर पढ़ें। यह कन्फर्म करें कि क्या कंपनी आपकी जानकारियों को रिसेल, रेंट या किसी के साथ साझा करती है। उसी कंपनी पर भरोसा करें, जो आपकी गोपनीयता को बेहतर ढंग से सुरक्षित रखने का आश्वासन देती है।

प्रत्येक वेबसाइट के लिए हो यूनीक पासवर्ड

आमतौर पर लोग प्रत्येक आनलाइन साइट के लिए एक ही पासवर्ड का इस्तेमाल करते हैं। ऐसी भूल न करें। अगर पासवर्ड अलग-अलग होंगे, तो एक साइट से जानकारी लीक होने पर आपके दूसरे अकाउंट की जानकारी सुरक्षित रहेगी। शापिंग एकाउंट का पासवर्ड बनाते समय उसमें निजी जानकारियों को न डालें। पासवर्ड में लेटर, नंबर और सिंबल को शामिल करें। पासवर्ड कमजोर होने पर अकाउंट में सेंध लग सकती है।

न पड़ें ड्रीम डील और डिस्काउंट कूपन के फेर में

जब कोई सामान वास्तविक मूल्य से काफी कम और अविश्वसनीय कीमत पर आफर किया जा रहा हो, तो उस पर आंख बंद कर भरोसा न करें। जिस सामान को आप खरीदने जा रहे हैं, अलग-अलग स्रोतों से उसकी कीमत पता करें। त्योहारों के सीजन में हैकर्स फेक कोड के जरिए डिस्काउंट कूपन तैयार करते हैं। आकर्षक विज्ञापन से वे भारी छूट का दावा करते हैं। इस तरह के कोड से अगर आप शापिंग करते हैं, तो हैकर्स पल भर में आपके अकाउंट को खाली कर सकते हैं। हमेशा आनलाइन डिस्काउंट के झांसे में आने बचें।

अनजान लिंक या इंटरनेट मीडिया से न करें खरीदारी

त्योहार शुरू होते ही वाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर आपको ऐसी पोस्ट दिखने लगती हैं, जिन पर भारी डिस्काउंट के साथ आनलाइन शापिंग का आफर होता है। इस तरह के लिंक से फ्राड होने की संभावना अधिक रहती है। अगर उनसे खरीदारी करते भी हैं तो प्रोडक्ट की गुणवत्ता खराब होने पर रिटर्न करने में दिक्कत हो सकती है। हमेशा भरोसेमंद ई-कामर्स पोर्टल से ही शापिंग करें।

डेबिट कार्ड के इस्तेमाल से बचें

आनलाइन शापिंग में डेबिट कार्ड के इस्तेमाल से बचना चाहिए। चूंकि डेबिट कार्ड आपके बैंक अकाउंट से लिंक होते हैं। हैकर्स निजी जानकारियों को चुराकर आपकी फाइनेंशियल डिटेल को लीक कर सकते हैं। आनलाइन शापिंग में मास्टरकार्ड सिक्योर कोड या वेरिफाइड वीजा कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आप क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो जानकारी लीक होने पर भी बैंक एकाउंट सुरक्षित रहेगा। क्रेडिट कार्ड की जानकारी लीक होने पर इसे तुरंत बंद करा सकते हैं। खरीदारी के बाद क्रेडिट कार्ड का स्टेटमेंट जरूर चेक करें। इससे आप पता कर पाएंगे, कहीं छिपा हुआ चार्ज तो नहीं लगाया गया है।

आनलाइन फ्राड होने पर क्या करें

बढ़ते आनलाइन शापिंग ट्रेंड के साथ धोखाधड़ी, निजी जानकारियों में सेंध, दोषपूर्ण, गलत प्रोडक्ट की डिलीवरी जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। ऐसी स्थिति में कुछ उपायों को अपनाकर धोखाधड़ी का शिकार होने से बच सकते हैं :

  • उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 2019 के तहत ई-कामर्स कंपनियों को कस्टमर केयर नंबर जारी करना अनिवार्य किया गया है। ग्राहक इन नंबरों पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
  • ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि इंटरनेट प्लेटफार्म पर जाकर अपनी शिकायत को ई-कामर्स प्लेटफार्म और कंपनी प्रमुख के सोशल हैंडल को टैग करें। खरीदारी करते समय हुई धोखाधड़ी के बारे में वहां बताएं।
  • समाधान नहीं होने पर राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in/ पर जाकर धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कर सकते हैं। वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए कभी भी 1930 को डायल किया जा सकता है।
  • अगर ई-कामर्स कंपनी की तरफ से संतोषजनक कार्रवाई नहीं हो रही है, तो आनलाइन एफआइआर दर्ज कराएं और साइबर सेल में इसकी शिकायत करें।

Edited By: Sanjay Pokhriyal

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट