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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 18, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सुनने की क्षमता खत्म कर सकते हैं नॉइज कैंसिलिंग हेडफोन, युवाओं पर पड़ रहा बुरा असर

Published: Tue, 18 Feb 2025 04:29 PM (IST)

ब्रिटिश एकेडमी ऑफ ऑडियोलॉजी की उपाध्यक्ष क्लेयर बेंटन कहती हैं कि जब लोग ट्रेन या कार के हॉर्न जैसी बैकग्राउंड ...और पढ़ें

ANC हेडफोन युवाओं के दिमाग और कानों पर बुरा असर डाल रहे हैं। (AI- इमेज)
ANC हेडफोन युवाओं के दिमाग और कानों पर बुरा असर डाल रहे हैं। (AI- इमेज)

टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। अगर आप नॉइज कैंसिलिंग हेडफोन इस्तेमाल करना पसंद करते हैं तो आपको थोड़ा संभल जाने की जरूरत है। कई बार ऐसे हेडफोन यूज करना आपके कान और दिमाग के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। नॉइज कैंसिलिंग हेडफोन इस्तेमाल आजकल खूब हो रहा है। हेडफोन यूज करने वाले एक चौथाई लोग नॉइज कैंसलिंग वाले हेडफोन का इस्तेमाल करते हैं।

रिस्की हो सकता है ANC हेडफोन यूज करना

ANC हेडफोन युवाओं के दिमाग और कानों पर बुरा असर डाल रहे हैं। इससे युवाओं के बीच न्यूरोलॉजिकल समस्याएं बढ़ रही हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह के हेडफोन बाहरी आवाज को पूरी तरह से रोक देते हैं, जिसकी वजह से दिमाग की असल ध्वनि को पहचानने की क्षमता खत्म हो जाती है।

ऑडियोलॉजिस्ट के अनुसार, इन हेडफोन के इस्तेमाल से ऑडिटरी प्रोसेसिंग डिसऑर्डर (ऐपीडी) के मामले बढ़ रहे हैं। इस स्थिति में दिमाग को ध्वनियों और शब्दों को समझने में कठिनाई होती है।

बढ़ रहे हैं ऐसे मामले

ब्रिटिश एकेडमी ऑफ ऑडियोलॉजी की उपाध्यक्ष क्लेयर बेंटन कहती हैं कि जब लोग ट्रेन या कार के हॉर्न जैसी बैकग्राउंड नॉइज को पूरी तरह से ब्लॉक कर देते हैं, तो दिमाग धीरे-धीरे इन ध्वनियों को फिल्टर करने की काबिलियत खो देता है। नॉइज कैंसिलिंग हेडफोन पहनने से इंसान आर्टिफिशियल तरीके से बनाए गए एनवायरमेंट में होता है, जो ज्यादा देर तक उसके लिए सही नहीं है।

इस तरह के वातावरण में व्यक्ति को केवल वही सुनाई देता है, जिसकी उसके कानों का आदत लग चुकी है। इससे दिमाग को ध्वनियों को अलग-अलग पहचानने की मेहनत नहीं करनी पड़ती।

युवाओं में सुनने की समस्या बढ़ी

एक्सपर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ सालों में इस तरह के मामले बढ़े हैं। खासकर युवाओं में सुनने की समस्याओं के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। कई युवा एक्सपर्ट्स के पास सुनने की समस्या की शिकायत लेकर जाते हैं, लेकिन जांच में उनकी सुनने की क्षमता सामान्य पाई जाती है। असल में यह समस्या न्यूरोलॉजिकल है। दिमाग को ध्वनियों को समझने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे वे बातचीत करने और प्रोफेशनल या शैक्षणिक निर्देशों को समझने में मुश्किल महसूस करते हैं।

इंपीरियल कॉलेज हेल्थकेयर ट्रस्ट की ऑडियोलॉजी विशेषज्ञ अल्मेडा के अनुसार, दिमाग को विभिन्न प्रकार की ध्वनियों के संपर्क में लाना जरूरी है। इससे दिमाग महत्वपूर्ण और गैर-जरूरी ध्वनियों को अलग करने की क्षमता विकसित करता है।

छात्र-किशोर ज्यादा प्रभावित

न्यूरोलॉजिकल समस्याएं पहले बचपन में लगी चोट, संक्रमण या किसी बचपन की दिक्कतों की वजह से होती थीं। लेकिन अब एएनसी हेडफोन इसकी वजह बन रहे हैं। इससे छात्र-किशोर ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

क्या करें

  • आवाज को नियंत्रित रखें
  • ब्रेक लें
  • क्वालिटी हेडफोन का चयन करें
  • हाइफ्रिक्वेंसी और लोफ्रिक्वेंसी के बीच बैलेंस रखें
  • सुनने की स्थिति सही रखें

क्या न करें

  • बहुत तेज आवाज में गाने ना सुनें
  • स्मॉल इयरप्लग्स का इस्तेमाल ना करें
  • सोते वक्त हेडफोन ना पहनें
  • लंबे समय तक लगातार हेडफोन ना पहनें
  • बेहद तेज आवाज में गाने सुनने के बाद अचानक शांति में न बैठें

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