डिजिटल इंडिया से डीप टेक इंडिया तक, जानिए कैसे बदल रही देश की तस्वीर
भारत अब केवल तकनीक अपनाने वाला देश नहीं, बल्कि नवाचार का अग्रणी बन गया है।

डिजिटल इंडिया से डीप टेक इंडिया तक, जानिए कैसे बदल रही देश की तस्वीर

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। बीते कुछ दशकों में केवल तकनीक अपनाने की पहचान से अलग, भारत की छवि नवाचार के अग्रणी देश के रूप में बनी है। यह प्रतीकात्मक बदलाव भर नहीं है, बल्कि नई तकनीकों को समझने, विकसित करने और लागू करने की तरीके में मूल परिवर्तन भी आया है।
विविध क्षेत्रों में आज एआइ के बढ़ते उपयोग से लेकर ऊर्जा कुशल डाटा इन्फ्रास्ट्रक्चर, डिजिटलीकरण से बढ़ते वित्तीय समावेशन और इलेक्ट्रानिक्स मैनुफैक्चरिंग तक नए मुकाम हासिल किए जा रहे हैं। चलिए जानते हैं कुछ ऐसे ही क्षेत्रों के बारे में, जहां हो रही तकनीकी प्रगति देश की तरक्की नींव तैयार कर रही है...
डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं फिनटेक
बीते एक दशक की डीपीआई की यात्रा को देखें तो यह स्पष्ट है कि पब्लिक पालिसी, टेक्नोलॉजी और सामाजिक उद्देश्य संरेखित हों, तो कितना व्यापक बदलाव हो सकता है। आज बहुत ही सहज यूपीआइ पेमेंट से लेकर त्वरित केवाइसी सत्यापन तक, किस तरह डिजिटल सेवाओं ने आम भारतीयों की जिंदगी को आसान बनाया है।
इसे अगर आंकड़ों में समझें तो आज हर महीने 21 अरब से अधिक यूपीआइ ट्रांजैक्शन हो रहे हैं, लगभग 56 लाख जन-धन खाते खोले गए हैं, 1.3 अरब आधार नंबर जारी किए जा चुके हैं। इससे आम नागरिक भी आसानी से डिजिटल सेवाओं का लाभ उठा पा रहे हैं।
भारत का 'इंडिया स्टैक' डिजिटल समावेशन के लिए एक वैश्विक मॉडल बन गया है। वहीं आधार और डिजिलॉकर डिजिटल पहचान और पेपररहित गवर्नेंस को सुरक्षित व प्रभावी बना रहे हैं। ओएनडीसी के माध्यम से ई-कामर्स का सफल लोकतंत्रीकरण संभव हो पाया है।
सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रानिक्स मैनुफैक्चरिंग
पर्याप्त लागत, शोध एवं विकास और इकोसिस्टम नहीं होने के बावजूद देश में इलेक्ट्रानिक्स सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। साल 2024-25 में देश के इलेक्ट्रानिक्स सेक्टर 125 अरब डालर का हो गया, जो दशकभर पहले मात्र 21.4 अरब डालर का था। इसी तरह एक्सपोर्ट बास्केट में इलेक्ट्रानिक्स निर्यात की हिस्सेदारी तीन से बढ़कर 10 प्रतिशत हो गई है।

भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन का उत्पादक है। मोबाइल फोन के आयात पर हमारी निर्भरता लगभग खत्म हो गई है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत 76000 करोड़ के बजट के साथ 10 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। भारत की पहली 3डी ग्लास पैकेजिंग यूनिट अप्रैल 2026 में ओडिशा में शुरू की गई है, जो नेक्स्ट जेनरेशन टेक्नोलॉजी की दिशा में एक बड़ी कामयाबी है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
भारत एआइ के क्षेत्र में एक निर्णायक और आत्मविश्वास से पूर्ण छलांग लगाने की तैयारी में है। राष्ट्रीय पहल के तौर पर इंडियाएआइ मिशन की शुरुआत की गई है, जिसके तहत भारत में मजबूत एआइ इकोसिस्टम तैयार करने और एआइ की विविध क्षेत्रों में उपयोगिता बढ़ाने पर फोकस किया जा रहा है। इससे देश में शोधकर्ताओं और नवउद्यमियों को किफायती और उच्च प्रदर्शन वाले कंप्यूटिंग संसाधनों की सुविधा उपलब्ध हो रही है।
स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और कृषि के क्षेत्र में एआइ के प्रयोग की अपार संभावनाएं देखी जा रही हैं। एआइ कुशल पेशेवरों को तैयार करने के लिए शैक्षणिक स्तर पर व्यापक बदलाव हो रहे हैं, ताकि भविष्य की जरूरतों के हिसाब श्रमबल तैयार किया जा सके। भाषिणी जहां वॉइस फर्स्ट गवर्नेंस के तहत 22 भारतीय भाषाओं में सपोर्ट कर रहा है, तो वहीं किसान ई-मित्र किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान कर रहा है।
स्पेस टेक्नोलॉजी
किफायती और स्वदेशी तकनीक के जरिये भारत ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में खुद को एक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया है। चंद्रयान-3 और आदित्य एल1 सौर मिशन जैसी ऐतिहासिक उपलब्धियां अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत का आत्मविश्वास देती हैं।
सरकार ने इस क्षेत्र को निजी निवेश के लिए खोल दिया है, जिसके परिणामस्वरूप 400 से अधिक स्टार्टअप शुरू हुए हैं और नवाचार में वृद्धि हो रही है। नासा के साथ निसार जैसे संयुक्त मिशन, विशेष उपग्रह प्रौद्योगिकी में भारत की विशेषज्ञता को प्रदर्शित करते हैं।

इसरो ने दूसरी बार स्पेडेक्स सैटेलाइट (एसडीएक्स 01 और एसडीएक्स 02) की डाकिंग का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया, साथ ही दोनों सैटेलाइट के बीच पावर ट्रांसफर भी किया है। इन्हें पीएसएलवी सी60 मिशन द्वारा लांच किया गया था, जिससे भारत अंतरिक्ष में डाकिंग/अनडाकिंग का प्रदर्शन करने वाला चौथा देश बन गया है।
एक्सियम 4 मिशन में, गगनयात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर जाने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने, जहां उन्होंने सात माइक्रोग्रैविटी प्रयोग किए। इस सहयोग से प्रशिक्षण, क्रू वाले मिशन के समन्वय और आपातकालीन प्रतिक्रिया के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है।
स्टार्टअप इकोसिस्टम व डीपटेक
भारत अब दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक है। बीते एक दशक में स्टार्टअप इंडिया के जरिये भारत में आइडिएशन, फंडिंग, मेंटरशिप और स्केलअप तक एक मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार हुआ है। देश में स्टार्टअप की संख्या दो लाख से अधिक हो चुकी है।
एग्री टेक, टेलीमेडिसिन, माइक्रो फाइनेंस, एडटेक जैसे क्षेत्रों में हो रहे नवाचार से शहरी और ग्रामीण भारत के बीच अंतराल कम होता जा रहा है। नए डीप टेक स्टार्टअप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर केंद्रित होने के साथ स्पेस टेक, रोबोटिक्स और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्र में भी नवाचार की राह तैयार हो रही है।
