ईरान युद्ध के चलते भारत में अटका Elon Musk का Starlink? मीडिया रिपोर्ट के बाद कंपनी ने दी सफाई
Elon Musk की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस Starlink को लेकर एक बड़ी खबर आ रही है। एक तरफ जहां ब्लूमबर्ग की ...और पढ़ें
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SpaceX के मेगा IPO से पहले भारत में स्टारलिंक की मंजूरी को लेकर बढ़ा सस्पेंस।
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। भारत ने मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के दौरान सैटेलाइट टर्मिनल्स के इस्तेमाल से जुड़ी चिंताओं के कारण Starlink के कमर्शियल रोलआउट की अप्रूवल प्रोसेस को फिलहाल होल्ड पर रख दिया है। ये जानकारी एक रिपोर्ट के हवाले से मिली है। एलन मस्क के नेतृत्व वाली स्पेस-बेस्ड इंटरनेट सर्विस Starlink, SpaceX के बिजनेस और ग्रोथ का एक मुख्य जरिया है। SpaceX के लिए ये बेहद खास समय है क्योंकि कंपनी इस हफ्ते के अंत में अपने एंटीसिपेटेड इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए प्राइसिंग की अनाउंसमेंट करने वाली है। इस लिस्टिंग के अब तक के सबसे बड़े IPOs में से एक होने की संभावना है।
भारत में लॉन्चिंग के लिए फाइनल अप्रूवल का इंतजार कर रहा Starlink
इस मामले से वाकिफ लोगों का हवाला देते हुए ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के गृह मंत्रालय के तहत सुरक्षा एजेंसियों ने Starlink को देश में ऑपरेशन्स शुरू करने के लिए फाइनल क्लीयरेंस देने से रोक दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में आधिकारिक तौर पर लाइसेंस न होने के बावजूद Starlink टर्मिनल्स के इस्तेमाल की खबरें इस मंजूरी को रोकने की मुख्य वजह बनी हैं। इसने भारतीय अथॉरिटीज के बीच ये सवाल खड़ा कर दिया है कि जियोपॉलिटिकल तनाव के समय किसी अमेरिकी ऑपरेटर पर कितना कंट्रोल रखा जा सकता है।
ये झटका SpaceX के लिए एक नाजुक समय पर आया है, जो 12 जून को एक बड़ी शेयर बाजार लिस्टिंग की तैयारी कर रही है। इस लिस्टिंग से कंपनी की वैल्यू लगभग 1.75 ट्रिलियन डॉलर (करीब 1.67 लाख करोड़ रुपये) आंकी जा सकती है। Starlink, SpaceX के रेवेन्यू का एक प्राइमरी सोर्स है और भारत जैसे बड़े मार्केट में इसका धीमा पड़ना इसके ग्लोबल ग्रोथ प्लान्स को प्रभावित कर सकता है।
कहा जा रहा है कि इस देरी ने सरकार के सैटेलाइट स्पेक्ट्रम प्राइसिंग प्रपोजल को भी प्रभावित किया है, जो किसी भी कमर्शियल सर्विस को शुरू करने के लिए जरूरी है। डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन्स (DoT) ने इस फ्रेमवर्क को फाइनल कर लिया है, लेकिन इसे अभी तक कैबिनेट की मंजूरी के लिए नहीं भेजा गया है।
Starlink को करीब एक साल पहले भारत में ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट (GMPCS) लाइसेंस मिला था, लेकिन इससे कंपनी को केवल ऑपरेशन्स की तैयारी करने और एग्रीमेंट्स साइन करने की ही इजाजत मिली थी। सर्विसेज लॉन्च करने से पहले इसे अभी भी कई एडवांस्ड रेगुलेटरी और सिक्योरिटी क्लीयरेंस की जरूरत है।
इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडियन अथॉरिटीज पिछले साल से Starlink के सिक्योरिटी मेजर्स का रिव्यू कर रही हैं, लेकिन इसकी सिक्योरिटी क्लीयरेंस अभी पेंडिंग है। अथॉरिटीज ने कंपनी से ये साफ करने को कहा है कि अपने ग्लोबल फुटप्रिंट और अमेरिकी ओनरशिप को देखते हुए, वह भारतीय सुरक्षा जरूरतों के कंप्लायंस की गारंटी कैसे देगी, खासकर तब जब जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण विदेशी सरकारों की तरफ से अलग-अलग मांगें सामने आ सकती हैं।
स्टारलिंक ने दावों को बताया 'भ्रामक', दी सफाई
इस बीच, मीडिया रिपोर्ट्स पर प्रतिक्रिया देते हुए Starlink की बिजनेस ऑपरेशन्स वाइस प्रेसिडेंट लॉरेन ड्रायर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट को 'भ्रामक' बताते हुए कहा, 'Starlink भारत सरकार के साथ एक्टिव और प्रोडक्टिव बातचीत कर रही है। हमें भारत की कनेक्टिविटी प्रायोरिटीज, खास तौर पर दूरदराज के क्षेत्रों को मजबूत करने के लिए स्टारलिंक की कैपेबिलिटीज पर केवल एन्करेजिंग फीडबैक ही मिला है।'
Starlink remains in active and productive discussions with the Government of India contrary to misleading stories based upon unsubstantiated claims from anonymous sources.
— Lauren Dreyer (@LaurenDreyer) June 9, 2026
We have worked with the Government through all of the required regulatory and compliance processes in a… https://t.co/BQdcDHmPaf
उन्होंने आगे साफ किया कि कंपनी ने भारत की सॉवरेन टेक्नोलॉजी, रेगुलेटरी और सिक्योरिटी रिक्वायरमेंट्स के साथ तालमेल बिठाने के लिए एक खास बेस्पोक डिप्लॉयमेंट मॉडल तैयार किया है। इसके तहत भारतीय नियमों के मुताबिक, Starlink नेटवर्क के सभी यूजर ट्रैफिक को देश के भीतर स्थापित ग्राउंड इन्फ्रास्ट्रक्चर के जरिए ही रूट किया जाएगा।
मिली जानकारी के मुताबिक कंपनी इंडियन अथॉरिटीज के साथ मिलकर काम कर रही है और देश में करीब 10 गेटवे और मुंबई में एक हब सहित अपना इन्फ्रास्ट्रक्चर भी तैयार कर चुकी है। कंपनी के अधिकारियों ने लॉन्चिंग प्लान्स को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी अफसरों के साथ कई दौर की बैठकें भी की हैं। हालांकि, इस बढ़ी हुई जांच का असर रिलायंस जियो और एयरटेल जैसे घरेलू टेलीकॉम ऑपरेटर्स पर भी पड़ रहा है।
