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AI को लेकर Google के पूर्व CEO की चेतावनी, जब इंसानों को करना पड़ सकता है 'सिस्टम बंद'

Published: Sun, 20 Sep 2026 03:45 PM (IST)

Google के पूर्व CEO एरिक श्मिट ने AI के भविष्य को लेकर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि 5 सालों ...और पढ़ें

AI को लेकर Google के पूर्व CEO की चेतावनी, जब इंसानों को करना पड़ सकता है 'सिस्टम बंद'

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टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तेजी से अपनी कैपेबिलिटीज को बढ़ा रहा है। अब Google के पूर्व CEO Eric Schmidt ने AI के फ्यूचर को लेकर एक ऐसी संभावना जताई है, जिसने इस टेक्नोलॉजी के विकास और उसके कंट्रोल को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं। दरअसल, Schmidt के मुताबिक आने वाले करीब 5 सालों में AI सिस्टम इतने ज्यादा एडवांस हो सकते हैं कि इंसानों के लिए ये समझना मुश्किल हो जाए कि वे आपस में क्या कर रहे हैं।

मुश्किल काम भी AI आसानी से करेगा

इतना ही नहीं Eric Schmidt ने AI के विकास में तीन बड़े बदलाव भी बताए हैं। इनमें लंबे Context Windows, AI Agents और टेक्स्ट के जरिए सॉफ्टवेयर तैयार करने की पावर शामिल है। उनका कहना है कि इन तीनों तकनीकों के एक साथ आगे आने से AI सिर्फ सवालों के जवाब नहीं देगा, बल्कि बेहद मुश्किल समस्याओं को कई स्टेप्स में हल कर सकता है।

Schmidt ने इसे एक Recipe की तरह समझने की कसोशिश की है। पहले तो AI किसी समस्या को हल करने के लिए पहला स्टेप उठाएगा, उसके बाद रिजल्ट को समझेगा और फिर उसी रिजल्ट के बेस पर अगला कदम उठाएगा। इस तरह फ्यूचर में AI करीब 1,000 स्टेप वाले प्रोसेस को भी संभाल सकता है। इसका यूज साइंस, मेडिसिन, मटेरियल साइंस और क्लाइमेट रिसर्च जैसे एरिया में किया जा सकता है।

लाखों AI एजेंट्स करेंगे काम

Schmidt का कहना है कि AI एजेंट्स भी फ्यूचर में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अलग-अलग एजेंट्स किसी खास सब्जेक्ट पर काम कर सकते हैं, नए विचार बना सकते हैं और अपने रिजल्ट के बेस पर आगे सीख सकते हैं। साथ ही उन्होंने फ्यूचर में लाखों AI एजेंट्स के एक साथ काम करने की भी संभावना जताई है।

टेक्स्ट से बनेगा सॉफ्टवेयर

इतना ही ही नहीं तीसरा बदलाव AI की सॉफ्टवेयर बनाने की पावर में हो सकता है। यूजर सिर्फ टेक्स्ट फॉर्म में बताएगा कि उसे किस तरह का सॉफ्टवेयर चाहिए और AI उसके लिए जरूरी कोड लिख देगा। आगे चलकर AI लगातार किसी सॉफ्टवेयर को बेहतर बना सकता है।

हालांकि Schmidt ने सबसे ज्यादा चिंता उस संभावित स्थिति पर जताई जब कई AI एजेंट्स आपस में मिलकर काम करेंगे। ऐसे में संभव है कि ऐसी लैंग्वेज या कम्युनिकेशन सिस्टम विकसित हो सकता है जिसे इंसान आसानी से समझ नहीं सकेंगे।

इसी कॉन्टेक्स्ट में उन्होंने कहा है कि अगर इंसानों को ये समझ ही नहीं आया कि AI क्या कर रहा है, तो एक ऑप्शन सिस्टम को 'Pull the Plug' यानी बंद करना हो सकता है। हालांकि ये सिर्फ एक संभावित भविष्य की स्थिति है।

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