1 जनवरी से लागू होंगे सिम बाइंडिंग नियम, बिना सिम फोन में नहीं चलेंगे वॉट्सऐप जैसे एप्स
दूरसंचार विभाग (DoT) ने मैसेजिंग और कम्युनिकेशन ऐप्स के लिए 1 जनवरी 2027 से SIM-बाइंडिंग नियम अनिवार्य किए हैं, जिसका उद्देश्य ऑनलाइन घोटालों को रोकना है।

मैसेजिंग ऐप्स के लिए सिम बाइंडिंग नियम 2027 से लागू होंगे
HighLights
DoT ने मैसेजिंग ऐप्स के लिए SIM-बाइंडिंग नियम अनिवार्य किए।
ये नियम 1 जनवरी 2027 से लागू किए जाएंगे।
ऑनलाइन घोटालों को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया।
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन (DoT) ने मैसेजिंग और कम्युनिकेशन एप्स को 1 जनवरी, 2027 से SIM-बाइंडिंग नियमों का पालन करने का निर्देश दिया है। नियमों के तहत एप्स को सिम आधारित लॉगइन वेरिफिकेशन भी लागू करनी होगी। इसका उद्देश्य यूजर के अकाउंट को उसके रजिस्टर्ड भारतीय मोबाइल नंबर से एक्टिव सिम कार्ड से लिंक रखना है। DoT का कहना है कि इससे ऑनलाइन स्कैम को रोकना है।
मैसेजिंग एप्स के लिए SIM-Binding के नियम
DoT ने 28 नवंबर 2025 को Telecom Cyber Security Rules, 2024 के तहत सिम बाइंडिंग के निर्देश जारी किए थे। इसके साथ ही सरकार ने 1 दिसंबर 2025 को प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के जरिए इस आदेश को सार्वजनिक किया था। शुरुआत में इसे लागू करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया था। बाद में इसे पालन करने की समय सीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी गई थी। शुरुआत में इसमें WhatsApp, Telegram, Snapchat, Arattai, ShareChat, Josh, JioChat और Signal एप्स शामिल थे। ये नियम उन एप्स के लिए हैं, जो कम्युनिकेशन सर्विस ऑफर करते हैं, जो यूजर्स की पहचान या सेवाएं देने के लिए इंडियन मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करते हैं।
WhatsApp और Telegram जैसे एप्स के लिए कैसे काम करेगा सिम बाइंडिंग
SIM-बाइंडिंग के नियम के तहत मैसेजिंग एप को यूजर्स के रजिस्टर्ड इंडियन मोबाइल नंबर के एक्टिव सिम कार्ड से लिंक रहना अनिवार्य होगा। अगर SIM कार्ड निकाल दिया जाता है या सिम एक्टिव नहीं रहता है, तो एप उस डिवाइस काम नहीं करेगी। इसके लिए सर्विस प्रोवाइडर्स को कुछ एडिशनल काम करने होंगे। जैसे ही यूजर डिवाइस से सिम कार्ड निकलता है तो वे एप एक्सेस नहीं कर पाएंगे।
इसके साथ ही वेब वर्जन के लिए भी नियम लाए गए हैं। अगर कोई यूजर्स एप के वेब वर्जन इस्तेमाल कर रहे हैं तो वेब वर्जन से यूजर्स को पहले तय समय पर दोबारा लिंक करना जरूरी था। अब सरकार ने इसकी जगह जोखिम के आधार पर नियम लागू करने का तरीका अपनाया है। खबरों की मानें तो कई मैसेजिंग एप्स ने इन नियमों के पालन की तैयारी भी शुरू कर दी है। वॉट्सएप पर इसके लिए ट्रैकर फीचर लेकर आएगा, जो यह चेक करेगा कि यूजर के फोन में सिम कार्ड मौजूद है या नहीं।
इस नियम का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जो अक्सर अपना सिम कार्ड निकालकर दूसरे फोन में स्विच करते रहते हैं। हालांकि सरकार कहना है कि इन नियमों से डिजिटल स्कैम को कम किया जा सकता है। टेलीकॉम डिपार्टमेंट का कहना था कि बैंकिंग और यूपीआई एप्स में सिम-लिंक्ड वेरिफिकेशन को सफलता पूर्वक किया गया है।
