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भारत में अचानक महंगे हुए MacBook और iPad, कई मॉडल्स पर सीधे 1 लाख रुपये तक बढ़ी कीमत; ये है वजह

Published: Fri, 26 Jun 2026 09:00 AM (IST)

Apple के प्रीमियम प्रोडक्ट्स MacBook और iPad खरीदने का प्लान बना रहे भारतीय यूज़र्स को एक बड़ा झटका लगा है। ...और पढ़ें

बजट लैपटॉप से लेकर फ्लैगशिप टैबलेट तक सब महंगे हुए Apple प्रोडक्ट्स। Photo- UnSplash.

बजट लैपटॉप से लेकर फ्लैगशिप टैबलेट तक सब महंगे हुए Apple प्रोडक्ट्स। Photo- UnSplash.

टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। Apple ने भारत में अपने MacBook और iPad लाइनअप की कीमतें बढ़ा दी हैं, जिसमें कुछ मॉडल्स के दाम में 1 लाख रुपये तक की बढ़ोतरी देखी गई है। ये बदली हुई कीमतें Apple के CEO टिम कुक के उस बयान के कुछ ही दिनों बाद सामने आई हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि कीमतों में बढ़ोतरी होने वाली है क्योंकि इस समय इसे टालना नामुमकिन है। इसका जिम्मेदार ग्लोबल सप्लाई चेन में बढ़ रही मेमोरी कॉस्ट को ठहराया जा सकता है। कीमतों में ये बदलाव Apple की इंडिया वेबसाइट पर दिखने लगा है, जहां कई MacBook मॉडल्स अब अपने लॉन्च प्राइस के मुकाबले काफी ज्यादा कीमत पर लिस्टेड हैं। इस फैसले का असर MacBook Air और MacBook Pro दोनों वेरिएंट्स के साथ-साथ Apple के हाल ही में पेश किए गए बजट लैपटॉप सेगमेंट पर भी पड़ा है।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, M5 चिप वाला MacBook Air, जो भारत में 1,19,900 रुपये में लॉन्च हुआ था, अब 1,49,900 रुपये पर लिस्टेड है। यानी कुछ ही समय के भीतर इसके दाम 30,000 रुपये बढ़ गए हैं। इसी तरह, 15-इंच वाला MacBook Air वेरिएंट, जिसे पहले 1,44,900 रुपये में पेश किया गया था, अब 1,79,900 रुपये के प्राइस टैग के साथ मिल रहा है, जो कि 35,000 रुपये की बढ़ोतरी दिखाता है।

MacBook Pro लाइनअप में कीमतों का ये बदलाव और भी ज्यादा बड़ा है। M5 चिप और 16GB RAM वाला बेस 14-इंच MacBook Pro, जो 1,69,900 रुपये पर लॉन्च हुआ था, अब 2,39,900 रुपये पर लिस्टेड है। ये सीधे 70,000 रुपये की भारी बढ़ोतरी है, जो भारत में Apple के हालिया पोर्टफोलियो में सबसे बड़े प्राइस एडजस्टमेंट्स में से एक है।

यहां तक कि Apple का सबसे किफायती सेगमेंट भी इससे अछूता नहीं रहा है। कंपनी के सबसे बजट-फ्रेंडली लैपटॉप ऑप्शन के तौर पर पेश किए गए MacBook Neo की कीमत में 10,000 रुपये की बढ़ोतरी देखी गई है। इस मॉडल से फर्स्ट-टाइम लैपटॉप बायर्स और स्टूडेंट्स को अट्रैक्ट करने की उम्मीद थी, लेकिन ये नया प्राइस अब इसे इसकी शुरुआती पोजिशनिंग से थोड़ा ऊपर ले जाता है। वहीं, MacBook Pro (14-इंच) के M5 Max वेरिएंट के मामले में कीमत में सीधे 1 लाख रुपये का इजाफा किया गया है।

M4 प्रोसेसर वाले 11-इंच iPad Air के लिए अब आपको 89,900 रुपये खर्च करने होंगे। याद दिला दें कि इसी टैबलेट को भारत में 64,900 रुपये में अनाउंस किया गया था। इसका मतलब है कि Apple ने इस iPad की कीमत में 25,000 रुपये की बढ़ोतरी की है। इसी तरह, iPad Pro भी काफी महंगा हो गया है, जिसमें M5 चिप और बेस 256GB स्टोरेज वाले मॉडल की कीमत अब भारत में 1,39,900 रुपये है। इसे पिछले साल 99,990 रुपये में पेश किया गया था, यानी Apple ने इसका दाम 39,910 रुपये बढ़ा दिया है।

Apple ने भारत में MacBook, iPad की कीमतें 1 लाख रुपये तक बढ़ाईं

  • MacBook Air 13-इंच (M5): लॉन्च प्राइस - 1,19,900 रुपये। नई कीमत - 1,49,900 रुपये (30,000 रुपये की बढ़ोतरी)
  • MacBook Air 15-इंच: लॉन्च प्राइस - 1,44,900 रुपये। नई कीमत - 1,79,900 रुपये (35,000 रुपये की बढ़ोतरी)
  • MacBook Pro 14-इंच (M5, 16GB RAM): लॉन्च प्राइस - 1,69,900 रुपये। नई कीमत - 2,39,900 रुपये (70,000 रुपये की बढ़ोतरी)
  • MacBook Neo: लॉन्च प्राइस - 69,900 रुपये। नई कीमत - 79,900 रुपये (10,000 रुपये की बढ़ोतरी)
  • MacBook Pro 14-इंच (M5 Max वेरिएंट): कीमत में सीधे 1,00,000 रुपये की बढ़ोतरी
  • iPad Air 11-इंच (M4): लॉन्च प्राइस - 64,900 रुपये। नई कीमत - 89,900 रुपये (25,000 रुपये की बढ़ोतरी)
  • iPad Pro (256GB, M5): लॉन्च प्राइस - 99,990 रुपये। नई कीमत - 1,39,900 रुपये (39,910 की बढ़ोतरी)

Apple ने अमेरिकी कीमतें भी बढ़ाईं

US मार्केट में iPad Air अब 599 डॉलर के बजाय 749 डॉलर से शुरू होता है, जबकि iPad Pro 999 डॉलर से बढ़कर 1,199 डॉलर हो गया है। हाई-एंड डेस्कटॉप-क्लास मशीनों की कीमतों में भी भारी उछाल देखा जा रहा है, जहां ग्लोबल मार्केट्स में Mac Studio मॉडल्स की कीमतें काफी ऊपर चली गई हैं।

Apple ने अपने MacBook लाइनअप के लिए भी कीमतें बदली हैं, जिसकी शुरुआत नए MacBook Neo से होती है, जो अब अपने पहले के लॉन्च प्राइस 599 डॉलर के मुकाबले 699 डॉलर से शुरू होता है।

बेस MacBook Air की कीमत में भी बढ़ोतरी देखी गई है, जो 1,099 डॉलर से बढ़कर अब 1,299 डॉलर हो गई है। इसके अलावा, 14-इंच वाला MacBook Pro भी महंगा हो गया है, जिसकी कीमत अब पहले के 1,699 डॉलर के बजाय 1,999 डॉलर हो गई है।

ये बदलाव Apple के CEO टिम कुक द्वारा दी गई उस चेतावनी के कुछ समय बाद आए हैं, जिसमें उन्होंने आगाह किया था कि कंपोनेंट सप्लाई चेन, खासकर मेमोरी में चल रहे दबाव के कारण कीमतों में बढ़ोतरी से बचना मुश्किल होता जा रहा है। इंडस्ट्री ट्रैकिंग से संकेत मिलता है कि हाई-परफॉर्मेंस मेमोरी मॉड्यूल्स की कमी और बढ़ती लागत ने कई केटेगरीज में सीधे फाइनल डिवाइस प्राइसेज को इंपैक्ट करना शुरू कर दिया है।

क्या है इसकी बड़ी वजह?

Apple के लिए, मेमोरी उसकी प्रोडक्ट स्ट्रेटेजी का एक क्रिटिकल हिस्सा है, खासकर जब नए Macs और iPads को लगातार हायर बेस रैम और यूनिफाइड मेमोरी आर्किटेक्चर के साथ कॉन्फिगर किया जा रहा है। सप्लाई कम होने और कॉन्ट्रैक्ट प्राइसिंग ऊपर जाने की वजह से मैन्युफैक्चरर्स इस लागत का एक हिस्सा एंड-यूजर्स पर डाल रहे हैं।

इंडिया टुडे टेक को दिए एक बयान में Apple ने कहा, 'हमने कभी किसी कंपोनेंट की कीमत में इतनी जल्दी, इतनी बड़ी बढ़ोतरी नहीं देखी है। हमने अब तक अपने कस्टमर्स को इन बढ़ती कीमतों से बचाकर रखा, लेकिन अब हम एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं जहां हमें कई प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाना शुरू करना होगा, जिसमें आज iPad और Mac के लिए की गई बढ़ोतरी भी शामिल है।'

भारत में इसका असर ज्यादा साफ दिखाई देता है क्योंकि यहां Apple प्रोडक्ट्स का प्राइस स्ट्रक्चर पहले से ही काफी प्रीमियम है। लॉन्च के कुछ ही हफ्तों के भीतर 30,000 से 70,000 रुपये का उछाल आना Mac लाइनअप के लिए भी असामान्य है, जिसमें आमतौर पर लॉन्चिंग के बाद कीमतें स्टेबल रहती हैं। ये नया प्राइस लोगों के खरीदने के फैसले को प्रभावित कर सकता है, खासकर स्टूडेंट्स, पुराने Macs से अपग्रेड करने वाले प्रोफेशनल्स और Apple इकोसिस्टम में एंट्री करने की सोच रहे यूजर्स के लिए।

Cybermedia Research के वाइस प्रेसिडेंट प्रभु राम के मुताबिक, Apple की ओर से कीमतों में की गई यह बढ़ोतरी मौजूदा मार्केट की स्थिति का एक रियलिटी चेक है। इंडिया टुडे टेक से बात करते हुए राम ने कहा, 'कई कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स केटेगरीज में कीमतें बढ़ती हुई साफ दिखने लगी हैं। यहां तक कि सप्लाई चेन की मजबूती के लिए इंडस्ट्री का बेंचमार्क माने जाने वाले Apple ने भी बढ़ी हुई कंपोनेंट कॉस्ट का बोझ कंज्यूमर्स पर डालना शुरू कर दिया है। ये एक मजबूत संकेत है कि प्राइसिंग प्रेशर उस लेवल पर पहुंच गया है जहां सबसे बेहतरीन एब्जॉर्प्शन स्ट्रेटेजीज भी इसे पूरी तरह ऑफसेट नहीं कर सकतीं। कम स्केल और कमजोर सप्लाई चेन लेवरेज वाले OEMs के लिए, इसका असर और भी ज्यादा गहरा होने की संभावना है।'

इसके साथ ही, Apple की ये स्ट्रेटेजी संकेत देती है कि वह पुराने प्राइसेज को बनाए रखने के बजाय कंपोनेंट्स की उपलब्धता और कॉन्फिगरेशन की स्टेबिलिटी को प्रायोरिटी दे रहा है। दुनिया भर में हाई-परफॉर्मेंस लैपटॉप्स की बढ़ती डिमांड को देखते हुए, कंपनी रीजनल मार्केट की उम्मीदों के बजाय सप्लाई-साइड की हकीकत के हिसाब से कीमतें एडजस्ट करती हुई दिख रही है।

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