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क्या अब UPI पेमेंट करने पर कटेगा पैसा? NPCI ने दूर किया हर कन्फ्यूजन, जानें 25 सवालों के जरिए जवाब

Published: Tue, 15 Sep 2026 08:41 PM (IST)Updated: Tue, 15 Sep 2026 10:13 PM (IST)

NPCI ने UPI ट्रांजैक्शन्स पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर जरूरी सवालों की डिटेल्ड FAQ जारी कर ...और पढ़ें

UPI ट्रांजैक्शन्स पर MDR को लेकर NPCI ने जारी किए FAQs. Photo- ChatGPT.

UPI ट्रांजैक्शन्स पर MDR को लेकर NPCI ने जारी किए FAQs. Photo- ChatGPT. 

टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। NPCI ने 15 सितंबर को 2,000 रुपये से ऊपर के UPI ट्रांजैकशन्स पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर एक डिटेल्ड FAQ लिस्ट जारी की है। वैसे MDR अभी लागू नहीं हुआ है, लेकिन NPCI ने सोमवार को साफ किया कि 2,000 रुपये से कम के UPI या RuPay कार्ड ट्रांजैक्शन्स पर कोई चार्ज नहीं लगाया जाएगा।

NPCI के मुताबिक, 2,000 रुपये से ऊपर के सभी ट्रांजैक्शन्स पर MDR मैक्जिमम 0.4% तय किया जाएगा। इसके साथ ही ये भी साफ किया गया है कि ये चार्जेस केवल मर्चेंट पर लागू होंगे, पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांजैक्शन्स पर नहीं।

आइए उन सवालों और उनके जवाबों के बारे में जानते हैं जो आपके लिए जरूरी हैं। ये FAQs NPCI द्वारा जारी किए गए हैं।

Q1. मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) अब क्यों लाया जा रहा है?

जवाब: UPI हर महीने अरबों ट्रांजैक्शन्स प्रोसेस करता है। MDR से आने वाला पैसा सिर्फ UPI इकोसिस्टम में ही बांटा जाता है, ताकि इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती, नए इनोवेशन, साइबर सिक्योरिटी (बैंकों और नॉन-बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा) और कस्टमर सर्विस में आगे निवेश किया जा सके। UPI भारत का स्वदेशी पेमेंट सिस्टम है और इसके चार्जेस (MDR) क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या वॉलेट्स जैसे दूसरे पेमेंट मोड्स से काफी कम हैं। चार्जेस को बेहद वाजिब रखा गया है और ये केवल 2,000 रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन्स पर लागू होगा ताकि UPI पेमेंट एक्सेप्ट करने का सबसे सस्ता जरिया बना रहे।

Q2. क्या छोटे अमाउंट वाले UPI पेमेंट्स पर कोई असर पड़ेगा?

जवाब: 2,000 रुपये तक के छोटे पेमेंट्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा। टोटल UPI (P2M) ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में ऐसे छोटे पेमेंट्स की हिस्सेदारी 95% से भी ज्यादा है। इस मामूली MDR को लाने का मकसद यही है कि रोजाना के लेन-देन के लिए UPI हमेशा सुलभ और आसान बना रहे, साथ ही पूरे इकोसिस्टम की लॉन्ग-टर्म स्टेबिलिटी भी बनी रहे।

Q3. मर्चेंट्स पर कितना UPI MDR लगाया जा रहा है?

जवाब: 2,000 रुपये से ऊपर के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI पेमेंट्स पर 0.4% का MDR लगाया जाएगा। वहीं, 75,000 रुपये और उससे ज्यादा के बड़े ट्रांजैक्शन्स के लिए MDR की मैक्जिमम लिमिट 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है।

Q4. ट्रेडिशनल डेबिट और क्रेडिट कार्ड के मुकाबले UPI MDR कितना अलग है?

जवाब: UPI MDR को कार्ड-बेस्ड फीस के मुकाबले काफी कम रखा गया है। आमतौर पर स्टैंडर्ड क्रेडिट कार्ड पर 1.5% से 2.5% और डेबिट कार्ड पर 0.90% तक का MDR लगता है। वहीं, 2,000 रुपये से ऊपर के UPI पेमेंट्स पर बेसलाइन MDR महज 0.4% तय किया गया है और बड़े पेमेंट्स के लिए इसे 300 रुपये पर कैप कर दिया गया है। इससे कमर्शियल स्टोर्स और व्यापारियों का पेमेंट प्रोसेसिंग खर्च काफी कम रहता है।

Q5. ये नए MDR नियम कब से लागू होंगे?

जवाब: ये फाइनल MDR फ्रेमवर्क 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। ये टाइमलाइन इसलिए दी गई है ताकि बैंकों, पेमेंट एग्रीगेटर्स, फिनटेक एप्स और अकाउंटिंग प्लेटफॉर्म्स को अपने सॉफ्टवेयर और बिलिंग सिस्टम अपडेट करने का पूरा समय मिल सके।

Q6. इंटरनेशनल पेमेंट सिस्टम्स की तुलना में ये कैसा है?

जवाब: दुनिया भर के ज्यादातर डिजिटल पेमेंट सिस्टम्स ऐसे इकोनॉमिक मॉडल पर चलते हैं जो अपने इंफ्रास्ट्रक्चर और इनोवेशन का खर्च खुद निकालते हैं। भारत का अप्रोच हमेशा से बड़े पैमाने पर लोगों को जोड़ने और इसे किफायती बनाए रखने पर केंद्रित रहा है।

Q7. MDR कैप और नियमों को लागू करने का अंतिम फैसला किसका होता है?

जवाब: इसके ऑपरेशनल नियम, फीस बंटवारे का मॉडल और कैटेगरी कैप्स का फैसला NPCI के नेतृत्व वाली 'UPI and Services Steering Committee' द्वारा किया जाता है।

Q8. छोटे मर्चेंट्स के लिए MDR से बनने वाले डेडिकेटेड फंड का क्या प्लान है?

जवाब: टियर 3 से टियर 6 शहरों, पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए एक स्पेशल फंड बनाया जाएगा। टियर 1 और 2 शहरों में केंद्र सरकार की नोटिफाइड स्कीम्स (जैसे PM SVANidhi, PM Vishwakarma) को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इस फंड का इस्तेमाल छोटे मर्चेंट्स को जोड़ने और उन्हें इंसेंटिव देने में भी होगा।

Q9. ये डेडिकेटेड फंड छोटे दुकानदारों की मदद कैसे करेगा?

जवाब: ये फंड एक्वायरिंग बैंकों और पेमेंट एग्रीगेटर्स को आर्थिक मदद देगा ताकि वे ग्रामीण और टियर-3 इलाकों में छोटे व्यापारियों को UPI से जोड़ सकें। इससे छोटे कारोबारियों में डिजिटल पेमेंट्स अपनाने की रफ्तार तेज होगी। इस बारे में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के साथ मिलकर अगले तीन महीनों में डिटेल्ड फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा।

Q10. UPI के लिए सिर्फ सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रहना अब काफी क्यों नहीं है?

जवाब: शुरुआती दौर में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए सालाना सरकारी सब्सिडी एक शॉर्ट-टर्म ब्रिज की तरह थी, न कि हमेशा के लिए। इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, UPI सर्वर बैंडविड्थ, फ्रॉड प्रिवेंशन सिस्टम्स और बैंक टेक्निकल सपोर्ट को मेंटेन रखने में हर साल करीब 20,000 करोड़ रुपये का खर्च आता है। सिर्फ बजट आवंटन पर निर्भर रहने से अनिश्चितता रहती है। इसलिए एक कमर्शियल मॉडल से नई टेक्नोलॉजी में लगातार निवेश का रास्ता साफ होगा।

Q11. इस कदम से पेमेंट एप्स के बीच कॉम्पिटिशन कैसे बढ़ेगा?

जवाब: जीरो-MDR मॉडल में सिर्फ वही बड़ी और भारी फंडिंग वाली टेक कंपनियां टिक सकती थीं जो लगातार नुकसान उठाने की क्षमता रखती हैं। एक कमर्शियल रेवेन्यू मॉडल आने से नए और छोटे फिनटेक स्टार्टअप्स के लिए भी लेवल प्लेइंग फील्ड बनेगा। मार्केट में कॉम्पिटिशन बढ़ने से यूजर्स को बेहतर सर्विसेज, बेहतर एप स्टेबिलिटी और ज्यादा चॉइस मिलेंगी।

Q12. ये पॉलिसी साइबर सुरक्षा को कैसे मजबूत बनाएगी?

जवाब: MDR से मिलने वाले रेवेन्यू का इस्तेमाल साइबर सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर, AI-बेस्ड फ्रॉड डिटेक्शन और मॉडर्न एन्क्रिप्शन अपग्रेड्स में निवेश के लिए किया जाएगा।

Q13. 2026 तक UPI का इंटरनेशनल विस्तार कहां तक पहुंचा है?

जवाब: साल 2026 तक UPI की ग्लोबल पहुंच काफी बढ़ चुकी है और अब 11 विदेशी देशों में इसकी लाइव पेमेंट सर्विसेज एक्टिव हैं। घरेलू स्तर पर सिस्टम को सेल्फ-सस्टेनिंग बनाने से ग्लोबल लेवल पर भारत की स्थिति और मजबूत होगी।

Q14. UPI का मौजूदा ट्रांजैक्शन स्केल क्या है और इसे आत्मनिर्भर बनाना क्यों जरूरी है?

जवाब: अकेले अगस्त 2026 में UPI के जरिए 29.9 लाख करोड़ रुपये वैल्यू के रिकॉर्ड 2,451 करोड़ ट्रांजैक्शन्स प्रोसेस किए गए। इतने बड़े स्केल को संभालने के लिए विशाल फिजिकल सर्वर, हाई-स्पीड टेलीकॉम लाइन्स, स्पेशलाइज्ड बैंकिंग सॉफ्टवेयर और मल्टी-टियर सिक्योरिटी मॉनिटरिंग की जरूरत होती है, जिसके लिए एक सेल्फ-सस्टेनिंग फंडिंग मॉडल बेहद जरूरी था।

Q15. क्या आम ग्राहकों से UPI पेमेंट करने पर कोई चार्ज लिया जाएगा?

जवाब: बिल्कुल नहीं। कंज्यूमर्स के लिए UPI सर्विसेज पूरी तरह फ्री रहेंगी। लोग पहले की तरह ही बिना किसी चार्ज के लेन-देन जारी रख सकते हैं। रोजमर्रा के खर्चों के लिए आम यूजर्स को किसी भी तरह के चार्ज की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

Q16. क्या दोस्तों या परिवार को पैसे भेजने (P2P) पर कोई चार्ज लगेगा?

जवाब: नहीं, पर्सन-टू-पर्सन (P2P) पेमेंट्स भेजने वाले और पाने वाले दोनों के लिए हमेशा की तरह 100% फ्री रहेंगे। चाहे आप परिवार को पैसे भेजें, दोस्तों के साथ बिल स्प्लिट करें या अपने ही दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर करें- कोई भी चार्ज नहीं लगेगा।

Q17. क्या UPI एप्स अब प्लेटफॉर्म फीस वसूलना शुरू करेंगे?

जवाब: नहीं। UPI एप प्रोवाइडर्स को UPI पेमेंट पर प्लेटफॉर्म फीस या कोई दूसरे चार्ज लगाने की सख्त मनाही है।

Q18. क्या मर्चेंट पर मामूली चार्ज लगने से दुकानों में सामान के दाम बढ़ जाएंगे?

जवाब: नहीं। मर्चेंट्स ज्यादा बिक्री और बिजनेस बढ़ाने के लिए पेमेंट प्रोसेसिंग की इस मामूली लागत को खुद वहन करते हैं। डिजिटल पेमेंट से ग्राहकों की संख्या बढ़ती है और कैश संभालने का जोखिम कम होता है। चूंकि, UPI MDR क्रेडिट कार्ड से काफी कम है और सिर्फ बड़े पेमेंट्स पर लगता है, इसलिए दुकानदारों के पास सामान के दाम बढ़ाने की कोई वजह नहीं होगी।

Q19. क्या लोकल वेंडर या ठेले पर QR कोड स्कैन करने पर चार्ज देना होगा?

जवाब: नहीं। लोकल मार्केट, रेहड़ी-पटरी या छोटी दुकानों पर QR कोड स्कैन करके पेमेंट करना पूरी तरह फ्री रहेगा। चाय के स्टॉल, किराने या लोकल ट्रांसपोर्ट जैसी रोजमर्रा की छोटी खरीदारी को चार्ज के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

Q20. क्या आम यूजर्स के लिए फ्री UPI ट्रांजैक्शन्स की कोई मंथली लिमिट है?

जवाब: नहीं, आम यूजर्स के लिए महीने में फ्री UPI पेमेंट्स की कोई कोटा या वॉल्यूम लिमिट नहीं है। यूजर जितने चाहें उतने वैलिड P2P या P2M ट्रांजैक्शन्स कर सकते हैं। बैंकों द्वारा तय की गई 1 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक की डेली लिमिट केवल सिक्योरिटी और रिस्क मैनेजमेंट के लिए होती है, कमर्शियल चार्ज के लिए नहीं।

Q21. आम यूजर्स UPI चार्ज से जुड़ी सही जानकारी कहां चेक कर सकते हैं?

जवाब: नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे सिर्फ वित्त मंत्रालय, RBI या NPCI द्वारा जारी ऑफिशियल अपडेट्स पर ही भरोसा करें। सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों और भ्रामक मैसेजेस को फॉरवर्ड करने से बचें। PIB, RBI और NPCI की ऑफिशियल अपडेट्स ही सबसे पुख्ता सोर्स हैं।

Q22. क्या यूटिलिटी बिल, OTT या म्यूचुअल फंड जैसे ऑटो-डेबिट पेमेंट्स पर भी MDR लगेगा?

जवाब: नहीं। ऑटोमेटेड रिकरिंग पेमेंट्स, जिन्हें UPI Mandates या AutoPay कहा जाता है, उन पर कोई MDR ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लगेगा। बिजली-पानी के बिल, OTT सब्सक्रिप्शन और मंथली म्यूचुअल फंड SIP जैसे ऑटो-डेबिट पूरी तरह चार्ज-फ्री रहेंगे।

Q23. अगर किसी छोटे व्यापारी को 2,000 रुपये से ज्यादा का पेमेंट मिलता है, तो क्या होगा?

जवाब: MDR लागू होगा या नहीं, ये व्यापारी के अकाउंट की कैटेगरी से तय होता है। 2,000 रुपये से ज्यादा का पेमेंट मिलने पर, P2PM जैसी छूट वाली कैटेगरी में काम करने वाले छोटे व्यापारी पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।

2,000 रुपये से ज्यादा के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% का MDR लागू होगा। 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए, MDR की मैक्जिमम लिमिट 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन होगी।

Q24. किन खास कैटेगरीज के लिए परसेंटेड रेट के बजाय फ्लैट MDR लागू होता है?

जवाब: रेलवे, टेलीकॉम सर्विस, इंश्योरेंस और फ्यूल जैसी खास मर्चेंट कैटेगरीज के लिए, 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का फ्लैट MDR लागू होगा।

0.4% की वेरिएबल दर लागू करने के बजाय, ये खास सेक्टर ट्रांजैक्शन की रकम चाहे जो भी हो, 5 रुपये की फिक्स्ड फीस देते हैं। ये फ्लैट-रेट मॉडल जरूरी पब्लिक सर्विस, यूटिलिटी बिल कलेक्शन और फ्यूल रिटेल जैसे कम मार्जिन वाले सेक्टर में लागत बढ़ने से रोकता है। ये पक्का करता है कि जरूरी कंज्यूमर सर्विस कम लागत वाली और डिजिटल तरीके से एफिशिएंट बनी रहें।

Q25. क्या सरकारी यूटिलिटी बिल कलेक्शन (बिजली, पानी) पर परसेंटेज के हिसाब से MDR लगेगा?

जवाब: इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन, म्युनिसिपल वाटर चार्ज और पाइप्ड नेचुरल गैस जैसे पब्लिक यूटिलिटी पेमेंट, तय इंडस्ट्री प्रोग्राम कैटेगरी में आते हैं। 2,000 रुपये से ड्यादा के यूटिलिटी बिल पेमेंट पर 0.4% के वेरिएबल रेट के बजाय 5 रुपये का फिक्स्ड रियायती MDR लगता है। 2,000 रुपये से कम के यूटिलिटी ट्रांजैक्शन पर कोई MDR नहीं लगता है। ये सिस्टम ये पक्का करता है कि राज्य के यूटिलिटी बोर्ड और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ज्यादा प्रोसेसिंग फीस दिए बिना बिल कलेक्शन को डिजिटल बना सकें, जिससे पब्लिक यूटिलिटी सर्विस सस्ती बनी रहें।

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