नई दिल्ली, टेक डेस्क. पीटीआइ भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने ओटीटी प्लेटफॉर्म को नए नियम-कानून के दायरे में लाने की मांग को खारिज कर दिया है। ट्राई ने सोमवार को कहा कि फिलहाल ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए नए नियम-कानून की जरूरत नही है। ऐसे में ट्राई की तरफ से ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए तत्काल प्रभाव से रेग्यूलेटरी फ्रेमवर्क नही बनाया जाएगा। ट्राई ने कहा कि अगर भविष्य में इसकी जरूरत महसूस होती है, तो जरूर इस मामले को लेकर रेग्यूलेटरी फ्रेमवर्क बनाया जाएगा। 

मोबाइल नेटवर्क की कमाई पर असर 

ट्राई ने साफ किया कि इस मामले में उस वक्त नए सिरे से विचार किया जाएगा, जब इंटरनेशनल टेलिकम्यूनिकेशन यूनियन (ITU) ओटीटी प्लेटफॉर्म को लेकर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ओटीटी प्लेटफॉर्म को लेकर ज्यादा स्पष्टता आएगी। बता दें कि मोबाइल ऑपरेटर्स की तरफ से ट्राई और सरकार के समक्ष ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए एक रेग्यूलेटरी फ्रेमवर्क बनाने की मांग की गई थी। मोबाइल ऑपरेटर्स का मानना है कि ओटीटी कंपनियां किसी भी नियम कानून के दायरे में नही आते हैं और ग्राहकों को उनके ही नेटवर्क से मुफ्त में तमाम तरह की सर्विस उपलब्ध कराती हैं। इसके चलते मोबाइल नेटवर्क की होने वाली कमाई पर असर पड़ता  है। 

ओटीटी के खिलाफ माहौल बनाने की जरूरत नही 

ट्राई ने कहा कि ओटीटी सर्विस से जुड़े प्राइवेसी और सिक्योरिटी के मुद्दे को लेकर मौजूदा वक्त में रेग्यूलेटी फ्रेमवर्क बनाकर दखलंदाजी नही करनी चाहिए। ट्राई ने अपने बयान में कहा कि ओटीटी सर्विस के लिए मौजूदा नियम कानून से अलग एक रेग्यूलेटरी फ्रेमवर्क बनाने का प्रस्ताव ठीक नही है। ट्राई ने कहा कि इसे ओटीटी सर्विस के खिलाफ एक मौके के तौर पर नही लिया जाना चाहिए। ट्राई ने कहा कि ओटीटी सर्विस के लिए रेग्यूलेटरी फ्रेमवर्क बनाने का मुद्दा नवंबर 2018 में उठा था, उस वक्त इस मामले में एक चर्चा हुई थी और इंड्रस्ट्री से इस मामले में कई मुद्दों पर राय मांगी गई थी। ट्राई ने माना कि टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर और ओटीटी सर्विस के मुद्दे में काफी समानता थी।

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