एक गलती और बैंक अकाउंट साफ! फर्जी NOC भेजकर लोगों को ऐसे जाल में फंसा रहे हैं स्कैमर्स; जानें बचने के तरीके
देश के शहरों, कस्बों और गांवों में हर तरफ मोबाइल टावर लगे हुए हैं। टेलीकॉम कंपनियां लगातार अपना नेटवर्क बढ़ा ...और पढ़ें

मोबाइल टावर स्कैम से बचकर रहें। Photo- ChatGPT.
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। मोबाइल टावर आज शहरों, कस्बों और गांवों में हर जगह मौजूद हैं। जैसे-जैसे टेलीकॉम कंपनियां ज्यादा नेटवर्क बना रही हैं, कई लोग टावर लगाने के लिए अपनी जमीन या छतों को किराए पर देना चाहते हैं। अपराधी इस मौके का फायदा उठाकर नकली ऑफर्स और फर्जी डॉक्यूमेंट्स से लोगों को धोखा दे रहे हैं। हाल के महीनों में, देश के अलग-अलग हिस्सों से मोबाइल टावर लगाने के नाम पर धोखाधड़ी की कई रिपोर्ट सामने आई हैं। पीड़ितों से अच्छे मंथली रेंट का वादा किया जाता है और उनसे प्रोसेसिंग या एग्रीमेंट के लिए फीस मांगी जाती है। सरकारी अधिकारियों ने कई बार चेतावनी दी है कि ये स्कीम्स पूरी तरह फर्जी हैं। ये स्कैम कैसे काम करता है, आइए जानते हैं इस बारे में।
मोबाइल टावर स्कैम
प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के फैक्ट चेक यूनिट ने हाल ही में एक नए फ्रॉड का पर्दाफाश किया है। इसमें स्कैमर्स यूजर्स को फर्जी NOC भेज रहे थे और उनसे अपनी जमीन पर टावर लगाने के लिए एग्रीमेंट फीस मांग रहे थे। अधिकारियों ने साफ किया है कि शेयर किया गया डॉक्यूमेंट पूरी तरह फर्जी है और नागरिकों से इस फ्रॉड को लेकर जागरूक रहने की अपील की है।
कैसे काम करता है ये मोबाइल टावर स्कैम?
ये धोखाधड़ी आमतौर पर तब शुरू होती है जब कोई व्यक्ति टेलीकॉम टावर लगाने के लिए आपसे संपर्क करता है और आपको किराए के तौर पर अच्छे पैसे देने का वादा करता है। ये स्कैमर्स खुद को बिल्कुल प्रोफेशनल दिखाते हैं और एक बार जब वे आपका भरोसा जीत लेते हैं, तो वे आपको एक नकली NOC भेजते हैं और एग्रीमेंट फीस के तौर पर 2,500 रुपये भेजने के लिए कहते हैं। कई बार वे इसे रजिस्ट्रेशन चार्ज, प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट, सर्वे फीस या एग्रीमेंट चार्ज का नाम देते हैं। जैसे ही आप उन्हें पैसे भेजते हैं, या तो वे गायब हो जाते हैं या फिर कोई दूसरा कारण बताकर आपसे और पैसों की मांग करने लगते हैं।
🚨Be wary of mobile tower installation frauds🚨
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) June 30, 2026
A #FAKE NOC allegedly issued by Dept Of Telecommunications claims to install mobile tower at recipient's location & seeks ₹2,500 as agreement fees#PIBFactCheck:
❌ @DoT_India has issued NO such certificate… pic.twitter.com/Bvg0LyqwU3
कुछ स्कैमर्स आपसे आपके बैंक और फाइनेंशियल डिटेल्स भी मांग सकते हैं। अगर आप उन्हें ये जानकारियां भेजते हैं, तो आपका बैंक अकाउंट खाली हो सकता है।
मोबाइल टावर स्कैम से कैसे सुरक्षित रहें?
हमेशा याद रखें कि असली टेलीकॉम कंपनियां कभी भी प्रॉपर्टी के मालिकों से टावर लगाने की मंजूरी के लिए किसी तरह की फीस नहीं मांगती हैं। किसी भी ऑफर की जांच करने के लिए हमेशा टेलीकॉम कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट या उनके कस्टमर सर्विस नंबर के जरिए उनसे सीधे संपर्क करें।
किसी भी ऐसे व्यक्ति को अपनी पर्सनल जानकारी या बैंक डिटेल्स न बताएं जिसे आप नहीं जानते हैं, भले ही वह पूरी तरह ऑफिशियल क्यों न लग रहा हो। जब भी आपको कोई डॉक्यूमेंट या जानकारी मिले, तो उसे बहुत ध्यान से देखें। उसमें स्पेलिंग या ग्रामर की गलतियां, अजीब फॉर्मेटिंग या अजीब लेआउट और कॉन्टैक्ट डिटेल्स को जरूर चेक करें जो पहली नजर में सही न लग रही हों।
